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Siddharthnagar News: अंदर दवाओं का भंडार, बाहर से खरीदने को मजबूर हैं बीमार
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मेडिकल कालेज में दवा लेते मरीज।
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए विवश किया जा रहा है। दवा वितरण कक्ष में दवाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली गई और नियमित दवा खाने वाले मरीजों से बात की गई तो पता चला कि दवा वितरण कक्ष तक इन दवाओं के पर्चे बहुत कम पहुंच रहे हैं।
अनियमित दिनचर्या व खानपान का नतीजा है कि ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अधिकांश परिवारों में इन बीमारियों से पीड़ित मरीज मिल जाएंगे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सामान्यत: इन बीमारियों के मरीजों को पूरे जीवन दवा लेने की जरूरत होती है। सरकारी अस्पतालों में इन बीमारियों की दवाएं भी निशुल्क उपलब्ध हैं। लेकिन कुछ जिम्मेदारों की लापरवाही और लालच के कारण जरूरतमंदों तक दवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं।
बृहस्पतिवार को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में सबसे उपयोगी और मौजूदा समय के जरुरत वाली इन दवाओं की उपलब्धता और मरीजों की सहूलियत के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आये। ओपीडी में हर दसवां मरीज शुगर ब्लड प्रेशर से पीड़ित है। दवा वितरण कक्ष में इन दोनों बीमारियों की दवा लेने के लिए लोग नहीं जा रहे हैं। दवा वितरण कक्ष में इस समय 145 प्रकार की दवाएं हैं। इसमें शुगर और ब्लड प्रेशर की अलग-अलग ब्रांड की पांच दवाएं भी प्रर्याप्त मात्रा में हैं।
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खपत के बारे में पता चला कि अन्य दवाएं जहां प्रतिदिन तीन से 10 हजार गोली तक वितरित हो रही हैं। वहीं, यह दो दवाएं 200 का आंकड़ा किसी ही दिन पार कर पाती हैं। जबकि, 1500-1800 ओपीडी में 100 से अधिक शुगर और ब्लड प्रेशर के रोगी पहुंचते हैं। पांच दिन का खुराक 10 गोली भी दिया जाए तो एक हजार प्रतिदिन जाएगा और लोगों को लाभ मिलेगा।
अस्पताल के पास और साड़ी तिराहा पर खुले मेडिकल स्टोर से दवा लेकर निकले शहर के थरौली निवासी रामसंवारे ने बताया कि पिछले चार साल से ब्लडप्रेशर है। दिखाने के लिए आते हैं और बाहर से ही दवा लेते हैं। अंदर दवा लेने के लिए कभी कहा ही नहीं गया। पकहिड़वा निवासी 70 साल की पानमती ने बताया कि कुछ दिन पहले दिक्कत हुई, जांच में डॉक्टर ने शुगर की पुष्टि की। एक माह से दवा शुरू हुई है। एक भी दवा अंदर से नहीं ली। ऐसे में अगर आप इलाज कराने के लिए आ रहे हैं तो डॉक्टर से अंदर की दवा ही लिखने के कहें।
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बोले जिम्मेदार
सभी प्रकार की दवाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। समय-समय पर डिमांड भी भेजा जाता है। शुगर और ब्लड प्रेशर की दवाएं प्रर्याप्त हैं। अगर डॉक्टर नहीं लिख रहे हैं तो इसके बारे में जानकारी ली जाएगी। क्योंकि सभी दवाएं अंदर से लिखने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. राजेश मोहन, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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अनियमित दिनचर्या व खानपान का नतीजा है कि ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अधिकांश परिवारों में इन बीमारियों से पीड़ित मरीज मिल जाएंगे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सामान्यत: इन बीमारियों के मरीजों को पूरे जीवन दवा लेने की जरूरत होती है। सरकारी अस्पतालों में इन बीमारियों की दवाएं भी निशुल्क उपलब्ध हैं। लेकिन कुछ जिम्मेदारों की लापरवाही और लालच के कारण जरूरतमंदों तक दवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं।
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बृहस्पतिवार को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में सबसे उपयोगी और मौजूदा समय के जरुरत वाली इन दवाओं की उपलब्धता और मरीजों की सहूलियत के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आये। ओपीडी में हर दसवां मरीज शुगर ब्लड प्रेशर से पीड़ित है। दवा वितरण कक्ष में इन दोनों बीमारियों की दवा लेने के लिए लोग नहीं जा रहे हैं। दवा वितरण कक्ष में इस समय 145 प्रकार की दवाएं हैं। इसमें शुगर और ब्लड प्रेशर की अलग-अलग ब्रांड की पांच दवाएं भी प्रर्याप्त मात्रा में हैं।
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खपत के बारे में पता चला कि अन्य दवाएं जहां प्रतिदिन तीन से 10 हजार गोली तक वितरित हो रही हैं। वहीं, यह दो दवाएं 200 का आंकड़ा किसी ही दिन पार कर पाती हैं। जबकि, 1500-1800 ओपीडी में 100 से अधिक शुगर और ब्लड प्रेशर के रोगी पहुंचते हैं। पांच दिन का खुराक 10 गोली भी दिया जाए तो एक हजार प्रतिदिन जाएगा और लोगों को लाभ मिलेगा।
अस्पताल के पास और साड़ी तिराहा पर खुले मेडिकल स्टोर से दवा लेकर निकले शहर के थरौली निवासी रामसंवारे ने बताया कि पिछले चार साल से ब्लडप्रेशर है। दिखाने के लिए आते हैं और बाहर से ही दवा लेते हैं। अंदर दवा लेने के लिए कभी कहा ही नहीं गया। पकहिड़वा निवासी 70 साल की पानमती ने बताया कि कुछ दिन पहले दिक्कत हुई, जांच में डॉक्टर ने शुगर की पुष्टि की। एक माह से दवा शुरू हुई है। एक भी दवा अंदर से नहीं ली। ऐसे में अगर आप इलाज कराने के लिए आ रहे हैं तो डॉक्टर से अंदर की दवा ही लिखने के कहें।
बोले जिम्मेदार
सभी प्रकार की दवाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। समय-समय पर डिमांड भी भेजा जाता है। शुगर और ब्लड प्रेशर की दवाएं प्रर्याप्त हैं। अगर डॉक्टर नहीं लिख रहे हैं तो इसके बारे में जानकारी ली जाएगी। क्योंकि सभी दवाएं अंदर से लिखने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. राजेश मोहन, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज