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कैसे कुपोषण से जीतेंगे बच्चे, जब नहीं पहुंच रहे एनआरसी

Fri, 20 May 2022 10:36 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 20 May 2022 10:36 PM IST
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malnutrition.
कैसे कुपोषण से जीतेंगे बच्चे, जब नहीं पहुंच रहे एनआरसी
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- जिले में कुपोषण के शिकार बच्चों की तादाद अधिक
- जिला अस्पताल के वार्ड खाली, 10 बेड के वार्ड में केवल एक बच्चा भर्ती
- पोषण पुनर्वास केंद्र में एक बच्चे को 15 दिन रखने का है नियम
- आशा और आंगनबाड़ी नहीं ले रहीं रुचि, इसलिए कम आ रहे बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सरकार जन्म लेने वाले बच्चे के सेहत का ख्याल रखने के लिए उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के साथ ही कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को पोषित बनाने की योजना चला रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जिम्मेदार कुपोषित बच्चों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
जिले में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित तो कर लिया जा रहा है, लेकिन उनका विकास हो और वह सामान्य बच्चों की तरह स्वस्थ रहें, इसके लिए उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचाने में जिम्मेदार हिचक रहे हैं। यह जिला अस्पताल के एनआरसी केंद्र की रिपोर्ट तस्दीक कर रही है कि जिम्मेदार कितने गंभीर हैं, क्योंकि साढ़े पांच माह में यहां पर 26 बच्चे ही भर्ती किए गए हैं, जबकि जिले में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या अधिक है।
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शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए सरकार जन्म लेने बाद उन्हें टीके के साथ ही पौष्टिक आहार आंगनबाड़ी और आशा के माध्यम से पहुंचा रही है। जिससे बच्चे की सेहत अच्छी रहे। इसमें भी अगर कोई बच्चा पौष्टिक आहार के बिना उम्र के हिसाब से कमजोर है और जांच में कुपोषित और अति कुपोषित मिल रहा है तो उसकी सेहत सुधारने के लिए आशा और आंगनबाड़ी की मदद से खून से संबंधित जांच करवाती हैं। साथ ही वह सामान्य बच्चों की तरह से स्वस्थ हो सकें, इसलिए जिला अस्पताल पर बने एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में 14 दिन रखा जाता है। यहां पर उनकी नियमित जांच, वजन की तौल, नियमित पौष्टिक आहार दिया जाता है। जिससे वजह भी सामान्य बच्चों की तरह हो सके। लेकिन जिले में जिम्मेदारों की उदासीनता बच्चों को कुपोषित से पोषित होने में बाधा बन रही है। जिला अस्पताल के एनआरटी से मिले आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से अब तक केवल 26 बच्चे वार्ड में भर्ती किए गए हैं।
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जिले में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या
जिले की मौजूदा समय में आबादी लगभग 29 लाख है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार 388112 बच्चे हैं, जिनकी उम्र पांच वर्ष से कम है। इनमें 35498 कुपोषित बच्चे हैं। जबकि 7402 अतिकुपोषित बच्चे हैं। जिन्हें पौष्टिक आहार नियमित देना आवश्यक है, जिससे कुपोषण से मुक्ति पा सकें।
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10 बेड का है वार्ड
जिला अस्पताल में स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र 10 बेड का है। यहां पर पांच वर्ष तक के कुपोषित बच्चे के साथ ही उनकी मां भी रहती हैं। यहां पर बच्चों के रहने, खाने के साथ ही उनके स्वास्थ्य की देखभाल की जाती है। बच्चे के साथ रहने वाली मां को निशुल्क भोजन के साथ रहने का 100 रुपये प्रतिदिन की औसत से भत्ता भी मिलता है। एंबुलेंस लाने और ले जाने की सुविधा है। अगर आशा और आंगनबाड़ी वर्कर लाती हैं तो उन्हें भी भत्ता दिया जाता है।
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साढ़े चार माह में 25 बच्चे हुए स्वस्थ
मौजूदा समय में पोषण पुनर्वास केंद्र में एक बच्चा भर्ती हुआ है, जिसका इलाज किया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2022 से अब तक 25 बच्चे स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं, जबकि इस वार्ड के लिए स्टाफ नर्सों की ड्यूटी लगाई गई है।
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मेन्यू के अनुसार मिलता है पौष्टिक आहार
जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र पर मेन्यू के हिसाब से बच्चों को पोषक तत्व दिया जाता है। इसमें दूध, नियमित दलिया, फल, ब्रेड सहित अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं, जिससे बच्चा जल्द स्वस्थ होकर सामान्य श्रेणी में आ जाए।

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बोले जिम्मेदार
पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चे कम पहुंच रहे हैं, इसके बारे में जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो जानकारी ली जाएगी। साथ ही विभागीय बैठक कर जिम्मेदारों को निर्देश दिया जाएगा।
पुलकित गर्ग, मुख्य विकास अधिकारी सिद्धार्थनगर
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