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श्रीमद्भागवत कथा के सुनने से मिलती है मुक्ति : कनकेश्वरी देवी
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भनवापुर के सिकटा में श्रीमदभागवत कथा सुनाती कनकेश्वरी। स्रोत विज्ञप्ति
-भनवापुर क्षेत्र के सिकटा में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से मुक्ति मिलती है। ये बातें क्षेत्र के सिकटा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन बुधवार को कथा वाचक कनकेश्वरी देवी ने कथा कही। उन्होंने कहा कि गौकर्थ और धुंधकारी सगे भाई थे, गौकर्थ धार्मिक प्रवृति के तथा धुंधकारी कुकर्मी प्रवृति का था। माता-पिता की मृत्यु के पश्चात गौकर्थ घर की जिम्मेदारी धुंधकारी को देकर तीर्थ यात्रा पर निकल गया। इधर धुंधकारी अपने प्रवृति के अनुसार वेश्याओं के चक्कार में पड़ गया तथा अपनी सारी संपत्ति उनके पीछे गंवा चुका था।
अंत में वेश्याओं ने धुंधकारी को उसके ही घर में हत्या कर आंगन में दफना दिया। इधर तीर्थ यात्रा से लौटे गौकर्थ ने भाई धुंधकारी को खोजा पर नहीं मिला। शाम को भोजन करके जब गौकर्थ सोगया तो स्वप्न में आकर धुंधकारी ने पूरी कहानी गौकर्थ को बताई तथा प्रेतयोनी से मुक्ति दिलाने का आग्रह किया। गौकर्थ ने विद्धान पुरोहित के कहने पर सात गांठ के हरे बांस को व्यास पीठ के सामने खड़ा कर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण धुंधकारी को कराया। कथा के सातवें दिन पूर्णाहुति के बाद धुंधकारी को प्रेतयोनि से मुक्ति मिल गई।
इस दौरान यशवीर सिंह, जय प्रकाश सिंह, केशव सिंह, ज्ञान प्रकाश सिंह, राजा आदि उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से मुक्ति मिलती है। ये बातें क्षेत्र के सिकटा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन बुधवार को कथा वाचक कनकेश्वरी देवी ने कथा कही। उन्होंने कहा कि गौकर्थ और धुंधकारी सगे भाई थे, गौकर्थ धार्मिक प्रवृति के तथा धुंधकारी कुकर्मी प्रवृति का था। माता-पिता की मृत्यु के पश्चात गौकर्थ घर की जिम्मेदारी धुंधकारी को देकर तीर्थ यात्रा पर निकल गया। इधर धुंधकारी अपने प्रवृति के अनुसार वेश्याओं के चक्कार में पड़ गया तथा अपनी सारी संपत्ति उनके पीछे गंवा चुका था।
अंत में वेश्याओं ने धुंधकारी को उसके ही घर में हत्या कर आंगन में दफना दिया। इधर तीर्थ यात्रा से लौटे गौकर्थ ने भाई धुंधकारी को खोजा पर नहीं मिला। शाम को भोजन करके जब गौकर्थ सोगया तो स्वप्न में आकर धुंधकारी ने पूरी कहानी गौकर्थ को बताई तथा प्रेतयोनी से मुक्ति दिलाने का आग्रह किया। गौकर्थ ने विद्धान पुरोहित के कहने पर सात गांठ के हरे बांस को व्यास पीठ के सामने खड़ा कर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण धुंधकारी को कराया। कथा के सातवें दिन पूर्णाहुति के बाद धुंधकारी को प्रेतयोनि से मुक्ति मिल गई।
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इस दौरान यशवीर सिंह, जय प्रकाश सिंह, केशव सिंह, ज्ञान प्रकाश सिंह, राजा आदि उपस्थित रहे।