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Siddharthnagar News: सिकटा गांव में भूमि अधिग्रहण का विरोध तेज, किसानों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
Wed, 20 May 2026 11:11 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 20 May 2026 11:11 PM IST
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बांसी। तहसील क्षेत्र के ग्राम सिकटा में संभावित भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। बुधवार को ग्रामीणों ने एसडीएम निखिल चक्रवर्ती को ज्ञापन सौंपकर अपनी उपजाऊ जमीन को बचाने की मांग की।
किसानों का कहना है कि हाल ही में चकबंदी विभाग के अधिकारी गांव में पहुंचे थे और जमीन की पैमाइश की गई। ग्रामीणों के अनुसार, इस दौरान फैक्टरी स्थापना के उद्देश्य से भूमि अधिग्रहण की बात सामने आई, जिसके बाद गांव में चिंता और आक्रोश है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि वे छोटे और सीमांत किसान हैं और उनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। ऐसे में यदि उनकी उपजाऊ भूमि अधिग्रहीत की गई तो उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। किसानों ने चेतावनी दी कि किसी भी स्थिति में वे अपनी जमीन नहीं देंगे और इसके खिलाफ हर स्तर पर विरोध करेंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में सुनील कुमार, सर्वजीत चौधरी, अर्जुन, रामनरेश चौधरी, विनोद कुमार, विश्वनाथ पांडेय, आशा पटेल और अनिल कुमार सहित कई ग्रामीण शामिल रहे।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में किसानों की भावनाओं और उनकी आजीविका को ध्यान में रखते हुए ही कोई निर्णय लेना चाहिए, ताकि गांव में तनाव की स्थिति न बने और विकास कार्यों को लेकर सहमति का माहौल कायम रहे।
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किसानों का कहना है कि हाल ही में चकबंदी विभाग के अधिकारी गांव में पहुंचे थे और जमीन की पैमाइश की गई। ग्रामीणों के अनुसार, इस दौरान फैक्टरी स्थापना के उद्देश्य से भूमि अधिग्रहण की बात सामने आई, जिसके बाद गांव में चिंता और आक्रोश है।
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ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि वे छोटे और सीमांत किसान हैं और उनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। ऐसे में यदि उनकी उपजाऊ भूमि अधिग्रहीत की गई तो उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। किसानों ने चेतावनी दी कि किसी भी स्थिति में वे अपनी जमीन नहीं देंगे और इसके खिलाफ हर स्तर पर विरोध करेंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में सुनील कुमार, सर्वजीत चौधरी, अर्जुन, रामनरेश चौधरी, विनोद कुमार, विश्वनाथ पांडेय, आशा पटेल और अनिल कुमार सहित कई ग्रामीण शामिल रहे।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में किसानों की भावनाओं और उनकी आजीविका को ध्यान में रखते हुए ही कोई निर्णय लेना चाहिए, ताकि गांव में तनाव की स्थिति न बने और विकास कार्यों को लेकर सहमति का माहौल कायम रहे।