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अमरगढ़ महोत्सव में गूंजे शहीदों के नाम देशभक्ति गीत
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डुमरियागंज में शहीद स्थल पर आयोजित अमरगढ़ महोत्सव में सभी गायकों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित कर
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
अमरगढ़ महोत्सव में गूंजे शहीदों के नाम देशभक्ति गीत
डुमरियागंज। 1858 की क्रांति में अमरगढ़ में शहीद हुए गुमनाम शहीदों की याद में शुरू हुए महोत्सव के पहले दिन शुक्रवार को एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें द वायस ऑफ इंडिया फेम की गायिका कंचन श्रीवास, कवींद्र और जुनैद खान के गीतों पर लोगों ने जमकर तालियां बजाईं और भारत माता के जयकारे लगाए।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने अमर शहीद ज्योति जलाकर किया। इस मौके पर विधायक ने कहा कि नागरिक चाहे सैनिक हो या आम आदमी, देश के विकास में किसी न किसी तरह से अपनी सहभागिता दे सकता है। उन्होंने कहा कि अमरगढ़ महोत्सव और एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम करने का मतलब उन वीर सेनानियों को याद करना है, जिन्होंने इस देश की रक्षा के लिए अपने प्राण कुर्बान कर दिए। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करना हम सब की नैतिक जिम्मेदारी बनती है। उसके अनुरूप काम करें। आपसी भाईचारा बनाए रखें, जिससे हमारे समाज, देश में प्रगति हो और हम लोग अच्छी विचारधारा के साथ आगे बढ़ें। विधायक ने कहा कि समाज में भी हर कोई तो सीमा पर नहीं जा सकता, पर समाज में भी बहुत सारी निरंकारी नीतियां हैं, बहुत सारे लोग हैं, जो समाज को तोड़ने का काम करते हैं, पर हम सब मिलकर जोड़ने का काम करें। समाज के क्षेत्र में कोई अच्छा काम करता है, सामाजिक क्षेत्र में अच्छा काम करता है, उसका भी सम्मान करना चाहिए।
इससे नए लोगों को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि अमरगढ़ के गुमनाम शहीदों का सम्मान हम लोग करते हैं। यह हमारे जिले के लिए बहुत गर्व की बात है कि डुमरियागंज के लोगों ने आजादी की इतनी बड़ी लड़ाई लड़ी। इस दौरान नरेंद्रमणि त्रिपाठी, लवकुश ओझा, रमेशचंद्र श्रीवास्तव, पप्पू श्रीवास्तव, मधुसूदन अग्रहरि, राजीव अग्रहरि, रमेश सोनी, गौरव मिश्र, कमलेश चौरसिया, राहुल सिंह, एसपी श्रीवास्तव, परमजीत सिंह भाटिया, आबिद रिजवी, बृजेश गुप्ता, अभिषेक सिंह, पंकज पांडेय, रजनीश शुक्ल, भोला सोनी आदि मौजूद रहे।
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‘है प्रीत जहां की रीति सदा...’
लखनऊ के गायक जुनैद खान ने मंच पर आते ही सबसे पहले उन्होंने अमरगढ़ के गुमनाम शहीदों को अपने गीत के माध्यम से श्रद्धांजलि देकर नमन किया। जुनैद ने ...‘जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा’ और ‘संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं’, गीत गाकर लोगों के अंदर देशभक्ति का जज्बा भर दिया। फिर ‘है प्रीत जहां की रीति सदा मैं गीत वहीं के गाता हूं’, सुनाकर जमकर ताली बजवाई और भारत माता के जयकारे लगवाए।
‘ऐ वतन, वतन मेरे आबाद रहे तू’
मुंबई की प्लेबैक सिंगर कंचन श्रीवास ने अपने सुरों के संगम में दर्शकों को पूरी रात गोता लगवाया। उन्होंने अपना पहला गीत ‘ऐ वतन, वतन मेरे आबाद रहे तू’ और ‘यहां हर कदम-कदम पर धरती बदले रंग’ गाकर लोगों में देशभक्ति का जोश भर दिया। इसके बाद उन्होंने जुनैद खान के साथ ‘हर करम अपना करेंगे ऐ वतन तेरे लिए’ देशभक्ति गीत गाकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसी तरह मुंबई से आए गीतकार कविंद्र ने ‘यह देश है वीर जवानों’ का और ‘चप्पा-चप्पा चरखा चले’ आदि गीत गाकर लोगों को पूरी रात पंडाल में बैठाए रखा।
