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Siddharthnagar News: पहाड़ों पर बारिश से सहमे मैदानी इलाकों के लोग
Thu, 24 Aug 2023 11:09 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 24 Aug 2023 11:09 PM IST
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डुमरियागंज क्षेत्र के पिकौरा गांव के तरफ कटान करती राप्ती नदी को देखते निवासी शिवप्रसाद, प्रह्ल
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सिद्धार्थनगर। नेपाल की पहाड़ियों में जोरदार बारिश से जिले की नदियां उफान पर आ गईं हैं। इस बार बारिश में सभी नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। बूढ़ी राप्ती, कूड़ा और घोघी नदी का जलस्तर 24 घंटे में डेढ़ मीटर बढ़ा है। नदियों का पानी तेजी से बढ़ने के कारण बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की चिंता बढ़ गई है।
तीन दिन से हो रही लगातार बारिश के कारण नदियों ने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। इस कारण बांधों के आसपास बसे लोग दिन रात लहरों को देख रहे हैं, जबकि घर से दूर महानगरों में कमाने वाले प्रवासी भी फोन पर नदियों की रूझान पता कर रहे हैं। हालांकि, राप्ती नदी स्थिर है, लेकिन अन्य नदियों का पानी बढ़ने के कारण लोगों को आशंका है कि राप्ती भी बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार जिले में नेपाल का पानी आता है तो दो-तीन दिन में भी दिक्कत शुरू हो जाती है। इस कारण लोग पहले से ही बाढ़ के बचाव का इंतजाम कर रहे हैं। उधर, प्रशासन ने भी नाव मंगाने की तैयारी कर रहे हैं। सोहांस क्षेत्र में घोघी नदी कटान कर रही है। स्थानीय लोग मौके पर जाकर कटान स्थल देख रहे हैं। नौगढ़ क्षेत्र के रीवा नानकार भी कटान के कारण लोग परेशान हैं। शोहरतगढ़ के खैरी शीतल प्रसाद गांव के आसपास के लोग भी बाढ़ के कारण चिंतित हैं। एडीएम उमाशंकर ने बताया कि फिलहाल नदियां खतरें की निशान से नीचे हैं, लेकिन बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ सुरक्षा की तैयारियां की जा रही हैं।
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यहां तो घरों से टकराने वाली हैं लहरें
सिद्धार्थनगर। पिछले दो दिनों से हो रही रुक रुक के बारिश से राप्ती के जलस्तर को ग्रामीण सदमे में हैं। भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के भरवठिया बाजार व पिकौरा गांव के करीब एक दर्जन से अधिक घरों के राप्ती में विलीन होने की आशंका बनी हुई है।
डुमरियागंज तहसील क्षेत नदी के तट पर स्थित भरवठिया बाजार व पिकौरा गांव के शिवप्रसाद, प्रह्लाद, सनोहर, मनोहर, गंगाकेशर, राजेंद्र आदि लोगों ने बताया कि उनके घर के दीवार से करीब तीन मीटर दूरी तक नदी कटान करती पहुंच चुकी हैं। हर साल कटान रोकने के लिए बालू भरे बोरे बोल्डर को लगा कर प्रयास किया जाता है,जो बाढ़ के साथ बह जाता है। रात में राप्ती के कलरव की आवज सुन कर नींद नहीं आती है।शासन व प्रशासन हर साल बाढ़ के दौरान सुरक्षित स्थान पर बसाने की बात करता है, बाढ़ खत्म होने के बाद भूल जाते हैं।
यही हाल क्षेत्र के तेनुई, चंदन जोत, पेंड़ारी, मछिया, डुमरिया, फत्तेपुर, गोपिया, असनहरा माफी, वेंव मुस्तहकम, बेतनार, जूड़ीकुइयां, बिजौरा, विशुनपुर औरंगाबाद, गागापुर, सफियापुर, सिंगारजोत आदि गांवों का है, जहां राप्ती के बढ़ते जलस्तर से सहम जाते हैं।
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नदियां का जलस्तर (मीटर में)
नदी गेज स्टेशन खतरे का स्तर, बुधवार, बृहस्पतिवार
