{"_id":"65a704ff901397746203ee14","slug":"madhav-prasad-tripathi-medical-college-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1032-11542-2024-01-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेडिकल कॉलेज : दस्तावेजों की हुई जांच तो अटक गई कई की सास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेडिकल कॉलेज : दस्तावेजों की हुई जांच तो अटक गई कई की सास
Wed, 17 Jan 2024 04:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 17 Jan 2024 04:06 AM IST
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की नियुक्तियों में हुए गडबड़झाला की पोल खुल रही है। इस मामले में दस्तावेजों की जांच शुरू हुई है तो कई अधिकारियों और डॉक्टरों की सास अटक गई है। यहीं कारण कि दो शिक्षकों के बीच शुरू हुए विवाद को तूल देने की बजाए समझौते की कोशिश की जा रही है। दबाव ऐसा बनाया जा रहा है कि नियुक्तियों के दौरान स्क्रूटनी कमेटी की ओर से छिपाए गए तथ्यों का खेल बाहर न आए।
मेडिकल कॉलेज माइक्रोबाॅयोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफसर डॉ. आरती चतुर्वेदी ने एनएमसी के नोडल अफसर डॉ. नौशाद आलम पर धार्मिक प्रताड़ना का आरोप लगाया मीडिया में लगाया तो नियुक्तियों में हुए फर्जीवाड़े बाहर आने लगे, क्योंकि डॉ. नौशाद आलम ने भी मीडिया में जवाब देते हुए दावा कि डॉ. आरती चतुर्वेदी की नियुक्तियों में दस्तावेजों की जांच में गड़बड़ी हुई है। हालांकि, डॉ. नौशाद आलम का कहना है कि डॉ आरती चतुर्वेदी के आरोप लगाने से पहले ही उन्हाेंने प्राचार्य डॉ. एके झा को लिखित रूप से बताया कि नियुक्तियों में नियमाें का उलंघन हुआ है। इस मामले में डॉ. आरती चतुर्वेदी का भी कहना है कि वह जांच के लिए तैयार हैं और उन्होंने दस्तावेजों में कोई गलती नहीं की है। नियुक्तियों की जांच में ही सच्चाई सामने आएगी।
-- -- -
केस एक
मेडिकल कॉलेज में एक एसोसिएट प्रोफेसर की पीएचडी डिग्री ही सवालों के घेरे में है। इसके साथ ही उन्होंने पीएचडी 2021 में की है, जबकि एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
विज्ञापन
तत्कालीन एमसीआई की नियमावली 1998 के संसोधन 2009 के अनुसार सात साल अनुभव के बाद ही एसोसिएट प्रोफेसर होना चाहिए।
-- -- -
केस दो
मेडिकल कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफसर पीएचडी कर रही है, जबकि बिना पीएचडी के ही नौकरी कर रही है। इसके साथ ही मेडिकल साइंस में ऑन कैंपस पीएचडी होनी चाहिए। ऐसी स्थित में सभी फैकल्टी की नियुक्तियों की जांच में अधिकारियों के सामने भी मुश्किलें आ सकती हैं।
-- -- -- -- -
एक करोड़ जुर्माने का नियम
नियुक्तियों में गड़बड़झाला की जांच हुई तो पूर्व प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव भी जांच के दायरे में आएंगे। शासन के नियमों के अनुसार नियुक्तियां हुई हैं, लेकिन स्क्रूटनी कमेटी की ओर से तथ्यों की जांच में झोल करने की आशंका बन रही है। इस मामले में दोषी साबित होने पर प्राचार्य पर एक करोड़ रुपये और फैकल्टी के खिलाफ पांच लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। संबंधित फैकल्टी का नाम एनएमसी की लिस्ट से हटाया जा सकता है।
-- -- -- -- -- --
वर्जन
मेडिकल कॉलेज में नियुक्तियां शासन के नियमों के अंतर्गत हुई है। जो आरोप लगाए गए हैं, वे गलत हैं। फिर भी क्रास चेक कराएंगे।
डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज माइक्रोबाॅयोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफसर डॉ. आरती चतुर्वेदी ने एनएमसी के नोडल अफसर डॉ. नौशाद आलम पर धार्मिक प्रताड़ना का आरोप लगाया मीडिया में लगाया तो नियुक्तियों में हुए फर्जीवाड़े बाहर आने लगे, क्योंकि डॉ. नौशाद आलम ने भी मीडिया में जवाब देते हुए दावा कि डॉ. आरती चतुर्वेदी की नियुक्तियों में दस्तावेजों की जांच में गड़बड़ी हुई है। हालांकि, डॉ. नौशाद आलम का कहना है कि डॉ आरती चतुर्वेदी के आरोप लगाने से पहले ही उन्हाेंने प्राचार्य डॉ. एके झा को लिखित रूप से बताया कि नियुक्तियों में नियमाें का उलंघन हुआ है। इस मामले में डॉ. आरती चतुर्वेदी का भी कहना है कि वह जांच के लिए तैयार हैं और उन्होंने दस्तावेजों में कोई गलती नहीं की है। नियुक्तियों की जांच में ही सच्चाई सामने आएगी।
विज्ञापन
केस एक
मेडिकल कॉलेज में एक एसोसिएट प्रोफेसर की पीएचडी डिग्री ही सवालों के घेरे में है। इसके साथ ही उन्होंने पीएचडी 2021 में की है, जबकि एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
विज्ञापन
तत्कालीन एमसीआई की नियमावली 1998 के संसोधन 2009 के अनुसार सात साल अनुभव के बाद ही एसोसिएट प्रोफेसर होना चाहिए।
केस दो
मेडिकल कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफसर पीएचडी कर रही है, जबकि बिना पीएचडी के ही नौकरी कर रही है। इसके साथ ही मेडिकल साइंस में ऑन कैंपस पीएचडी होनी चाहिए। ऐसी स्थित में सभी फैकल्टी की नियुक्तियों की जांच में अधिकारियों के सामने भी मुश्किलें आ सकती हैं।
एक करोड़ जुर्माने का नियम
नियुक्तियों में गड़बड़झाला की जांच हुई तो पूर्व प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव भी जांच के दायरे में आएंगे। शासन के नियमों के अनुसार नियुक्तियां हुई हैं, लेकिन स्क्रूटनी कमेटी की ओर से तथ्यों की जांच में झोल करने की आशंका बन रही है। इस मामले में दोषी साबित होने पर प्राचार्य पर एक करोड़ रुपये और फैकल्टी के खिलाफ पांच लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। संबंधित फैकल्टी का नाम एनएमसी की लिस्ट से हटाया जा सकता है।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज में नियुक्तियां शासन के नियमों के अंतर्गत हुई है। जो आरोप लगाए गए हैं, वे गलत हैं। फिर भी क्रास चेक कराएंगे।
डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य