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Siddharthnagar News: अवैध अस्पताल में ऑपरेशन के बाद बच्चा की मौत, जच्चा गंभीर

Wed, 01 Nov 2023 12:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Wed, 01 Nov 2023 12:07 AM IST
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infant died mother critical after operation in invalid hospital
फोटो- है
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शहर के लाइफ हॉस्टिपल को जिलाधिकारी के आदेश पर किया गया सील, टीम गठित करके की जाएगी जांच
विकास भवन से 200 मीटर दूर चल रहा था अवैध अस्पताल



आशा और एक युवक पर अवैध अस्पताल में भर्ती कराने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। विकास भवन से महज दो सौ मीटर की दूरी पर अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पताल में ऑपरेशन के बाद बच्चे ने दम तोड़ दिया। जबकि मां की हालत नाजुक है।
मामले की शिकायत जोगिया कोतवाली क्षेत्र के कपिया मिश्र गांव निवासी पीड़ित ने जिलाधिकारी से की तो स्वास्थ्य महकमे की टीम अस्पताल पर छापा मारने के लिए धमक पड़ी। तब तक अस्पताल संचालिका को भनक लगी और उसने तत्काल भर्ती मरीजों को इधर-उधर कर दिया। वहीं, शिकायतकर्ता की बहू को एक निजी अस्पताल में भेज दिया, जहां देखते ही संचालक ने भर्ती करने से मना करते हुए जिला अस्पताल भेजा। लगभग तीन घंटे चले हंगामे के बीच एसडीएम सदर और सीएमओ की मौजूदगी में अस्पताल को सील कर दिया गया। साथ ही टीम गठित करके अस्पताल संचालन में शामिल लोगों की जांच करके केस दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।
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जोगिया कोतवाली क्षेत्र के कपिया मिश्र गांव निवासी परशुराम के मुताबिक, उनकी बहू कुसुम (22) पत्नी सुग्रीव का प्रसव होना था। वह उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ ले गए, जहां से जिला अस्पताल में प्रसव कराने के लिए भेजा गया। जिला अस्पताल के चिकित्सक ने स्थिति गंभीर देखकर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। वहां जाने के लिए रुपये का इंतजाम कर रहा थे कि तभी आशा मीरा देवी व संतोष नाम का युवक मुझे बिना बताए परसा शाह आलम में संचालित होने वाले लाइफ हॉस्पिटल लेकर चल गए। उसमें भर्ती कर दिए और बिना मुझे बताए ही 27 अक्तूबर को अस्पताल के लोगों ने ऑपरेशन कर दिया। इससे बच्चे की मौत हो गई।
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देखा गया तो बच्चे का शरीर काला पड़ा हुआ था। इसमें इनकी घोर लापरवाही थी। दवा और ऑपरेशन के नाम पर 63 हजार रुपये बिल वसूला गया। उल्टी-सीधी दवा देने के कारण बहू की मानसिक स्थिति भी बिगड़ गई और वह गंभीर बीमार हो गई। इसमें अस्पताल संचालक और डॉक्टर की घोर लापरवाही है। इस मामले में पीड़ित ने सुबह जैसे ही जिलाधिकारी से मिलकर शिकायत की। उनके निर्देश पर दो डिप्टी सीएमओ, सीएमओ और एसडीएम सदर मौके पर पहुंचे। जांच में अवैध रूप से संचालित होने वाले अस्पताल को सील कर दिया।


तीन घंटे चला हंगामा, फिर हो पाई कार्रवाई

जिलाधिकारी के आदेश मिलते ही दो डिप्टी सीएमओ, सदर पुलिस की टीम के साथ तकरीबन 11 बजे विकास भवन और कलक्ट्रेट के बीच से होकर परसा शाह आलम गांव में जाने वाले लगभग 200 मीटर दूरी पर स्थित अस्पताल में पहुंच गए।
पुलिस और डिप्टी सीएमओ डॉ. डीके चौधरी और डॉ. संजय गुप्ता ने अस्पताल में जाने की कोशिश की तो वहां मौजूद एक लड़की, जो संचालिका की बेटी बताई जा रही है, उसने रोक दिया। कहा कि किसी को अंंदर नहीं आना है। गेट पर अंदर से ताला जड़कर खड़ी रही। कई बार कोशिश के बाद भी अंदर जाने में सफलता नहीं मिली। इसके बाद एसडीएम को जानकारी दी। बीच में सीएमओ नरेंद्र वाजपेयी पहुंचे। उन्होंने दो बार गेट खुलवाने का प्रयास किया पर लड़की के आगे विवश होकर पीछे हट गए।
तकरीबन सवा एक बजे एसडीएम सदर डॉ. ललित कुमार मिश्र और शहर कोतवाल सतीश कुमार सिंह पहुंचे। एसडीएम ने गेट खोलने के लिए कहा तो लड़की ने मनाकर दिया। महिला सिपाही को आगे भेजा, लेकिन लड़की का अड़ियल रुख देखकर वह भी पीछे हट गई। एसडीएम ने तल्ख भाषा में गेट तोड़ देने की बात कही। इसके बाद उसने गेट खोला। फिर एक-एक कमरे का ताला तोड़कर देखा गया। मरीज नहीं मिले। इसके बाद अस्पताल को सील कर दिया गया।



