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Siddharthnagar News: अब बार्डर एरिया में भी नहीं चलेगा चाइनीज टिक-टॉक एप
Tue, 14 Nov 2023 11:49 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 14 Nov 2023 11:49 PM IST
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सिद्धार्थनगर। नेपाल सरकार ने भी चाइनीज एप टिक-टॉक पर रोक लगा दी है। इस कारण जिले में सीमावर्ती इलाकों में भी यह एप बंद हो गया है। सीमावर्ती इलाकों में नेपाली नेटवर्क काम करने के कारण जिले के बच्चे-युवा इसके आदी हो गए थे। इस खबर के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है।
वर्तमान में हर व्यक्ति के हाथों में स्मार्टफोन है। यहां तक स्मार्ट फोन का सर्वाधिक प्रयोग युवा व बच्चे कर रहे हैं। वह इंटरनेट का भरपूर उपयोग कर रहा है। इसमें गेम की खेलने की लत के साथ ही वीडियो बनाकर शेयर करने का रोग भी लोगों को लगा है। इसमें युवा काफी आगे हैं। मौजूदा समय में कई प्रकार एप की भरमार है। लेकिन चीन से संचालित होने वाले एप लोगों के लिए खतरनाक है।
भारत में जब इसका जादू चला तो छत से लटक कर, पेड़ पर चढ़कर, रेलवे लाइन पर खड़े होकर, ट्रेन में लटक कर सहित कई प्रकार के खतरनाक वीडियो युवा बनाने लगे थे। उसे सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे थे। लाइक और फालोअर को बढ़ाने के चक्कर में जान की बाजी लगाने से भी नहीं चूक रहे थे। वीडियो सूट करने के चक्कर में कई घटनाओं के बाद भारत सरकार ने तकरीबन दो साल पहले देश में टिक-टॉक एप पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन नेपाल में एप चल रहा था। इसका सीमावर्ती क्षेत्र के युवा धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे थे। इसके लिए नेपाली सिम का प्रयोग करते थे। नेपाल के नेटवर्क व एप को चलाते थे। नेपाल में हादसे बढ़ने और इससे होने वाल साइबर अपराध को देखते हुए नेपाल सरकार ने भी सोमवार को प्रतिबंधित कर दिया। अब वहां पर भी चीन से संचालित होने वाला यह एप नहीं चलेगा।
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साइबर अपराधी इस प्रकार करते थे गलत प्रयोग
नेपाल में टिक-टॉप पर अपलोड होने वाले वीडियो को साइबर अपराधी तोड़ मड़ोरकर गलत तरीके से एडिट कर देते थे। इसके बाद संबंधित व्यक्ति के पास शेयर करते थे और फिर रुपये की डिमांड कर थे। कई बार डिमांड पूरी न होने पर शेयर करने पर बाद सामने वाला घातक कदम उठा लेता था। वहीं, दूसरी युवावर्ग खतरनाक पोज बनाने के लिए पहाड़ी, वाहनों में खड़े होकर वीडियो बनाने के चक्कर में जान गवां रहा था। घटनाएं लगातार बढ़ रही थी। इसके मद्देनजर संचार मंत्रालय नेपाल सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया।
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वीडियो बनाते समय बाइक से गिरा युवक, कोमा में गया
नेपाल के नंदनगर निवासी अल्ताफ का 22 साल का बेटा हुसैन टिकटॉक पर वीडियो और फोटो बनाने का शौकीन है। पिता अल्ताफ के मुताबिक वीडियो शूट करते से समय बाइक से गिरा और सिर में गंभीर चोट के कारण कोमा में चला गया था। दवा कराने में दो माह से अधिक का समय लगा। रुपये भी बहुत लगा है। इसके अलावा कई घटनाएं हो चुकी हैं।
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बोले नेपाल सरकार के प्रवक्ता
नेपाल सरकार ने चीनी वीडियो शेयरिंग एप टिक-टॉक पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने सोमवार से टिक-टॉक को बंद करने की तकनीकी तैयारी शुरू कर दी है। सरकार की प्रवक्ता और संचार मंत्री रेखा शर्मा ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में टिक-टॉक को बंद करने का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि टिक-टॉक को तुरंत बंद करने का निर्णय लिया गया है। क्योंकि यह लगातार पारिवारिक एवं सामाजिक ढांचे को बिगाड़ने का काम कर रहा है।
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बोले साइबर के जानकार
