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हिचकोले खाते घर पहुंचते हैं लोग
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 12 Feb 2016 11:54 PM IST
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डुमरियागंज की प्रमुख मार्गों की हालत इन दिनों इतनी जर्जर हो चुकी है कि वाहनों का असंतुलित होकर दुर्घटना ग्रस्त हो जाना आम बात हो गई है। कारण क्षेत्र में जर्जर सड़कों का जाल बिछा हुआ है।
धीरे-धीरे यह क्षेत्र की पहचान भी बनता जा रहा है। इसके चलते राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। क्षेत्र में घुसते ही वह अपने नसीब को कोसते हुए बस यही कहते हैं कि आखिर इन हिचकोलों से उन्हें मुक्ति कब मिलेगी।
21 किलो मीटर दूरी वाले शाहपुर-सिंगारजोत, शाहपुर-धोबहा, डुमरियागंज-रूधौली सहित कई प्रमुख मार्ग ऐसे हैं। जहां पर बीच-बीच में बड़े गड्ढे बन गए हैं।
लोग संभल कर भी यात्रा करें तो गडढों के चलते वाहन असंतुलित हो जाता है। क्षेत्रीय निवासी जयप्रकाश सिंह, लालजी शुक्ल, राजकुमार पांडेय, बद्री, जोखू मौर्या आदि ने कहा कि सड़क पर हो रही अधिकांश दुर्घटना का कारण क्षेत्र में जर्जर सड़कों का जाल है।
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प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत निर्माणाधीन सड़कों की गति इतनी धीमी है कि समय सीमा बीत जाने के बाद भी सड़कें अधूरी पड़ी हैं। सड़क पर बिखरी गिट्टी व मिट्टी लोगों को परेशान कर रही है।
क्षेत्र की अधिकांश सड़कों पर चलना जोखिम भरा है। लेकिन मजबूरन लोग इन पर सफर कर रहें है। सबसे ज्यादा बुरा हाल तो पर्यटन व धार्मिक स्थली गालापुर जाने वाले मार्ग का है। जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग वटवासिनी मंदिर पर माता के दर्शन के लिए जाते हैं। जिसमें आए दिन कई लोग जर्जर सड़क पर गिरकर चोटिल होते हैं। जनप्रतिनिधि व जिम्मेदार अधिकारी आम आदमी की समस्या से बेखबर हैं।
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धीरे-धीरे यह क्षेत्र की पहचान भी बनता जा रहा है। इसके चलते राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। क्षेत्र में घुसते ही वह अपने नसीब को कोसते हुए बस यही कहते हैं कि आखिर इन हिचकोलों से उन्हें मुक्ति कब मिलेगी।
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21 किलो मीटर दूरी वाले शाहपुर-सिंगारजोत, शाहपुर-धोबहा, डुमरियागंज-रूधौली सहित कई प्रमुख मार्ग ऐसे हैं। जहां पर बीच-बीच में बड़े गड्ढे बन गए हैं।
लोग संभल कर भी यात्रा करें तो गडढों के चलते वाहन असंतुलित हो जाता है। क्षेत्रीय निवासी जयप्रकाश सिंह, लालजी शुक्ल, राजकुमार पांडेय, बद्री, जोखू मौर्या आदि ने कहा कि सड़क पर हो रही अधिकांश दुर्घटना का कारण क्षेत्र में जर्जर सड़कों का जाल है।
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प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत निर्माणाधीन सड़कों की गति इतनी धीमी है कि समय सीमा बीत जाने के बाद भी सड़कें अधूरी पड़ी हैं। सड़क पर बिखरी गिट्टी व मिट्टी लोगों को परेशान कर रही है।
क्षेत्र की अधिकांश सड़कों पर चलना जोखिम भरा है। लेकिन मजबूरन लोग इन पर सफर कर रहें है। सबसे ज्यादा बुरा हाल तो पर्यटन व धार्मिक स्थली गालापुर जाने वाले मार्ग का है। जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग वटवासिनी मंदिर पर माता के दर्शन के लिए जाते हैं। जिसमें आए दिन कई लोग जर्जर सड़क पर गिरकर चोटिल होते हैं। जनप्रतिनिधि व जिम्मेदार अधिकारी आम आदमी की समस्या से बेखबर हैं।