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प्रसूता का ऑपरेशन करके दो घंटे में छोड़ा, गंभीर
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प्रसूता का ऑपरेशन करके दो घंटे में छोड़ा, गंभीर
- बेंवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का मामला, दो बार लगाना पड़ा टांका
- परिजनों ने सीएमओ को शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
डुमरियागंज/बेवां। स्वास्थ्य मंत्री के गृह जनपद में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। बेवां सीएचसी में एक गर्भवती महिला के परिजनों ने डिलीवरी कराने के नाम पर स्टॉफ नर्स द्वारा पांच हजार लेने और प्रसव के कुछ घंटे बाद ही डिस्चार्ज करने का आरोप लगाया। अपूर्ण इलाज मिलने के कारण प्रसूता की हालत बिगड़ गई। परिजनों ने सीएमओ को शिकायती पत्र भेजकर मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हटवा गांव निवासी सरिता पत्नी हरिप्रकाश को तीन मार्च की दोपहर में प्रसव पीड़ा हुई। इसके बाद आशा वर्कर पूनम श्रीवास्तव के साथ उसकी मां गुजराती, भाई रामप्रकाश, कैलाशपति और आरती उसे लेकर बेवां सीएचसी पहुंचे। यहां मौजूद स्टाफ नर्स राधा ने छोटा ऑपरेशन (इपी जियोटामी) करने की बात कही। ऑपरेशन के बाद बच्ची पैदा हुई। आरोप है कि प्रसव के बाद स्टाफ नर्स ने पांच हजार रुपये की मांग की। तीमारदारों ने पैसा दे भी दिया। जिसके बाद प्रसूता सरिता को अस्पताल में रखने के बजाए कुछ घंटे बाद ही उसे घर भेज दिया गया। मगर दो दिन बाद टांका लगाने में लापरवाही के चलते पक जाने पर सरिता की हालत बिगड़ गई। जिसके बाद परिजन उसे पांच मार्च को दोबारा सीएससी पर लाए। जहां फिर से इलाज कर उसे घर भेज दिया गया। मगर उसके बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ। जिसके बाद परिजन उसे प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए ले गए। वहां से वापस लौटने पर बुधवार को दोबारा अस्पताल पहुंचकर आपबीती बताई तो स्टाफ नर्स ने कोई भी जिम्मेदारी लेने से इंकार कर दिया और कहा कि किसी दूसरी जगह जाकर मरीज को दिखाओ। पीड़िता व उसके परिजनों ने मामले में कार्रवाई की मांग की है। वहीं, स्टाफ नर्स राधा ने आरोप को निराधार बताया है। इस संबंध में अधीक्षक डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि अभी मामला संज्ञान में नहीं है। मामले की जानकारी की जाएगी। गलती होने पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- बेंवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का मामला, दो बार लगाना पड़ा टांका
- परिजनों ने सीएमओ को शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
डुमरियागंज/बेवां। स्वास्थ्य मंत्री के गृह जनपद में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। बेवां सीएचसी में एक गर्भवती महिला के परिजनों ने डिलीवरी कराने के नाम पर स्टॉफ नर्स द्वारा पांच हजार लेने और प्रसव के कुछ घंटे बाद ही डिस्चार्ज करने का आरोप लगाया। अपूर्ण इलाज मिलने के कारण प्रसूता की हालत बिगड़ गई। परिजनों ने सीएमओ को शिकायती पत्र भेजकर मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हटवा गांव निवासी सरिता पत्नी हरिप्रकाश को तीन मार्च की दोपहर में प्रसव पीड़ा हुई। इसके बाद आशा वर्कर पूनम श्रीवास्तव के साथ उसकी मां गुजराती, भाई रामप्रकाश, कैलाशपति और आरती उसे लेकर बेवां सीएचसी पहुंचे। यहां मौजूद स्टाफ नर्स राधा ने छोटा ऑपरेशन (इपी जियोटामी) करने की बात कही। ऑपरेशन के बाद बच्ची पैदा हुई। आरोप है कि प्रसव के बाद स्टाफ नर्स ने पांच हजार रुपये की मांग की। तीमारदारों ने पैसा दे भी दिया। जिसके बाद प्रसूता सरिता को अस्पताल में रखने के बजाए कुछ घंटे बाद ही उसे घर भेज दिया गया। मगर दो दिन बाद टांका लगाने में लापरवाही के चलते पक जाने पर सरिता की हालत बिगड़ गई। जिसके बाद परिजन उसे पांच मार्च को दोबारा सीएससी पर लाए। जहां फिर से इलाज कर उसे घर भेज दिया गया। मगर उसके बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ। जिसके बाद परिजन उसे प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए ले गए। वहां से वापस लौटने पर बुधवार को दोबारा अस्पताल पहुंचकर आपबीती बताई तो स्टाफ नर्स ने कोई भी जिम्मेदारी लेने से इंकार कर दिया और कहा कि किसी दूसरी जगह जाकर मरीज को दिखाओ। पीड़िता व उसके परिजनों ने मामले में कार्रवाई की मांग की है। वहीं, स्टाफ नर्स राधा ने आरोप को निराधार बताया है। इस संबंध में अधीक्षक डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि अभी मामला संज्ञान में नहीं है। मामले की जानकारी की जाएगी। गलती होने पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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