सोशल मीडिया को कोई भी प्लेटफाॅर्म पर फोटो और वीडियो का शेयर किया जाना घातक है। क्योंकि साइबर अपराधी या फिर कोई अन्य व्यक्ति उसी फोटो और वीडियो को एडिट करके शेयर कर सकता है। जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा खराब होगी। ऐसे कई मामले सामने भी आ चुके हैं। इसलिए व्यक्तिगत वीडियो और फोटो सोशल मीडिया या अन्य एप पर शेयर न करें, अपनी फाइल को लॉक करके रखें।
राजेश कुमार शुक्ल, प्रभारी साइबर सेल, सिद्धार्थनगर
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वर्तमान में हर व्यक्ति के हाथों में स्मार्टफोन है। यहां तक स्मार्ट फोन का सर्वाधिक प्रयोग युवा व बच्चे कर रहे हैं। वह इंटरनेट का भरपूर उपयोग कर रहा है। इसमें गेम की खेलने की लत के साथ ही वीडियो बनाकर शेयर करने का रोग भी लोगों को लगा है। इसमें युवा काफी आगे हैं। मौजूदा समय में कई प्रकार एप की भरमार है। लेकिन चीन से संचालित होने वाले एप लोगों के लिए खतरनाक है।
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भारत में जब इसका जादू चला तो छत से लटक कर, पेड़ पर चढ़कर, रेलवे लाइन पर खड़े होकर, ट्रेन में लटक कर सहित कई प्रकार के खतरनाक वीडियो युवा बनाने लगे थे। उसे सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे थे। लाइक और फालोअर को बढ़ाने के चक्कर में जान की बाजी लगाने से भी नहीं चूक रहे थे। वीडियो सूट करने के चक्कर में कई घटनाओं के बाद भारत सरकार ने तकरीबन दो साल पहले देश में टिक-टॉक एप पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन नेपाल में एप चल रहा था। इसका सीमावर्ती क्षेत्र के युवा धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे थे। इसके लिए नेपाली सिम का प्रयोग करते थे। नेपाल के नेटवर्क व एप को चलाते थे। नेपाल में हादसे बढ़ने और इससे होने वाल साइबर अपराध को देखते हुए नेपाल सरकार ने भी सोमवार को प्रतिबंधित कर दिया। अब वहां पर भी चीन से संचालित होने वाला यह एप नहीं चलेगा।
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साइबर अपराधी इस प्रकार करते थे गलत प्रयोग
नेपाल में टिक-टॉप पर अपलोड होने वाले वीडियो को साइबर अपराधी तोड़ मड़ोरकर गलत तरीके से एडिट कर देते थे। इसके बाद संबंधित व्यक्ति के पास शेयर करते थे और फिर रुपये की डिमांड कर थे। कई बार डिमांड पूरी न होने पर शेयर करने पर बाद सामने वाला घातक कदम उठा लेता था। वहीं, दूसरी युवावर्ग खतरनाक पोज बनाने के लिए पहाड़ी, वाहनों में खड़े होकर वीडियो बनाने के चक्कर में जान गवां रहा था। घटनाएं लगातार बढ़ रही थी। इसके मद्देनजर संचार मंत्रालय नेपाल सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया।
वीडियो बनाते समय बाइक से गिरा युवक, कोमा में गया
नेपाल के नंदनगर निवासी अल्ताफ का 22 साल का बेटा हुसैन टिकटॉक पर वीडियो और फोटो बनाने का शौकीन है। पिता अल्ताफ के मुताबिक वीडियो शूट करते से समय बाइक से गिरा और सिर में गंभीर चोट के कारण कोमा में चला गया था। दवा कराने में दो माह से अधिक का समय लगा। रुपये भी बहुत लगा है। इसके अलावा कई घटनाएं हो चुकी हैं।
बोले नेपाल सरकार के प्रवक्ता
नेपाल सरकार ने चीनी वीडियो शेयरिंग एप टिक-टॉक पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने सोमवार से टिक-टॉक को बंद करने की तकनीकी तैयारी शुरू कर दी है। सरकार की प्रवक्ता और संचार मंत्री रेखा शर्मा ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में टिक-टॉक को बंद करने का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि टिक-टॉक को तुरंत बंद करने का निर्णय लिया गया है। क्योंकि यह लगातार पारिवारिक एवं सामाजिक ढांचे को बिगाड़ने का काम कर रहा है।
बोले साइबर के जानकार
सोशल मीडिया को कोई भी प्लेटफाॅर्म पर फोटो और वीडियो का शेयर किया जाना घातक है। क्योंकि साइबर अपराधी या फिर कोई अन्य व्यक्ति उसी फोटो और वीडियो को एडिट करके शेयर कर सकता है। जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा खराब होगी। ऐसे कई मामले सामने भी आ चुके हैं। इसलिए व्यक्तिगत वीडियो और फोटो सोशल मीडिया या अन्य एप पर शेयर न करें, अपनी फाइल को लॉक करके रखें।
राजेश कुमार शुक्ल, प्रभारी साइबर सेल, सिद्धार्थनगर