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Siddharthnagar News: चांद के दीदार के साथ शुरू हुई इबादत
Tue, 12 Mar 2024 11:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 12 Mar 2024 11:25 AM IST
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डुमरियागंज। रमजान माह का आगाज सोमवार की शाम को चांद के दीदार के साथ हो गया। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अल्लाह की इबादत शुरू कर दी। मंगलवार को पहला रोजा रखा जाएगा। रमजान का चांद दिखने के साथ ही तरावीह की नमाज भी शुरू हो गई। इस पूरे माह रोजेदार मस्जिदों, घरों में इफ्तार करने के साथ कलाम पाक की तिलावत करेंगे। रमजान को लेकर हर तरफ चहल-पहल बढ़ गई है। मुस्लिम बहुल इलाके की रौनक देखते ही बन रही है। लोग सोमवार की देर शाम तक रोजा इफ्तार और सेहरी का सामान की खरीदारी दिखाई दिए।
मुकद्दस रमजान को लेकर सोमवार की देर शाम से डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के मुस्लिम इलाकों में कलाम पाक की तिलावत का सिलसिला मस्जिदों सहित अन्य स्थानों पर शुरू हो गया है। यह सिलसिला एक माह तक चलेगा। रमजान को लेकर इबादतगाहों और मस्जिदों के बाहर साफ-सफाई का काम दो दिन पहले ही पूरा हो चुका था। त्योहार की रौनक कई दिन पहले से ही दिखाई देने लगी थी। हर कोई अल्लाह की इबादत में मशगूल हो गया है।
रोजा रखना सभी लोगों का फर्ज
इस्लाम में पांच बातें मुसलमानों पर फर्ज (अनिवार्य) की गई हैं। उनमें रोजा भी शामिल है। पूरे माह चलने वाले रोजा को हर मुसलमान पर फर्ज किया गया है। किसी भी परिस्थिति में रोजा छोड़ना मना है। रोजा छोड़ने में सिर्फ गंभीर हालत में बीमार लोगों को छूट दी गई है, लेकिन स्वस्थ होने के बाद रोजे की भरपाई करने का हुक्म भी दिया गया है।
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रमजान में रात के आखिरी पहर में सेहरी खाने के बाद पूरे दिन कुछ भी नहीं खाया जाता है। सूर्यास्त होने यानी मगरिब की अजान से कुछ मिनट पहले इफ्तार किया जाता है। मौलाना अली अब्बास और सुफियान अख्तर नदवी ने बताया कि रोजा रखने का मतलब सिर्फ भूखा प्यासा रहना ही नहीं, बल्कि अपनी इंद्रियों पर काबू रखना होता है। रमजान का महीना रहमतों, बरकतों और मगफिरत का महीना है।
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मुकद्दस रमजान को लेकर सोमवार की देर शाम से डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के मुस्लिम इलाकों में कलाम पाक की तिलावत का सिलसिला मस्जिदों सहित अन्य स्थानों पर शुरू हो गया है। यह सिलसिला एक माह तक चलेगा। रमजान को लेकर इबादतगाहों और मस्जिदों के बाहर साफ-सफाई का काम दो दिन पहले ही पूरा हो चुका था। त्योहार की रौनक कई दिन पहले से ही दिखाई देने लगी थी। हर कोई अल्लाह की इबादत में मशगूल हो गया है।
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रोजा रखना सभी लोगों का फर्ज
इस्लाम में पांच बातें मुसलमानों पर फर्ज (अनिवार्य) की गई हैं। उनमें रोजा भी शामिल है। पूरे माह चलने वाले रोजा को हर मुसलमान पर फर्ज किया गया है। किसी भी परिस्थिति में रोजा छोड़ना मना है। रोजा छोड़ने में सिर्फ गंभीर हालत में बीमार लोगों को छूट दी गई है, लेकिन स्वस्थ होने के बाद रोजे की भरपाई करने का हुक्म भी दिया गया है।
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रमजान में रात के आखिरी पहर में सेहरी खाने के बाद पूरे दिन कुछ भी नहीं खाया जाता है। सूर्यास्त होने यानी मगरिब की अजान से कुछ मिनट पहले इफ्तार किया जाता है। मौलाना अली अब्बास और सुफियान अख्तर नदवी ने बताया कि रोजा रखने का मतलब सिर्फ भूखा प्यासा रहना ही नहीं, बल्कि अपनी इंद्रियों पर काबू रखना होता है। रमजान का महीना रहमतों, बरकतों और मगफिरत का महीना है।