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Siddharthnagar News: होली पर बढ़ी शराब की तस्करी... सीमा पर एजेंसियां सक्रिय
Fri, 22 Mar 2024 02:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 22 Mar 2024 02:19 AM IST
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सिद्धार्थनगर। होली को देखते हुए नेपाली शराब की खेप बाॅर्डर पार से आने लगी है। त्योहार को देखते हुए तस्कर सक्रिय हो गए हैं। कैरियरों के जरिए सीमा पार से शराब मंगवाई जा रही है। भारत में होली के दिन शराब बंदी रहती है। इस बंदी का भरपूर लाभ लेने के लिए तस्कर पहले से शराब का स्टाॅक लगाना शुरू करते हैं। पिछले एक सप्ताह के बीच एसएसबी और पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई इस बात की पुष्टि कर रही है कि बाॅर्डर पर नेपाली शराब के तस्करों का धंधा तेज हो गया है। नेपाली शराब भारतीय देसी से 20 रुपये प्रति बोतल सस्ती है।
जनपद की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगी हुई है। सीमा पूरी तरह से खुली है और दोनों देश के लोग बिना रोकटोक के आते-जाते हैं। मुख्य मार्ग पर हमेशा सुरक्षा एजेंसियां और लोकल थाने की पुलिस अलर्ट रहती है। पर खुली हुई सीमा का लाभ दोनों देशों से तस्करी करने वाले खूब उठाते हैं। तस्करी सीजन और डिमांड पर निर्भर होती है। जिस देश में जिसकी मांग बढ़ती है, उसकी तस्करी शुरू हो जाती है। होली नजदीक आते ही पिछले एक सप्ताह से तस्करी बढ़ गई है। क्योंकि पुलिस और एसएसबी कई बार शराब के साथ तस्करों को पकड़ चुके हैं।
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इस प्रकार से होती है शराब की तस्करी
बाॅर्डर पर होनी वाली शराब की तस्करी में मुख्य व्यक्ति कभी आगे नहीं आता है। वह कैरियर के जरिए सामान इस प्रकार से उस पार भेजने का कार्य करता है। शराब की तस्करी में महिलाएं और 10-15 साल के बच्चों को कैरियर के रूप में इस्तेमाल करते हैं। खुनुवां क्षेत्र के रहने वाले अल्ताफ ने बताया कि कैरियरों को दो से तीन रुपये प्रति बोतल मिलता है। बच्चे एक बार में 10 से लेकर 30 बोतल तक पार कर देते हैं। एक दिन में चार से पांच चक्कर लगा देते हैं, जिससे उनका अच्छा खासा लाभ हो सकता है। अकसर शराब को लेकर झोले में आते हैं। जिससे कोई शक न करें। बच्चों के साथ महिलाएं भी शामिल होती हैं। तस्कर उन्हें ही कैरियर बनाते हैं जो अति गरीब हैं और रुपये की अति जरूरत होती है। इसलिए वह कुछ भी करने को तैयार रहती हैं।
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एक स्थान पर होता है स्टाक, फिर बिक्री के लिए जाता है
बाॅर्डर पार से छोटे-छोटे कैरियर पूरे दिन शराब लाकर बताए हुए स्थान जैसे बाग, सीमा के पास गांव में कोई सूनसान घर या फिर किसी से तस्करों की ओर से लिए गए घर में रखा जाता है। जब प्रर्याप्त मात्रा में हो जाता है तो रेट शुरू होता है फिर अलग-अलग लोग लेकर जाते हैं और बिक्री करते हैं।
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पकड़ी गई शराब
18 मार्च को एसएसबी 43वीं वाहिनी सीमा चौकी खुनुवां की टीम ने दो महिलाओं को 250 शीशी नेपाली शराब के साथ पकड़ा। दोनों शोहरतगढ़ कस्बे की निवासी थीं। वहीं, 15 मार्च को ककरहवा की टीम ने बार्डर पार करते समय में 96 शीशी नेपाली शराब के साथ दो महिलाओं को पकड़ा। यह तो बानगी है न जाने कितने सुरक्षा एजेंसियों की आंख से बचकर बाॅर्डर पार लेकर आ जा रहे हैं।
