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टीबी मरीजों की जानकारी नहीं दे रहे निजी अस्पताल

Sat, 11 Jun 2022 10:45 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jun 2022 10:45 PM IST
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private hospirtal information not share of  tb patient
जिला अस्पताल के परिसर में स्थित क्षय रोग केंद्र। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
टीबी मरीजों की जानकारी नहीं दे रहे निजी अस्पताल
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- क्षय रोग अस्पताल में केवल 12 अस्पताल ही देर रहे सूचना
-जिले में 1,300 सामान्य टीबी एवं 150 एमडीआर श्रेणी के हैं मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। टीबी मरीजों की तलाश करने में जिले के निजी अस्पताल सहयोग नहीं कर रहे हैं। जिला क्षय रोग नियंत्रण विभाग के प्रयासों के बावजूद जिले के मात्र 12 अस्पताल ही टीबी मरीजों की सूचना भेज रहे हैं। अब अधिकारियों ने बिना सूचना दिए टीबी मरीजों का इलाज करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने की योजना बनाई है। जिन अस्पतालों के पर्चे पर टीबी मरीजों के इलाज की पुष्टि होगी, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
नियम के अनुसार टीबी का इलाज करने वाले अस्पताल, जांच करने वाले पैथोलॉजी सेंटर एवं दवा बिक्री करने वाले मेडिकल स्टोर संचालक को मरीज के बारे में जिला क्षय रोग नियंत्रण विभाग में जानकारी देनी होती है। टीबी संक्रमित मरीज को प्रतिमाह पांच सौ रुपये आर्थिक सहायता के साथ दवा नि:शुल्क दी जाती है। यदि मरीज निजी अस्पताल में इलाज कराता है तो भी उसके बैंक खाते में यह राशि भेजी जाती है, जबकि टीबी मरीज की सूचना देने अस्पताल एवं किसी अन्य व्यक्ति को पांच रुपये और उसे रोग मुक्त होने पर 500 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
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ऐसी योजना के बावजूद भी निजी अस्पतालों से टीबी मरीजों की सूचना जिला क्षय रोग नियंत्रण विभाग में नहीं भेजी जा रही है। जिले में टीबी के सामान्य मरीज 1,300 एवं एमडीआर कटेगरी में 150 मरीज हैं, जिनका नियमित इलाज किया जा रहा है।
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इस कारण है सूचना देने की आवश्यकता
टीबी मरीज को सूचीबद्ध होने के बाद विभाग की ओर से उसकी नियमित निगरानी की जाती है। यदि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण मरीज ने बीच में दवा छोड़ी दी है तो सरकारी अस्पताल में उसका इलाज कराया जाता है। एक बार अधूरी दवा रह गई तो दूसरी बार दवा शुरू हुई तो उस मरीज की स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऐसे मरीज ही एमडीआर कैटेगरी में आ जाते हैं। एमडीआर टीबी मरीज से किसी को संक्रमण हुआ तो एमडीआर संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है।
इटवा में मिला था डॉक्टर का पर्चा
जिला रोग नियंत्रण विभाग की जांच में इटवा के एक प्राइवेट अस्पताल में टीबी के इलाज का पर्चा मिला था। अधिकारियों ने उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया था। इसी प्रकार अन्य क्षेत्रों के अस्पताल में भी अनियमितता हो रही है। शहर में सात, डुमरियांज में तीन, शोहरतगढ़ व बर्डपुर में एक-एक अस्पताल ही टीबी मरीजों की सूचना भेज रहे हैं।

बिना सूचना दिए ही टीबी मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। टीबी मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों के पर्चे प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है। बिना जानकारी दिए टीबी का इलाज करने की पुष्टि होने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
- डॉ. मानवेंद्र पाल, उप जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी
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