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नेपाल पहुंची गन्ना लदी ट्रॉली का स्वागत
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 05 Dec 2016 10:21 PM IST
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बढ़नी में गन्ने से लदी ट्राॅली की पूजा करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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बढनी। गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी सोमवार से भारतीय क्षेत्र का गन्ना नेपाल स्थित महालक्ष्मी सुगर मिल जवाभारी जाना शुरू हो गया। गन्ने से लदी पहली ट्राली पहली के कस्टम वैरियर पर पहुंचने पर चीनी मिल के मैनेजर राजेश सिंह व दीपक श्रीवास्तव ने अगुवानी कर विधि विधान से पूजा अर्चना की। कस्टम व एसएसबी के अधिकारियों को गन्ना आयुक्त लखनऊ का 15 लाख कुंतल गन्ना नेपाल ले जाने का आदेश दिखा अनुमति प्राप्त की। अनुमति मिलने पर ट्राली नेपाल मे प्रवेश करने पर नेपाल भंसार कार्यालय प्रमुख विंदेश्वर प्रसाद एवं वरिष्ठ अधिकारी टोप बहादुर भुसाल, नेपाल सशस्त्र बल के डीएसपी तारिक चंद चौधरी आदि ने पूजा-पाठ कर गन्ना लदी ट्राली का स्वागत किया। भारतीय किसानों से कहा कि आप गन्ना लाइये नेपाल में आपका स्वागत है।
भंसार सहित मिल तक आपको कोई परेशानी नही होगी । पहली ट्राली गन्ना ले जाने वाले भारत के लक्ष्मीनगर के किसान प्रदीप कुमार एवं अन्य ट्राली वाले किसान राममूरत, प्रजापति आदि ने बताया कि भारत के तुलसीपुर व बलरामपुर की सुगर मिलें समय से तौल पर्ची नहीं देती हैं, जिससे पेड़ी काटकर हम लोग गेहूं नही बो पाते हैं। वहां गन्ना बेंच भी दें तो समय से पेमेंट नहीं मिल पाता है। वहीं नेपाल मे 320 रुपये भारतीय मुद्रा यानी 512 रु नेपाली मे तौल के दिन ही नगद भुगतान हो जाने के कारण सिद्धार्थनगर व बलरामपुर जनपद के अधिकांश किसान अपना गन्ना नेपाल बेचते हैं।
किसानों ने कहा कि भारतीय मिलों का भुगतान किसानो के बैंक खातों में आता है। इस बार नोट बंदी के बाद बैंक रुपया दे नही पा रहें हैं। एक बड़ा कारण इस समय नेपाल गन्ना ले जाने का यह भी है। वहीं कस्टम अधीक्षक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने भरोसा दिलाया कि गन्ना ले जाने वाले किसानों को पूरी सहूलियत दी जाएगी और उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी।
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भंसार सहित मिल तक आपको कोई परेशानी नही होगी । पहली ट्राली गन्ना ले जाने वाले भारत के लक्ष्मीनगर के किसान प्रदीप कुमार एवं अन्य ट्राली वाले किसान राममूरत, प्रजापति आदि ने बताया कि भारत के तुलसीपुर व बलरामपुर की सुगर मिलें समय से तौल पर्ची नहीं देती हैं, जिससे पेड़ी काटकर हम लोग गेहूं नही बो पाते हैं। वहां गन्ना बेंच भी दें तो समय से पेमेंट नहीं मिल पाता है। वहीं नेपाल मे 320 रुपये भारतीय मुद्रा यानी 512 रु नेपाली मे तौल के दिन ही नगद भुगतान हो जाने के कारण सिद्धार्थनगर व बलरामपुर जनपद के अधिकांश किसान अपना गन्ना नेपाल बेचते हैं।
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किसानों ने कहा कि भारतीय मिलों का भुगतान किसानो के बैंक खातों में आता है। इस बार नोट बंदी के बाद बैंक रुपया दे नही पा रहें हैं। एक बड़ा कारण इस समय नेपाल गन्ना ले जाने का यह भी है। वहीं कस्टम अधीक्षक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने भरोसा दिलाया कि गन्ना ले जाने वाले किसानों को पूरी सहूलियत दी जाएगी और उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी।
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