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Siddharthnagar News: दहेज के लिए प्रताड़ना कर हत्या के दोषी पति व सास को उम्रकैद

Fri, 09 Feb 2024 11:07 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 09 Feb 2024 11:07 PM IST
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Life imprisonment to husband and mother-in-law found guilty of torture and murder for dowry.
सिद्धार्थनगर। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार मलिक ने दहेज उत्पीड़न व हत्या के दोषी पति व सास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसे जमा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पति राजेश खरविंद व सास मालती शोहरतगढ़ थानाक्षेत्र के सबुआ गांव के रहने वाले हैं।
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घटना शोहरतगढ़ थानाक्षेत्र के सबुआ में 31 अक्तूबर को घटी थी। बांसी थानाक्षेत्र के तिवारीपुर निवासी रामदास खरविंद ने पुलिस को तहरीर देकर कहा कि 31 अक्तूबर 2021 को 11 बजे दिन में उसके 25 वर्षीय लड़की गीता के मृत्यु की सूचना मिली। जिसकी शादी मई 2014 में उसने राजेश खरविंद निवासी सबुआ थाना शोहरतगढ़ के साथ किया था। वह सबुआ पहुंचा, तो वहां पर उसने देखा कि उसकी पुत्री गीता का शव उसके दरवाजे पर जमीन पर रखा है। पूछने पर पता चला कि उसकी लड़की गीता घर के अंदर छत में लगे कुंडे से साड़ी के फंदे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है, जब कि सत्यता यह थी कि लड़की गीता को बच्चा न होने से उसका पति राजेश तथा उसकी मां मालती बहुत प्रताड़ित करते थे।
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इसी बात से परेशान होकर उसकी लड़की गीता ने आत्महत्या कर लिया है। पुलिस ने दहेज प्रताड़ना व आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के अपराध में केस दर्ज कर लाश का पंचनामा व पोस्टमार्टम करवाया। विवेचना के बाद पुलिस ने पति व सास के खिलाफ आरोप पत्र तैयार करके न्यायालय में दाखिल किया। न्यायालय ने घटना का संज्ञान लेकर विचारण शुरू किया और आत्महत्या के उकसाने के अतिरिक्त हत्या के अपराध का आरोप भी बनाया। विचारण की समाप्ति पर न्यायालय ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर पत्रावली का अवलोकन किया। विचारण के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों की गवाही, जिरह, पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य सुसंगत दस्तावेजी साक्ष्यों एवं घटना के तथ्यों व परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए पति व सास को दहेज प्रताड़ना व हत्या का दोषी ठहराते हुए कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने दोनों को आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध से दोषमुक्त कर दिया। पीड़ित पक्ष की पैरवी राज्य सरकार की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता अखिलेश नारायण श्रीवास्तव ने किया।
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