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Siddharthnagar News: 175 गर्भवतियों की जांच में 24 में मिले उच्च जोखिम के लक्षण
Tue, 11 Nov 2025 02:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 11 Nov 2025 02:09 AM IST
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भनवापुर के सीएचसी सिरसिया में पीएसएमए के तहत आयोजित हुआ शिविर
भनवापुर। क्षेत्र के सीएचसी सिरसिया में सोमवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवतियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। शिविर में 175 गर्भवतियों को चिकित्सीय इलाज व परामर्श दिया गया। इसमें 24 गर्भवतियाें में उच्च जोखिम के लक्षण पाए गए। 35 में खून की कमी मिलने पर आयरन-शुक्रोज की डोज दी गई।
अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप, मधुमेह, फीटस के बेड़े होने, गंभीर एनिमिया, प्लेसेंटा का विकृत व नीचे होने से गर्भवतियों की जान जाने का खतरा बना रहता है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान सोनोग्राफी तथा चिकित्सीय परामर्श व इलाज बहुत जरूरी है। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में उच्च जोखिम वाले खतरे के लक्षण की पहचान जरूरी है, जिससे समय से चिकित्सीय प्रबंधन से जच्चा व बच्चा दोनों को सुरक्षित किया जा सकता है। अधीक्षक ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम के लक्षण पाए जाने पर कम से कम तीन बार चिकित्सीय सलाह जरूरी होती है।
इस दौरान डॉ. एलबी यादव, डॉ. अनवरूदीन, ज्योति, प्रेम कुमार त्रिपाठी, अजय पांडेय, रुपम पाठक, सविता मौर्य आदि मौजूद रहे।
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भनवापुर। क्षेत्र के सीएचसी सिरसिया में सोमवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवतियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। शिविर में 175 गर्भवतियों को चिकित्सीय इलाज व परामर्श दिया गया। इसमें 24 गर्भवतियाें में उच्च जोखिम के लक्षण पाए गए। 35 में खून की कमी मिलने पर आयरन-शुक्रोज की डोज दी गई।
अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप, मधुमेह, फीटस के बेड़े होने, गंभीर एनिमिया, प्लेसेंटा का विकृत व नीचे होने से गर्भवतियों की जान जाने का खतरा बना रहता है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान सोनोग्राफी तथा चिकित्सीय परामर्श व इलाज बहुत जरूरी है। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में उच्च जोखिम वाले खतरे के लक्षण की पहचान जरूरी है, जिससे समय से चिकित्सीय प्रबंधन से जच्चा व बच्चा दोनों को सुरक्षित किया जा सकता है। अधीक्षक ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम के लक्षण पाए जाने पर कम से कम तीन बार चिकित्सीय सलाह जरूरी होती है।
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इस दौरान डॉ. एलबी यादव, डॉ. अनवरूदीन, ज्योति, प्रेम कुमार त्रिपाठी, अजय पांडेय, रुपम पाठक, सविता मौर्य आदि मौजूद रहे।