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Siddharthnagar News: भारतीय ज्ञान परंपरा में बुद्ध के दर्शन का प्रभाव

Fri, 04 Apr 2025 03:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 04 Apr 2025 03:00 AM IST
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Influence of Buddha's philosophy on the Indian wisdom tradition
लुंबिनी बुद्धिस्ट विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो कविता शाह का स्वागत करते लुंबिनी बुद्धिस्ट के क
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। लुंबनी बुद्धिस्ट विश्वविद्यालय, नेपाल में आयोजित ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट फॉर फोर्थ इंडस्ट्रियल रेवोलुशन विषयक दो दिवसीय कुलपति सम्मेलन में सिविवि की कुलपति प्रो. कविता शाह ने विचार व्यक्त किए। सम्मेलन में भारत, नेपाल व जापान से आए एक दर्जन से अधिक कुलपतियों ने भाग लिया।
प्रो. कविता शाह ने उद्घाटन कहा कि वर्तमान औद्योगिक परिदृश्य में नैतिकता और कौशल से युक्त उद्योग-उन्मुख स्नातकों की आवश्यकता है। उन्होंने लुंबनी बुद्धिस्ट विश्वविद्यालय और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के बीच हुए समझौते के तहत बुद्ध दर्शन के सभी आयामों को आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप समझने और उन्हें शैक्षणिक पाठ्यक्रम में समाहित करने पर जोर दिया।
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उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि दोनों विश्वविद्यालय मिलकर ऐसे कार्यक्रमों पर कार्य करें। जो विद्यार्थियों को न केवल तकनीकी रूप से दक्ष बनाएं, बल्कि उन्हें नैतिकता और मानवीय मूल्यों से भी जोड़ें। कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है। जहां बुद्ध के दर्शन का प्रभाव न हो।
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इसलिए विभिन्न आयामों को स्नातक एवं परास्नातक स्तर पर पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी इस ज्ञान को आत्मसात कर व्यावसायिक और सामाजिक जीवन में इसे लागू कर सकें।
विशेष सत्र में कुलपति प्रो. कविता शाह ने इंटरनेशनलाइजेसन ऑफ बुद्धिस्ट विजडम इन हायर एजुकेशन विषय पर कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में बौद्ध दर्शन और ज्ञान का अंतरराष्ट्रीयकरण बहुत ही महत्वपूर्ण कदम के रूप में उभर रहा है। बौद्ध शिक्षाएं जो शांति सहिष्णुता और सतत विकास को बढ़ावा देती हैं, आज वैश्विक स्तर पर शैक्षिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए प्रेरणा स्रोत बन रही है। पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने में बौद्ध दर्शन का मध्यम मार्ग एक संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करता है।

भविष्य में वैश्विक शिक्षा नीतियों में बौद्ध ज्ञान को समाहित कर एक अधिक समावेशी और सामंजस्यपूर्ण विश्व समाज का निर्माण संभव हो सकेगा। इस सम्मेलन की अध्यक्षता लुंबनी बुद्धिस्ट विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुवर्ण लाल बाज्राचार्य ने की। इसकी जानकारी सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने दी है।
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