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Siddharthnagar News: अल्ट्रासाउंड की दृश्यता कम, कैसे हो मर्ज की पहचान.

Thu, 08 Dec 2022 11:55 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 08 Dec 2022 11:55 PM IST
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Low visibility of ultrasound, how to identify merge.
जिला अस्पताल के पैथालोजी में जांच कराने के लिए लगी मरीजों की भीड़। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
अल्ट्रासाउंड की दृश्यता कम, कैसे हो मर्ज की पहचान.
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जनपद के जिला अस्पताल में ही है अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा
मानक से आधे समय में जांच करके मरीजों को दी जा रही अस्पष्ट रिपोर्ट
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल में सात साल पुरानी अल्ट्रासाउंड मशीन की दृश्यता कम हो गई है। इससे मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण मानक से आधे से कम समय में ही जांच करके रिपोर्ट दी जा रही है। एक अल्ट्रासाउंड करने में 5-7 मिनट लगना चाहिए, लेकिन जिला अस्पताल में औसतन दो से ढाई मिनट में ही एक मरीज की जांच की जा रही है। इस कारण मरीजों को अस्पष्ट रिपोर्ट प्राप्त हो रही है और इलाज करने वाले डॉक्टरों को अंधेरे में तीर चलाने की मजबूरी है।
जिले के इकलौते जिला अस्पताल में ही अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा है। जिले के ग्रामीण क्षेत्र के 65-70 किमी दूरी तय करके अस्पताल में घंटों लाइन में लगने के बावजूद भी मरीजों को सही रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। इस कारण उन्हें निजी सेंटर में जांच कराना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड सेंटर में 2015 में खरीदी गई मशीन से जांच की जा रही है। रेडियोलॉजिस्ट ने सीएमएस को पत्र लिखकर बताया है कि अल्ट्रासाउंड मशीन की प्रोब (जिससे शरीर में लगाकर देखा जाता है) की दृश्यता कम हो गई। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि बजट नहीं होने से मशीन नहीं बदली जा रही है। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि एक जांच पांच से सात मिनट में होनी चाहिए। कुछ जटिल जांचों में अधिक समय लग जाता है।
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संवाददाता ने बृहस्पतिवार को अल्ट्रासाउंड सेंटर में 12.06 से 12.36 बजे तक अल्ट्रासाउंड कराने वाले मरीजों की गिनती की तो आधे घंटे में 16 मरीजों की जांच की गई और उन्हें तत्काल रिपोर्ट भी मिल गई। इस दौरान शंकर, मनोज, भूमिका, श्रेयांश, रीता देवी, सोनमती एवं रंजू की जांच की गई, जबकि इतने समय में ही एक अस्पताल कर्मचारी के रिश्तेदार की भी जांच की गई। रीता देवी ने शिकायत की कि जांच में डेढ़ घंटे इंतजार करना पड़ा, जबकि अस्पताल के लोग लाइन तोड़कर जांच करा रहे हैं।
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एक दिन में होनी चाहिए 30 से 40 जांच
डॉक्टरों के अनुसार ओपीडी में एक दिन में 30 से 40 मरीजों की जांच की जानी चाहिए, लेकिन 65 से 70 मरीजों की जांच हो रही है। सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक जांच होनी चाहिए, लेकिन करीब 10 बजे ही जांच शुरू हो पाती है, क्योंकि रेडियोलॉजिस्ट मेडिको लीगल एवं कोर्ट केस की रिपोर्ट तैयार करने के बाद ही जांच शुरू करते हैं।

इतनी हुई जांच
तिथि- जांच की संख्या .... गर्भवती
छह नवंबर - 78- 14
सात नवंबर - 57- 8
आठ नवंबर- 68- 4
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वर्जन
अल्ट्रासाउंड मशीन की प्रोब की दृश्यता कम हो गई है। इसकी कीमत लगभग चार लाख रुपये आएगी, गैर वेतन मद में बजट नहीं होने के कारण खरीद नहीं हो पा रही है। जिला स्वास्थ्य समिति में एक नई अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदने का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है, लेकिन बजट प्राप्त होगा, तभी मशीन खरीदी जाएगी। डॉक्टरों को निर्देश दिया गया है कि एक दिन में 30-35 जांच ही की जाए ताकि गुणवत्ता खराब न हो।
डॉ. एके झा, प्रभारी सीएमएस/ प्राचार्य
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