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Siddharthnagar News: अब निजी अस्पतालों में भी लगेगा एंटी रैबीज इंजेक्शन
Tue, 03 Mar 2026 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 03 Mar 2026 03:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अब सरकारी ही नहीं निजी अस्पतालों में भी एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया जाएगा। निजी अस्पताल के जिम्मेदारों को इंजेक्शन रखने के साथ ही रिपोर्ट तैयार करनी होगी कि किसे लगाए। उनका नाम और मोबाइल नंबर भी रजिस्टर में दर्ज होगा। निजी अस्पतालों में यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है, जिससे लोगों को इंजेक्शन के लिए परेशान न होना पड़े।
जानवरों का इंसान के प्रति व्यवहार बदल रहा है। इसमें कुत्तों में अधिक बदलाव देखा जा रहा है। इनके हमले अधिक हैं और सरकारी अस्पतालों में कुत्ता काटने के प्रभावित मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज और सीएचसी, पीएचसी की बात करें तो प्रतिदिन कुत्ता, बंदर, बिल्ली और सियार के हमले के शिकार 200 से अधिक लोगों को इंजेक्शन लगता है। रिकाॅर्ड के मुताबिक एक साल में 70 हजार से अधिक लोग जानवर के हमले का शिकार होते हैं। बढ़ते हुए हमले को देखते हुए शासन ने निजी अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शन रखने और लगाने के संबंध में दिशा-निर्देश दिए हैं। इसके पीछे मंशा है कि पीड़ित को तत्काल उसके नजदीक में उपचार हो सके और इंजेक्शन लग सके। अगर वह सरकारी अस्पताल पर नहीं जा पा रहा है या फिर हमला अवकाश के दिन हुआ है तो भी आसानी से और समय से इंजेक्शन लगवा सके।
इस व्यवस्था के लागू होने से लोगों को लाभ मिल सकेगा। निजी अस्पताल को इंजेक्शन खरीद और जिन मरीजों को लगेगा उनका पूरा डाटा रखना होगा। उपलब्धता की तो जांच भी की जाएगी। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की ओर से जांच की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के लोगों के मुताबिक इस व्यवस्था के लागू हो जाने से लोगों को समय से इंजेक्शन लग सकेगा। अवकाश के समय और अस्पताल के ओपीडी के निर्धारित समय होने के कारण कई बार पीड़ित व्यक्ति को इलाज नहीं मिल पाता है, जिससे उन्हें क
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सिद्धार्थनगर। अब सरकारी ही नहीं निजी अस्पतालों में भी एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया जाएगा। निजी अस्पताल के जिम्मेदारों को इंजेक्शन रखने के साथ ही रिपोर्ट तैयार करनी होगी कि किसे लगाए। उनका नाम और मोबाइल नंबर भी रजिस्टर में दर्ज होगा। निजी अस्पतालों में यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है, जिससे लोगों को इंजेक्शन के लिए परेशान न होना पड़े।
जानवरों का इंसान के प्रति व्यवहार बदल रहा है। इसमें कुत्तों में अधिक बदलाव देखा जा रहा है। इनके हमले अधिक हैं और सरकारी अस्पतालों में कुत्ता काटने के प्रभावित मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज और सीएचसी, पीएचसी की बात करें तो प्रतिदिन कुत्ता, बंदर, बिल्ली और सियार के हमले के शिकार 200 से अधिक लोगों को इंजेक्शन लगता है। रिकाॅर्ड के मुताबिक एक साल में 70 हजार से अधिक लोग जानवर के हमले का शिकार होते हैं। बढ़ते हुए हमले को देखते हुए शासन ने निजी अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शन रखने और लगाने के संबंध में दिशा-निर्देश दिए हैं। इसके पीछे मंशा है कि पीड़ित को तत्काल उसके नजदीक में उपचार हो सके और इंजेक्शन लग सके। अगर वह सरकारी अस्पताल पर नहीं जा पा रहा है या फिर हमला अवकाश के दिन हुआ है तो भी आसानी से और समय से इंजेक्शन लगवा सके।
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इस व्यवस्था के लागू होने से लोगों को लाभ मिल सकेगा। निजी अस्पताल को इंजेक्शन खरीद और जिन मरीजों को लगेगा उनका पूरा डाटा रखना होगा। उपलब्धता की तो जांच भी की जाएगी। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की ओर से जांच की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के लोगों के मुताबिक इस व्यवस्था के लागू हो जाने से लोगों को समय से इंजेक्शन लग सकेगा। अवकाश के समय और अस्पताल के ओपीडी के निर्धारित समय होने के कारण कई बार पीड़ित व्यक्ति को इलाज नहीं मिल पाता है, जिससे उन्हें क
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