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Siddharthnagar News: रमजान के पहले अशरे में रोजेदारों पर हो रही है रहमत की बारिश

Fri, 22 Mar 2024 01:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 22 Mar 2024 01:15 AM IST
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It is raining blessings on the fasting people in the first Ashra of Ramadan.
डुमरियागंज। रमजान का महीना रहमतों बरकतों व मगफिरत का है। तीस दिन तक चलने वाले मुकद्दस पवित्र रमजान महीने को तीन अशरो यानी भागों में बांटा गया है। हर अशरे का फजीलत अपना विशेष महत्व है। इस दौरान मस्जिदों से लेकर घरों तक खूब इबादत की जाती है, जिससे अल्लाह को खुश किया जा सके।
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रमजान महीने को अल्लाह ताला ने काफी फजीलत बख्श रखी है। उसने अपने बंदों के लिए इस महीने में बेशुमार इनाम का इंतजाम करते हुए पूरे महीने को तीन अशरे में बांट दिया है। हर एक अशरा दस दिनों का होता है। पहला अशरा रहमत और दूसरा बरकत और तीसरा मगफरत का होता है। पहला अशरा जो अब बृहस्पतिवार से खत्म होने वाला है। जिसमें रोजेदारों पर अल्लाह की तरफ से रहमत की भरपूर बारिश हो रही है। हर कोई अल्लाह की इबादत में शिद्दत से जुटा हुआ है।
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जामा मस्जिद हल्लौर के पेश इमाम मौलाना वासिफ रजा ने रमजान के पहले अशरे की रहमत की फजीलत को बताते हुए कहा कि इस दौरान अल्लाह ताला ने अपने बंदों पर बेशुमार रहमतों को नाजिल फरमाता है। वह बंदों को रोजा रखने और इबादत के बदले सारे ख्वाहिशों को पूरा करने का काम करता है। इस दौरान जितनी भी इबादत की जाए और अल्लाह से दुआएं मांगी जाए तो उसे अल्लाह जरूर पूरा करता है।
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दूसरे अशरा बरकत के बारे में सुन्नी जामा मस्जिद डुमरियागंज के पेश इमाम मौलाना एहसानुल्लाह कासमी कहते हैं कि रमजान का महीना सिर्फ भूखे प्यासे रहने का नहीं होता है। अल्लाह ताला दूसरे अशरे में बंदों को बेहिसाब बरकत से नवाजता है। लोगों के कारोबार में बरकत देता है। इस महीने मैं आम दिनों के मुकाबले खर्च बढ़ जाने के बावजूद अल्लाह की रहमत से रोजगार में बरकत का सिलसिला बढ़ जाता है। मौलाना तनवीर ने बताया कि रमजान का तीसरा और आखिरी अशरा जो 21 से 30 रमजान तक चलता है वह मगफरत गुनाहों से निजात पाने का होता है। इस अशरे में भी खूब इबादत की जाती है।
लोगों के गुनाहों को अल्लाह पाक माफ फरमाने का काम करता हैं। जाकिर, अहलेबैत अजीम हैदर रिजवी ने कहा कि आखरी अशरा में रोकर यानी विनती करके गुनाहों से निजात के लिए अल्लाह से दुआ मांगी जाए तो उसे अल्लाह कुबूल फरमाता है। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना इस्लाम के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इसी महीने कुरआन पाक नाजिल हुई थी। लोगों को चाहिए कि वह ज्यादा से ज्यादा वक्त अल्लाह की इबादत में गुजारे जिससे उसकी रहमत, बरकत और मगफरत हासिल हो सके।


इस्लाम में पांच चीजें हैं फर्ज

इस्लाम धर्म में पांच चीजों को फर्ज किया गया है। इसमें नमाज, रोजा, तौहीद, जकात और हज शामिल है। इन पांचों फर्ज की अदायगी करना हर मुसलमान के लिए जरूरी होता है।
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