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भारत-चीन को करना चाहिए आपसी सहयोग
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भारत-चीन को करना चाहिए आपसी सहयोग
-बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय की ओर से आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने व्यक्त किए विचार
सिद्धार्थनगर। भारत और चीन दुनिया के दो प्राचीन संस्कृति, बड़ी आबादी वाले देश हैं, आज वैश्वीकरण के दौर में पर्यावरण, आतंकवाद, नक्सलवाद जैसी अनेक ऐसी चुनौतियां है, जिसमें भारत और चीन को आपसी सहयोग करना चाहिए। बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय नौगढ़ सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में भारत-चीन संबंध पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन शुक्रवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रति कुलपति प्रो. हरि शरण ने ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि भारत-चीन के संबंधों को सुधरने में दोनों देशों का हित शामिल है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन के प्रो. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि भारत के अंदरूनी आंतरिक संकट और खतरे में चीन की सशक्त भूमिका रही है, ऐसे में हम चीन पर पूरी तरह विश्वास नहीं कर सकते। प्रो. श्रीनिवास मणि त्रिपाठी ने भारत चीन संबंधों पर आज के परिवेश में चुनौतियां को रेखांकित किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य अभय श्रीवास्तव की देखरेख में संगोष्ठी हुई।
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. अश्वनी कुमार मिश्रा, सीतामढ़ी से आए देवेंद्र प्रताप तिवारी,
रोहतक से आए रविंद्र डॉ. रविंद्र कुमार ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर विचार व्यक्त किए।
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-बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय की ओर से आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने व्यक्त किए विचार
सिद्धार्थनगर। भारत और चीन दुनिया के दो प्राचीन संस्कृति, बड़ी आबादी वाले देश हैं, आज वैश्वीकरण के दौर में पर्यावरण, आतंकवाद, नक्सलवाद जैसी अनेक ऐसी चुनौतियां है, जिसमें भारत और चीन को आपसी सहयोग करना चाहिए। बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय नौगढ़ सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में भारत-चीन संबंध पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन शुक्रवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रति कुलपति प्रो. हरि शरण ने ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि भारत-चीन के संबंधों को सुधरने में दोनों देशों का हित शामिल है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन के प्रो. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि भारत के अंदरूनी आंतरिक संकट और खतरे में चीन की सशक्त भूमिका रही है, ऐसे में हम चीन पर पूरी तरह विश्वास नहीं कर सकते। प्रो. श्रीनिवास मणि त्रिपाठी ने भारत चीन संबंधों पर आज के परिवेश में चुनौतियां को रेखांकित किया।
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महाविद्यालय के प्राचार्य अभय श्रीवास्तव की देखरेख में संगोष्ठी हुई।
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. अश्वनी कुमार मिश्रा, सीतामढ़ी से आए देवेंद्र प्रताप तिवारी,
रोहतक से आए रविंद्र डॉ. रविंद्र कुमार ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर विचार व्यक्त किए।