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सिद्धार्थ के नाम पर विश्वविद्यालय और दर्शन की शिक्षा नहीं
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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सिद्धार्थ के नाम पर विश्वविद्यालय और दर्शन की शिक्षा नहीं
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में दर्शन शास्त्र विषय की पढ़ाई नहीं होती है। तथागत गौतम बुद्ध की क्रीड़ास्थली में बना विश्वविद्यालय सिद्धार्थ के नाम पर है, लेकिन विश्वविद्यालय की स्थापना के समय ही दर्शन शात्र विषय को मान्यता नहीं मिली।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में छात्र-छात्राओं की संख्या एक हजार से अधिक हो गई है। कला एवं वाणिज्य संकाय के बाद विज्ञान संकाय में भी प्रवेश शुरू हो गया है, लेकिन तथागत गौतम बुद्ध एवं अन्य महान विभूतियों के दर्शन की शिक्षा की सुविधा नहीं है। वर्तमान में विश्वविद्यालय ने दर्शन शास्त्र विषय की पढ़ाई शुरू करने की पहल भी नहीं की है। यहीं वजह है कि विश्वविद्यालय परिसर में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए छह माह का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया है, जिसमें उन्हें महात्मा बुद्ध के बारे में अध्ययन कराया जा रहा है।
शिक्षकों की नहीं हो सकी नियुक्ति
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। इस केंद्र के अंतर्गत हिंदू, बौद्ध एवं जैन धर्म दर्शन की शिक्षा दी जानी है। परास्नातक स्तर पर पाठ्यक्रम तैयार किया गया है, लेकिन विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं हो सकी। विश्वविद्यालय में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को महात्मा बुद्ध के बारे में सामान्य ज्ञान हो, इसके लिए सर्टिफिकेट कोर्स संचालित किया जा रहा है। केंद्र के समन्वयक प्रो. सुशील तिवारी पंजीकृत छात्र-छात्राओं को सर्टिफिकेट कोर्स में बौद्ध दर्शन एवं पाली भाषा का अध्ययन कराते हैं, जबकि इस केंद्र का प्रमुख उद्देश्य शोध कार्य था।
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वर्जन---
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध अध्ययन केंद्र में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पुन: विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। विश्वविद्यालय में दर्शन शास्त्र की पढ़ाई शुरू करने की पहल की जाएगी। विश्वविद्यालय का निरंतर विकास हो रहा है, जो भी आवश्यकताएं हैं, उसके अनुसार कार्य किया जा रहा है। -प्रो. हरि बहादुर श्रीवास्तव, कुलपति
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में दर्शन शास्त्र विषय की पढ़ाई नहीं होती है। तथागत गौतम बुद्ध की क्रीड़ास्थली में बना विश्वविद्यालय सिद्धार्थ के नाम पर है, लेकिन विश्वविद्यालय की स्थापना के समय ही दर्शन शात्र विषय को मान्यता नहीं मिली।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में छात्र-छात्राओं की संख्या एक हजार से अधिक हो गई है। कला एवं वाणिज्य संकाय के बाद विज्ञान संकाय में भी प्रवेश शुरू हो गया है, लेकिन तथागत गौतम बुद्ध एवं अन्य महान विभूतियों के दर्शन की शिक्षा की सुविधा नहीं है। वर्तमान में विश्वविद्यालय ने दर्शन शास्त्र विषय की पढ़ाई शुरू करने की पहल भी नहीं की है। यहीं वजह है कि विश्वविद्यालय परिसर में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए छह माह का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया है, जिसमें उन्हें महात्मा बुद्ध के बारे में अध्ययन कराया जा रहा है।
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शिक्षकों की नहीं हो सकी नियुक्ति
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। इस केंद्र के अंतर्गत हिंदू, बौद्ध एवं जैन धर्म दर्शन की शिक्षा दी जानी है। परास्नातक स्तर पर पाठ्यक्रम तैयार किया गया है, लेकिन विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं हो सकी। विश्वविद्यालय में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को महात्मा बुद्ध के बारे में सामान्य ज्ञान हो, इसके लिए सर्टिफिकेट कोर्स संचालित किया जा रहा है। केंद्र के समन्वयक प्रो. सुशील तिवारी पंजीकृत छात्र-छात्राओं को सर्टिफिकेट कोर्स में बौद्ध दर्शन एवं पाली भाषा का अध्ययन कराते हैं, जबकि इस केंद्र का प्रमुख उद्देश्य शोध कार्य था।
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अंतरराष्ट्रीय बौद्ध अध्ययन केंद्र में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पुन: विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। विश्वविद्यालय में दर्शन शास्त्र की पढ़ाई शुरू करने की पहल की जाएगी। विश्वविद्यालय का निरंतर विकास हो रहा है, जो भी आवश्यकताएं हैं, उसके अनुसार कार्य किया जा रहा है। -प्रो. हरि बहादुर श्रीवास्तव, कुलपति