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Siddharthnagar News: हल्लौर कस्बे में आयोजित हुई मरसिया मजलिस
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डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर में मजलिस ए अजा को संबोधित करते जाकिर जमाल हैदर रिजवी। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
हल्लौर कस्बे में आयोजित हुई मरसिया मजलिस
डुमरियागंज। हल्लौर कस्बे में मंगलवार को पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की बेटी हजरत फातिमा जेहरा की शहादत का गम मनाया गया। जामा मस्जिद, जन्नतुलबकी तथा बड़े इमामबाड़ा, हुसैनिया बाबुल आदि स्थानों पर मरसिया मजलिस आयोजित की गई। फातिमा जेहरा की शहादत का जिक्र सुन अकीदतमंद रो पड़े। अकीदतमंदों ने नौहा मातम कर उन्हें नजराने अकीदत श्रद्धा सुमन पेश किया।
मौलाना तसदीक हुसैन, जमाल हैदर तथा काजिम करबलाई और अजीम हैदर ने कहा कि रसूले खुदा हजरत मोहम्मद साहब की वफात देहांत के बाद उनकी इकलौती बेटी शहजादी फातिमा जेहरा पर इस्लाम के दुश्मनों ने बहुत अत्याचार किया। वह ऐसी महान महिला थीं, जिन्होंने अपने छोटे से जीवन में इस्लाम और इंसानियत के लिए महान कार्य किए।
मजलिस के अंत में मौलाना ने फातिमा जेहरा की शहादत को बयान किया। मजलिस से पहले मरसियाख्वानी शाहिद आलम और उनके सहयोगी ने की। मंगलवार देर शाम दरगाह हजरत अब्बास, जन्नतुलबकी, इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुलए इमामिया मकतब तथा कई अन्य स्थानों पर फातिमा जेहरा का ताबूत सजाया गया। जहां पर देर रात तक मरसिया मजलिस और नौहा मातम किया गया।
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डुमरियागंज। हल्लौर कस्बे में मंगलवार को पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की बेटी हजरत फातिमा जेहरा की शहादत का गम मनाया गया। जामा मस्जिद, जन्नतुलबकी तथा बड़े इमामबाड़ा, हुसैनिया बाबुल आदि स्थानों पर मरसिया मजलिस आयोजित की गई। फातिमा जेहरा की शहादत का जिक्र सुन अकीदतमंद रो पड़े। अकीदतमंदों ने नौहा मातम कर उन्हें नजराने अकीदत श्रद्धा सुमन पेश किया।
मौलाना तसदीक हुसैन, जमाल हैदर तथा काजिम करबलाई और अजीम हैदर ने कहा कि रसूले खुदा हजरत मोहम्मद साहब की वफात देहांत के बाद उनकी इकलौती बेटी शहजादी फातिमा जेहरा पर इस्लाम के दुश्मनों ने बहुत अत्याचार किया। वह ऐसी महान महिला थीं, जिन्होंने अपने छोटे से जीवन में इस्लाम और इंसानियत के लिए महान कार्य किए।
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मजलिस के अंत में मौलाना ने फातिमा जेहरा की शहादत को बयान किया। मजलिस से पहले मरसियाख्वानी शाहिद आलम और उनके सहयोगी ने की। मंगलवार देर शाम दरगाह हजरत अब्बास, जन्नतुलबकी, इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुलए इमामिया मकतब तथा कई अन्य स्थानों पर फातिमा जेहरा का ताबूत सजाया गया। जहां पर देर रात तक मरसिया मजलिस और नौहा मातम किया गया।
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