नेपाल चाहता है तनाव के हर मुद्दे पर भारत से हो बात, काठमांडू में बैठक की तैयारियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेपाल अब भारत के साथ तनाव के हर मुद्दे को बातचीत के जरिए हल किए जाने के पक्ष में नजर आ रहा है। कुछ दिन पहले नेपाल में भारतीय राजदूत और नेपाल विदेश मंत्रालय सहित अन्य विभागों के सचिवों के बीच बैठक हो चुकी है। इस बैठक में जिन ज्वलंत मुद्दों पर बातचीत नहीं हुई थी, नेपाल सरकार अब उन पर चर्चा के लिए वृहद उच्च स्तरीय बैठक की रूपरेखा तय कर रही है।
काठमांडू में इस बैठक की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। नेपाल विदेश मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सरकार ने बैठक का एजेंडा तैयार करने के लिए होमवर्क शुरू कर दिया है। बैठक वर्चुअल होगी या सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए, यह तय किया जाना बाकी है।
बीते दिनों नेपाल सत्तारूढ़ दल की टॉस्क फोर्स और भारत की ओर से सचिव स्तर के अधिकारियों की बैठक में भारत-नेपाल सीमा विवाद मुद्दे पर चर्चा हुई थी। बैठक में लिपुलेख, लिंपियाधुरा तथा कालापानी पर नेपाल की ओर से जारी नक्शे को वाजिब ठहराया गया था।
बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर पंचशील सिद्धांत, संप्रभु समानता, परस्पर सम्मान और पारस्परिक लाभ के सिद्धांतों पर आधारित एक सहज, समस्यामुक्त व भरोसेमंद नेपाल-भारत संबंध पर जोर दिया गया था। नेपाल ने भारत से ऐतिहासिक तथ्यों का सम्मान करने और इस तथ्य को स्वीकार करने का आग्रह किया था कि काली (महाकाली) के पूर्व का सभी क्षेत्र सुगौली संधि के अनुसार नेपाल के स्वामित्व में है।
नया नहीं है इंडो-नेपाल सीमा विवाद
भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा और नेपाल विदेश मंत्रालय के सचिव समेत अन्य मंत्रालयों के सचिवों के साथ वर्चुवल मीटिंग में नेपाल में चल रही भारतीय परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई थी। उस बैठक में उत्तराखंड के लिंपियाधुरा, लिपुलेख व कालापानी को नेपाल के नक्शे में दिखाए जाने के मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई थी।
नेपाल से लगी बिहार सीमा पर करीब 7100 एकड़ भारतीय भूक्षेत्र पर नेपाल द्वारा कब्जा किए जाने का मुद्दा, बिहार सीमा पर नेपाल पुलिस द्वारा भारतीय नागरिकों पर की गई फायरिंग पर भी चर्चा नहीं हुई। प्रस्तावित बैठक में सीमा विवाद, अवैध कब्जा तथा तनाव के अन्य कारणों पर चर्चा किए जाने की तैयारी चल रही है।
भारत नेपाल के बीच तनाव नया नहीं है। लेकिन इसे दूर करने के लिए हमेशा उच्च स्तरीय बैठकें होती रही हैं। यहां तक कि ऐसे ही एक तनाव को दूर करने के लिए 1956 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भी जाना पड़ा था। उसके बाद सर्वपल्ली राधाकृष्णन, वीवी गिरी, डॉ.जाकिर हुसैन, ज्ञानी जैल सिंह और विदेश मंत्री रहते हुए प्रणब मुखर्जी जैसी शख्सियतों को काठमांडू जाना पड़ा था। बेशक भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार नेपाल की यात्रा की लेकिन उनकी यात्रा ऐसे किसी मौके पर नहीं थी।