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जर्जर ककरहीं पुल से हो रहा आवागमन
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 18 Feb 2017 10:47 PM IST
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नौगढ़-बांसी मार्ग पर स्थित ककरहीं का टूटा पुल।
- फोटो : अमर उजाला
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जोगिया। नौगढ़ तहसील क्षेत्र के बूढ़ी राप्ती नदी के ककरही पुल को लगभग 10 माह पहले जर्जर घोषित करते हुए बड़े वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। मगर अभी भी बड़े वाहनों की आवाजाही नहीं रूकी है। जिससे हमेशा बड़ा हादसा होने का भय बना हुआ है, लेकिन रोक लगाने वाले जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। बस्ती में कुआनो नदी पर निर्मित पुल ढहने के बाद इस पुल को लेकर भी लोगों में भय गहराने लगा है।
बूढ़ी राप्ती नदी पर ककरही घाट के पुल का एक हिस्सा लगभग 10 माह पहले धंस गया था। हादसे के भय से आनन-फानन में वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। यह सिलसिला कुछ ही दिनों तक चला। बाद में क्षतिग्रस्त हिस्से की घेरेबंदी करते हुए आवागमन चालू हो गया। बिना हादसे के भय के बड़े-बड़े वाहन पुल को पार कर रहे हैं जो कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। बता दें कि इस पुल का एक हिस्सा कुछ वर्ष पहले भी टूटा था गनिमत रहा कि कोई हादसा नहीं हुआ था। पुल से आवाजाही लगभग चार माह तक ठप रही।
तब लोगों को आस्थाई पुल से नदी पार करना पड़ता था। छोटे वाहनों पर भी रोक लगा दी गई थी। अगर प्रशासन जल्द सक्रिय नहीं हुआ तो बस्ती जिले के कुआनो नदी पर पुल टूटने की घटना दोहरा सकता है। इस संबंध में जोगिया एसओ शमशेर बहादुर सिंह का कहना था कि पुल क्षतिग्रस्त होने से कुछ दिनों तक आवागमन रोका गया था। बाद में कंपनी की रिपोर्ट के आधार पर आवागमन शुरू हो गया था।
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बूढ़ी राप्ती नदी पर ककरही घाट के पुल का एक हिस्सा लगभग 10 माह पहले धंस गया था। हादसे के भय से आनन-फानन में वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। यह सिलसिला कुछ ही दिनों तक चला। बाद में क्षतिग्रस्त हिस्से की घेरेबंदी करते हुए आवागमन चालू हो गया। बिना हादसे के भय के बड़े-बड़े वाहन पुल को पार कर रहे हैं जो कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। बता दें कि इस पुल का एक हिस्सा कुछ वर्ष पहले भी टूटा था गनिमत रहा कि कोई हादसा नहीं हुआ था। पुल से आवाजाही लगभग चार माह तक ठप रही।
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तब लोगों को आस्थाई पुल से नदी पार करना पड़ता था। छोटे वाहनों पर भी रोक लगा दी गई थी। अगर प्रशासन जल्द सक्रिय नहीं हुआ तो बस्ती जिले के कुआनो नदी पर पुल टूटने की घटना दोहरा सकता है। इस संबंध में जोगिया एसओ शमशेर बहादुर सिंह का कहना था कि पुल क्षतिग्रस्त होने से कुछ दिनों तक आवागमन रोका गया था। बाद में कंपनी की रिपोर्ट के आधार पर आवागमन शुरू हो गया था।
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