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मकसूद नेटवर्क : 50 से अधिक संदिग्ध संपर्कों की जांच में जुटी सुरक्षा एजेंसिया
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सिद्धार्थनगर। बांसी कोतवाली क्षेत्र के गोहनाडीह गांव के टोला मधवापुर निवासी मकसूद अली (19) की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां उसके संपर्कों और डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल में जुटी हैं। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में 50 से अधिक संदिग्ध लोगों के संपर्क में होने के इनपुट मिले हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण कर इन संपर्कों का सत्यापन कर रही हैं।
मकसूद को उत्तर प्रदेश एटीएस ने 14 सितंबर को तमिलनाडु के कोयंबटूर से गिरफ्तार किया था। इससे पहले 12 सितंबर को आजमगढ़ के दीदारगंज थाना क्षेत्र निवासी मोहम्मद नबील को कथित तौर पर अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) की विचारधारा से जुड़े मॉड्यूल के मामले में गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ और मिले साक्ष्यों के आधार पर एटीएस को मकसूद के बारे में जानकारी मिली थी।
एटीएस की जांच में मकसूद के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से आतंकी विचारधारा से जुड़े दस्तावेज और अन्य डिजिटल सामग्री मिलने की बात सामने आई है। एजेंसी इन साक्ष्यों और दोनों आरोपियों के बीच संपर्कों की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल साक्ष्यों से नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
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बांसी के कोतवाल एमपी चतुर्वेदी ने बताया कि थाना स्तर से इस मामले में कोई जानकारी नहीं मांगी गई है और न ही किसी जांच टीम ने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया है।
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मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों से जुटाई जा रही जानकारी
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी दोनों आरोपियों के मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपलब्ध तथा हटाई गई डिजिटल सामग्री की जांच कर रही है। कुछ संदिग्ध संपर्कों के संबंध में प्रदेश के अन्य जिलों में भी जानकारी जुटाए जाने की बात सामने आई है। कुछ युवाओं को पूछताछ के लिए नोटिस दिए जाने की जानकारी भी है। हालांकि, सिद्धार्थनगर में मकसूद के किन लोगों से संपर्क थे, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध संपर्कों का सत्यापन कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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तीन माह पहले घर से निकला था मकसूद
परिवार के अनुसार, मकसूद गिरफ्तारी से करीब तीन माह पहले घर से निकला था। वह पहले मुंबई, फिर गुजरात और इसके बाद तमिलनाडु गया था। गिरफ्तारी की जानकारी मिलने पर उसके पिता लखनऊ जाकर उससे मिले थे। इसके बाद परिवार की ओर से दोबारा वहां जाने की बात सामने नहीं आई है। मकसूद की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय स्तर पर किसी जांच टीम के घर पहुंचने की जानकारी भी नहीं है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां अपने स्तर से जांच कर रही हैं।
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डिजिटल गतिविधियों और संपर्कों की जांच में जुटी तकनीकी टीम
जांच एजेंसियां मकसूद की डिजिटल गतिविधियों, ऑनलाइन संपर्कों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, उसकी तकनीकी दक्षता और ऑनलाइन गतिविधियां भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वह किन लोगों के संपर्क में था और उसकी गतिविधियों का दायरा कितना था। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अभी सामने आए संपर्कों का सत्यापन किया जा रहा है। किसी व्यक्ति का डिजिटल संपर्क सामने आना मात्र उसकी संलिप्तता साबित नहीं करता। एजेंसियां साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।
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मकसूद को उत्तर प्रदेश एटीएस ने 14 सितंबर को तमिलनाडु के कोयंबटूर से गिरफ्तार किया था। इससे पहले 12 सितंबर को आजमगढ़ के दीदारगंज थाना क्षेत्र निवासी मोहम्मद नबील को कथित तौर पर अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) की विचारधारा से जुड़े मॉड्यूल के मामले में गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ और मिले साक्ष्यों के आधार पर एटीएस को मकसूद के बारे में जानकारी मिली थी।
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एटीएस की जांच में मकसूद के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से आतंकी विचारधारा से जुड़े दस्तावेज और अन्य डिजिटल सामग्री मिलने की बात सामने आई है। एजेंसी इन साक्ष्यों और दोनों आरोपियों के बीच संपर्कों की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल साक्ष्यों से नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
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बांसी के कोतवाल एमपी चतुर्वेदी ने बताया कि थाना स्तर से इस मामले में कोई जानकारी नहीं मांगी गई है और न ही किसी जांच टीम ने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया है।
मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों से जुटाई जा रही जानकारी
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी दोनों आरोपियों के मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपलब्ध तथा हटाई गई डिजिटल सामग्री की जांच कर रही है। कुछ संदिग्ध संपर्कों के संबंध में प्रदेश के अन्य जिलों में भी जानकारी जुटाए जाने की बात सामने आई है। कुछ युवाओं को पूछताछ के लिए नोटिस दिए जाने की जानकारी भी है। हालांकि, सिद्धार्थनगर में मकसूद के किन लोगों से संपर्क थे, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध संपर्कों का सत्यापन कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
तीन माह पहले घर से निकला था मकसूद
परिवार के अनुसार, मकसूद गिरफ्तारी से करीब तीन माह पहले घर से निकला था। वह पहले मुंबई, फिर गुजरात और इसके बाद तमिलनाडु गया था। गिरफ्तारी की जानकारी मिलने पर उसके पिता लखनऊ जाकर उससे मिले थे। इसके बाद परिवार की ओर से दोबारा वहां जाने की बात सामने नहीं आई है। मकसूद की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय स्तर पर किसी जांच टीम के घर पहुंचने की जानकारी भी नहीं है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां अपने स्तर से जांच कर रही हैं।
डिजिटल गतिविधियों और संपर्कों की जांच में जुटी तकनीकी टीम
जांच एजेंसियां मकसूद की डिजिटल गतिविधियों, ऑनलाइन संपर्कों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, उसकी तकनीकी दक्षता और ऑनलाइन गतिविधियां भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वह किन लोगों के संपर्क में था और उसकी गतिविधियों का दायरा कितना था। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अभी सामने आए संपर्कों का सत्यापन किया जा रहा है। किसी व्यक्ति का डिजिटल संपर्क सामने आना मात्र उसकी संलिप्तता साबित नहीं करता। एजेंसियां साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।