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बाॅर्डर पर सुरक्षा एजेंसी और संबंधित थाने की पुलिस को अलर्ट किया गया है। लगातार गश्त और चेकिंग की जा रही है। पकड़े जाने वालों पर कार्रवाई भी की जा रही है।
-सिद्धार्थ, अपर पुलिस अधीक्षक
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नेपाल बाॅर्डर पर शराब सहित अन्य मादक पदार्थ की तस्करी रोकने के लिए बढ़नी और अलीगढ़वा बाॅर्डर पर आबकारी विभाग की ओर से दो अस्थाई चौकी स्थापित की गई है। चेक पोस्ट से 24 घंटे निगरानी की जा रही है।
-वीर अभिमन्यु सिंह, जिला आबकारी अधिकारी
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जनपद की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगी हुई है। सीमा पूरी तरह से खुली है और दोनों देश के लोग बिना रोकटोक के आते-जाते हैं। मुख्य मार्ग पर हमेशा सुरक्षा एजेंसियां और लोकल थाने की पुलिस अलर्ट रहती है। पर खुली हुई सीमा का लाभ दोनों देशों से तस्करी करने वाले खूब उठाते हैं। तस्करी सीजन और डिमांड पर निर्भर होती है। जिस देश में जिसकी मांग बढ़ती है, उसकी तस्करी शुरू हो जाती है। होली नजदीक आते ही पिछले एक सप्ताह से तस्करी बढ़ गई है। क्योंकि पुलिस और एसएसबी कई बार शराब के साथ तस्करों को पकड़ चुके हैं।
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इस प्रकार से होती है शराब की तस्करी
बाॅर्डर पर होनी वाली शराब की तस्करी में मुख्य व्यक्ति कभी आगे नहीं आता है। वह कैरियर के जरिए सामान इस प्रकार से उस पार भेजने का कार्य करता है। शराब की तस्करी में महिलाएं और 10-15 साल के बच्चों को कैरियर के रूप में इस्तेमाल करते हैं। खुनुवां क्षेत्र के रहने वाले अल्ताफ ने बताया कि कैरियरों को दो से तीन रुपये प्रति बोतल मिलता है। बच्चे एक बार में 10 से लेकर 30 बोतल तक पार कर देते हैं। एक दिन में चार से पांच चक्कर लगा देते हैं, जिससे उनका अच्छा खासा लाभ हो सकता है। अकसर शराब को लेकर झोले में आते हैं। जिससे कोई शक न करें। बच्चों के साथ महिलाएं भी शामिल होती हैं। तस्कर उन्हें ही कैरियर बनाते हैं जो अति गरीब हैं और रुपये की अति जरूरत होती है। इसलिए वह कुछ भी करने को तैयार रहती हैं।
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एक स्थान पर होता है स्टाक, फिर बिक्री के लिए जाता है
बाॅर्डर पार से छोटे-छोटे कैरियर पूरे दिन शराब लाकर बताए हुए स्थान जैसे बाग, सीमा के पास गांव में कोई सूनसान घर या फिर किसी से तस्करों की ओर से लिए गए घर में रखा जाता है। जब प्रर्याप्त मात्रा में हो जाता है तो रेट शुरू होता है फिर अलग-अलग लोग लेकर जाते हैं और बिक्री करते हैं।
पकड़ी गई शराब
18 मार्च को एसएसबी 43वीं वाहिनी सीमा चौकी खुनुवां की टीम ने दो महिलाओं को 250 शीशी नेपाली शराब के साथ पकड़ा। दोनों शोहरतगढ़ कस्बे की निवासी थीं। वहीं, 15 मार्च को ककरहवा की टीम ने बार्डर पार करते समय में 96 शीशी नेपाली शराब के साथ दो महिलाओं को पकड़ा। यह तो बानगी है न जाने कितने सुरक्षा एजेंसियों की आंख से बचकर बाॅर्डर पार लेकर आ जा रहे हैं।
बाॅर्डर पर सुरक्षा एजेंसी और संबंधित थाने की पुलिस को अलर्ट किया गया है। लगातार गश्त और चेकिंग की जा रही है। पकड़े जाने वालों पर कार्रवाई भी की जा रही है।
-सिद्धार्थ, अपर पुलिस अधीक्षक
नेपाल बाॅर्डर पर शराब सहित अन्य मादक पदार्थ की तस्करी रोकने के लिए बढ़नी और अलीगढ़वा बाॅर्डर पर आबकारी विभाग की ओर से दो अस्थाई चौकी स्थापित की गई है। चेक पोस्ट से 24 घंटे निगरानी की जा रही है।
-वीर अभिमन्यु सिंह, जिला आबकारी अधिकारी