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डुमरियागंज। 1858 की क्रांति में अमरगढ़ में शहीद हुए गुमनाम शहीदों की याद में शुरू हुए महोत्सव के पहले दिन शुक्रवार को एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें द वायस ऑफ इंडिया फेम की गायिका कंचन श्रीवास, कवींद्र और जुनैद खान के गीतों पर लोगों ने जमकर तालियां बजाईं और भारत माता के जयकारे लगाए।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने अमर शहीद ज्योति जलाकर किया। इस मौके पर विधायक ने कहा कि नागरिक चाहे सैनिक हो या आम आदमी, देश के विकास में किसी न किसी तरह से अपनी सहभागिता दे सकता है। उन्होंने कहा कि अमरगढ़ महोत्सव और एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम करने का मतलब उन वीर सेनानियों को याद करना है, जिन्होंने इस देश की रक्षा के लिए अपने प्राण कुर्बान कर दिए। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करना हम सब की नैतिक जिम्मेदारी बनती है। उसके अनुरूप काम करें। आपसी भाईचारा बनाए रखें, जिससे हमारे समाज, देश में प्रगति हो और हम लोग अच्छी विचारधारा के साथ आगे बढ़ें। विधायक ने कहा कि समाज में भी हर कोई तो सीमा पर नहीं जा सकता, पर समाज में भी बहुत सारी निरंकारी नीतियां हैं, बहुत सारे लोग हैं, जो समाज को तोड़ने का काम करते हैं, पर हम सब मिलकर जोड़ने का काम करें। समाज के क्षेत्र में कोई अच्छा काम करता है, सामाजिक क्षेत्र में अच्छा काम करता है, उसका भी सम्मान करना चाहिए।
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इससे नए लोगों को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि अमरगढ़ के गुमनाम शहीदों का सम्मान हम लोग करते हैं। यह हमारे जिले के लिए बहुत गर्व की बात है कि डुमरियागंज के लोगों ने आजादी की इतनी बड़ी लड़ाई लड़ी। इस दौरान नरेंद्रमणि त्रिपाठी, लवकुश ओझा, रमेशचंद्र श्रीवास्तव, पप्पू श्रीवास्तव, मधुसूदन अग्रहरि, राजीव अग्रहरि, रमेश सोनी, गौरव मिश्र, कमलेश चौरसिया, राहुल सिंह, एसपी श्रीवास्तव, परमजीत सिंह भाटिया, आबिद रिजवी, बृजेश गुप्ता, अभिषेक सिंह, पंकज पांडेय, रजनीश शुक्ल, भोला सोनी आदि मौजूद रहे।
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‘है प्रीत जहां की रीति सदा...’
लखनऊ के गायक जुनैद खान ने मंच पर आते ही सबसे पहले उन्होंने अमरगढ़ के गुमनाम शहीदों को अपने गीत के माध्यम से श्रद्धांजलि देकर नमन किया। जुनैद ने ...‘जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा’ और ‘संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं’, गीत गाकर लोगों के अंदर देशभक्ति का जज्बा भर दिया। फिर ‘है प्रीत जहां की रीति सदा मैं गीत वहीं के गाता हूं’, सुनाकर जमकर ताली बजवाई और भारत माता के जयकारे लगवाए।
‘ऐ वतन, वतन मेरे आबाद रहे तू’
मुंबई की प्लेबैक सिंगर कंचन श्रीवास ने अपने सुरों के संगम में दर्शकों को पूरी रात गोता लगवाया। उन्होंने अपना पहला गीत ‘ऐ वतन, वतन मेरे आबाद रहे तू’ और ‘यहां हर कदम-कदम पर धरती बदले रंग’ गाकर लोगों में देशभक्ति का जोश भर दिया। इसके बाद उन्होंने जुनैद खान के साथ ‘हर करम अपना करेंगे ऐ वतन तेरे लिए’ देशभक्ति गीत गाकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसी तरह मुंबई से आए गीतकार कविंद्र ने ‘यह देश है वीर जवानों’ का और ‘चप्पा-चप्पा चरखा चले’ आदि गीत गाकर लोगों को पूरी रात पंडाल में बैठाए रखा।