शिकायत की लग गई थी भनक, हटा दिए गए थे मरीज
जिलाधिकारी से शिकायत की भनक अस्पताल संचालिका को लग गई थी। इसलिए वह भर्ती मरीजों को पहले ही अन्यत्र भेज चुकी थी। अस्पताल के तीन कमरों में कई बेड मिले। कमरे में ताला, ब्रेड और बिस्कुट के खुले पैकेट मिले। साथ ही बेड की चादर बेतरतीब थी। मरीज के सामान पड़े थे। इससे यह प्रतीत हो रहा था कि मरीज को आनन-फानन हटाया गया। वहीं, ओटी में ऑपरेशन करने वाले लगभग सभी उपकरण पाए गए।


आखिर कौन है वह खाकी वाला

आसपास के लोगों में चर्चा थी कि एक खाकी वाले का यहां अक्सर आना-जाना रहता है। वह सदर थाने का सिपाही बताया जा रहा है। पीड़ित की ओर से अस्पताल की शिकायत किए जाने की जानकारी मिलते ही वह पहुंच गया था। छापा पड़ने से पहले भर्ती मरीजों को अन्य स्थानों पर भेजवाने में उसी ने पूरी मदद की। इस बात की चर्चा होती रही है।



पहुंचे थे टांका कटवाने, पता चला अस्पताल सील

सदर थाना क्षेत्र के जगदीशपुर निवासी अंकिता भीड़ के बीच लाइफ अस्पताल पहुंची तो भीड़ देखकर हैरान हो गई। डिप्टी सीएमओ डॉक्टर संजय गुप्ता के पूछने पर उसने बताया कि सात अक्तूबर को छोटा ऑपरेशन से बच्चा हुआ था। उसे मंगलवार को टांका कटवाने के लिए बुलाया गया था। डिप्टी सीएमओ ने जिला अस्पताल भेजा।



अस्पताल सील हो गया, अब कहां जाएं

महराजगंज जनपद के बृजमनगंज थाना क्षेत्र के बेलसड़ गांव निवासी रघुनाथ की पत्नी खुशबू काे बड़ा ऑपरेशन से बच्चा हुआ था। रघुनाथ ने बताया कि जिला अस्पताल गए थे। वहां एक महिला स्वास्थ्यकर्मी ने गंभीर बताकर लाइफ अस्पताल भेज दिया। यहां पर ऑपरेशन से बच्चा हुआ था। मंगलवार को टांका कटवाने आए थे। अस्पताल सील हो गया, अब कहां जाएं। इस पर सीएमओ डॉ. नरेंद्र वाजपेयी ने जिला अस्पताल भेजा और कहा कि बोल देना कि सीएमओ भेजे हैं। तत्काल टांका कट जाएगा, घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बाद वह युवक पत्नी को लेकर गया।



गए थे नाश्ता करने पहुंचे तो मरीज ही लापता

भीड़ के बीच दो लोग ऐसे पहुंचे जो यह कहते हुए दिखे कि उनका मरीज गायब हो गया। उनका कहना था कि मरीज को देखने के बाद ही नाश्ता करने निकले थे। अब लौटे तो अस्पताल ही बंद हो गया है। इसी बीच एक लड़के ने संपर्क करके उन्हें मरीजों के पास भेजा। बताया कि मरीज जिला अस्पताल गए हैं।



डॉक्टर का बोर्ड न अन्य सुविधाएं

हाॅस्पिटल में कई प्रकार की खामियां नजर आईं। यहां पर पार्किंग में आग से बचाव के इंतजाम न होने के साथ ही कौन चिकित्सक ऑपरेशन करने के लिए आता है। कौन बेहोशी का डॉक्टर है। ऐसी कोई जानकारी हॉस्पिटल में नहीं मिली है।



कोट

मामले की जानकारी मिलने पर मौके पर गए थे। अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पताल को सील करा दिया गया। साथ ही निर्देश दिए हैं कि इसकी जांच की जाए और शामिल लोगों पर कार्रवाई की जाए।


-डॉ. ललित कुमार मिश्र, एसडीएम सदर

कोट
हाॅस्पिटल की जांच के लिए नोडल और नौगढ़ पीएचसी अधीक्षक सहित तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।

-डॉ. नरेंद्र वाजपेयी, सीएमओ
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