बानगंगा नदी बानगंगा बैराज 93.420, 90.30, 91.000
राप्ती नदी बांसी पुल 84.90, 82.720, 82.720
बूढ़ी राप्ती नदी परसोहन घाट 95.550, 91.110, 91.930
- मुहचोरवा घाट 90.790, 87.780, 88.930
- ककरही पुल 85.650, 82.320, 84.010
कूड़ा नदी आलम नगर 87.200, 84.000, 85.600
- उसका रेलवे पुल 83.520, 79.300 80.350
घोघी नदी लोटन पुल 87.000, 83.250, 84.400
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तीन दिन से हो रही लगातार बारिश के कारण नदियों ने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। इस कारण बांधों के आसपास बसे लोग दिन रात लहरों को देख रहे हैं, जबकि घर से दूर महानगरों में कमाने वाले प्रवासी भी फोन पर नदियों की रूझान पता कर रहे हैं। हालांकि, राप्ती नदी स्थिर है, लेकिन अन्य नदियों का पानी बढ़ने के कारण लोगों को आशंका है कि राप्ती भी बढ़ सकती है।
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विशेषज्ञों के अनुसार जिले में नेपाल का पानी आता है तो दो-तीन दिन में भी दिक्कत शुरू हो जाती है। इस कारण लोग पहले से ही बाढ़ के बचाव का इंतजाम कर रहे हैं। उधर, प्रशासन ने भी नाव मंगाने की तैयारी कर रहे हैं। सोहांस क्षेत्र में घोघी नदी कटान कर रही है। स्थानीय लोग मौके पर जाकर कटान स्थल देख रहे हैं। नौगढ़ क्षेत्र के रीवा नानकार भी कटान के कारण लोग परेशान हैं। शोहरतगढ़ के खैरी शीतल प्रसाद गांव के आसपास के लोग भी बाढ़ के कारण चिंतित हैं। एडीएम उमाशंकर ने बताया कि फिलहाल नदियां खतरें की निशान से नीचे हैं, लेकिन बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ सुरक्षा की तैयारियां की जा रही हैं।
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यहां तो घरों से टकराने वाली हैं लहरें
सिद्धार्थनगर। पिछले दो दिनों से हो रही रुक रुक के बारिश से राप्ती के जलस्तर को ग्रामीण सदमे में हैं। भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के भरवठिया बाजार व पिकौरा गांव के करीब एक दर्जन से अधिक घरों के राप्ती में विलीन होने की आशंका बनी हुई है।
डुमरियागंज तहसील क्षेत नदी के तट पर स्थित भरवठिया बाजार व पिकौरा गांव के शिवप्रसाद, प्रह्लाद, सनोहर, मनोहर, गंगाकेशर, राजेंद्र आदि लोगों ने बताया कि उनके घर के दीवार से करीब तीन मीटर दूरी तक नदी कटान करती पहुंच चुकी हैं। हर साल कटान रोकने के लिए बालू भरे बोरे बोल्डर को लगा कर प्रयास किया जाता है,जो बाढ़ के साथ बह जाता है। रात में राप्ती के कलरव की आवज सुन कर नींद नहीं आती है।शासन व प्रशासन हर साल बाढ़ के दौरान सुरक्षित स्थान पर बसाने की बात करता है, बाढ़ खत्म होने के बाद भूल जाते हैं।
यही हाल क्षेत्र के तेनुई, चंदन जोत, पेंड़ारी, मछिया, डुमरिया, फत्तेपुर, गोपिया, असनहरा माफी, वेंव मुस्तहकम, बेतनार, जूड़ीकुइयां, बिजौरा, विशुनपुर औरंगाबाद, गागापुर, सफियापुर, सिंगारजोत आदि गांवों का है, जहां राप्ती के बढ़ते जलस्तर से सहम जाते हैं।
नदियां का जलस्तर (मीटर में)
नदी गेज स्टेशन खतरे का स्तर, बुधवार, बृहस्पतिवार
बानगंगा नदी बानगंगा बैराज 93.420, 90.30, 91.000
राप्ती नदी बांसी पुल 84.90, 82.720, 82.720
बूढ़ी राप्ती नदी परसोहन घाट 95.550, 91.110, 91.930
- मुहचोरवा घाट 90.790, 87.780, 88.930
- ककरही पुल 85.650, 82.320, 84.010
कूड़ा नदी आलम नगर 87.200, 84.000, 85.600
- उसका रेलवे पुल 83.520, 79.300 80.350
घोघी नदी लोटन पुल 87.000, 83.250, 84.400

डुमरियागंज क्षेत्र के पिकौरा गांव के तरफ कटान करती राप्ती नदी को देखते निवासी शिवप्रसाद, प्रह्ल