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Siddharthnagar News: सरकार की मदद की बढ़ी निगरानी
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सीएमओ कार्यालय। संवाद
श्याम सुंदर तिवारी
सिद्धार्थनगर। अब सरकारी अस्पताल में डिलीवरी कराने वाली महिलाओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में फर्जीवाड़ा नहीं होगा। लाभार्थियों को रुपये भेजने में शिथिलता और भुगतान में फर्जीवाड़ा करने वाले पकड़े जाएंगे। प्रोत्साहन राशि के भुगतान में गड़बड़ी पर लगाम लगाने के लिए कड़ी मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है।
हर वर्ष प्रोत्साहन राशि के रूप में होने वाली लगभग 35 हजार से अधिक लाभार्थियों के लगभग 40 करोड़ की राशि पर शासन की नजर रहेगी। पांच स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग की जाएगी।
जनपद स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इसमें अगर प्रसूता को लाभ नहीं मिला है तो क्यों नहीं मिला। इसकी सीधे आशा वर्कर से वार्ता और जवाबदेही तय की जाएगी। मंत्र एप के जरिए इसकी निगरानी होगी। सीएम और डीएम डैसबोर्ड पर भी पारदर्शिता होगी। इसकी वह समीक्षा करेंगे।
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इस व्यवस्था के लागू होने से प्रसूताओं को समय से धनराशि मिलेगी, जिससे उन्हें मशक्कत करना पड़ता था। वहीं, गलत तरीके से लाभ पहुंचाने वालों की बाजार बंद होगी।
इस प्रकार से होगी मॉनिटरिंग : सीएचसी, पीएचसी और मेडिकल कॉलेज में होने वाली डिलीवरी का हर दिन डाटा अपडेट किया जाता है।
अब आशा वर्कर को इसी पर प्रोत्साहन राशि के बारे में अपडेट करना होगा। इसके बाद सीएमओ कार्यालय से कॉल करके लाभार्थी से पूछा जाएगा। वहीं, अगर दो से तीन दिन के बाद पेंडिंग है तो क्याें पेंडिंग है, इसके बारे में आशा वर्कर से जवाब मांगा जाएगा।
अगर आधार बैंक खाता में गड़बड़ी है तो संबंधित से वार्ता करके उसे सही करवाकर भुगतान करवाया जाएगा। इसमें ब्लॉक, जिला, मंडल और मुख्यालय स्तर से भुगतान देखा सकेगा। साथ ही सीएम और डीएम डैसबोर्ड से जोड़ा गया है, जिसके बारे में वह स्वयं देख सकेंगे।
कहने के लिए छोटी राशि, करोड़ों का भुगतान: कहने के लिए 1400 और शहरी क्षेत्र की महिलाओं को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि है। लेकिन आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो हैरान हो जाएंगे। वर्ष 2024 में 36280 डिलीवरी हुई है। अगर राशि के भुगतान पर नजर डालेंगे तो यह राशि लगभग 40 करोड़ के आसपास होगी। राशि बड़ी है, इसलिए उसकी मानिटरिंग की जाएगी, जिससे गड़बड़ी न होने पाएगा। वहीं,2023 में डिलिवरी की बात करें तो 34707 लोगों की डिलीवरी हुई है। इधर डिलिवरी का डाटा अपडेट किया जा रहा है।
इसलिए शुरू की गई व्यवस्था: स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक प्रदेश के कई जनपदों में पूर्व में मामले सामने आए, जहां पर एक ही महिला के नाम से कई बार भुगतान कर देने, बिना डिलीवरी वाली महिलाओं के भुगतान किए जाने की बात सामने आ चुकी है।
इन मामलों में सामने आने के बाद शासन ने इसमें बदलाव करते हुए फर्जीवाड़ा रोकने और सही व्यक्ति तक लाभ पहुंचे, इस पर जोर दिया है।
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सिद्धार्थनगर। अब सरकारी अस्पताल में डिलीवरी कराने वाली महिलाओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में फर्जीवाड़ा नहीं होगा। लाभार्थियों को रुपये भेजने में शिथिलता और भुगतान में फर्जीवाड़ा करने वाले पकड़े जाएंगे। प्रोत्साहन राशि के भुगतान में गड़बड़ी पर लगाम लगाने के लिए कड़ी मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है।
हर वर्ष प्रोत्साहन राशि के रूप में होने वाली लगभग 35 हजार से अधिक लाभार्थियों के लगभग 40 करोड़ की राशि पर शासन की नजर रहेगी। पांच स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग की जाएगी।
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जनपद स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इसमें अगर प्रसूता को लाभ नहीं मिला है तो क्यों नहीं मिला। इसकी सीधे आशा वर्कर से वार्ता और जवाबदेही तय की जाएगी। मंत्र एप के जरिए इसकी निगरानी होगी। सीएम और डीएम डैसबोर्ड पर भी पारदर्शिता होगी। इसकी वह समीक्षा करेंगे।
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इस व्यवस्था के लागू होने से प्रसूताओं को समय से धनराशि मिलेगी, जिससे उन्हें मशक्कत करना पड़ता था। वहीं, गलत तरीके से लाभ पहुंचाने वालों की बाजार बंद होगी।
इस प्रकार से होगी मॉनिटरिंग : सीएचसी, पीएचसी और मेडिकल कॉलेज में होने वाली डिलीवरी का हर दिन डाटा अपडेट किया जाता है।
अब आशा वर्कर को इसी पर प्रोत्साहन राशि के बारे में अपडेट करना होगा। इसके बाद सीएमओ कार्यालय से कॉल करके लाभार्थी से पूछा जाएगा। वहीं, अगर दो से तीन दिन के बाद पेंडिंग है तो क्याें पेंडिंग है, इसके बारे में आशा वर्कर से जवाब मांगा जाएगा।
अगर आधार बैंक खाता में गड़बड़ी है तो संबंधित से वार्ता करके उसे सही करवाकर भुगतान करवाया जाएगा। इसमें ब्लॉक, जिला, मंडल और मुख्यालय स्तर से भुगतान देखा सकेगा। साथ ही सीएम और डीएम डैसबोर्ड से जोड़ा गया है, जिसके बारे में वह स्वयं देख सकेंगे।
कहने के लिए छोटी राशि, करोड़ों का भुगतान: कहने के लिए 1400 और शहरी क्षेत्र की महिलाओं को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि है। लेकिन आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो हैरान हो जाएंगे। वर्ष 2024 में 36280 डिलीवरी हुई है। अगर राशि के भुगतान पर नजर डालेंगे तो यह राशि लगभग 40 करोड़ के आसपास होगी। राशि बड़ी है, इसलिए उसकी मानिटरिंग की जाएगी, जिससे गड़बड़ी न होने पाएगा। वहीं,2023 में डिलिवरी की बात करें तो 34707 लोगों की डिलीवरी हुई है। इधर डिलिवरी का डाटा अपडेट किया जा रहा है।
इसलिए शुरू की गई व्यवस्था: स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक प्रदेश के कई जनपदों में पूर्व में मामले सामने आए, जहां पर एक ही महिला के नाम से कई बार भुगतान कर देने, बिना डिलीवरी वाली महिलाओं के भुगतान किए जाने की बात सामने आ चुकी है।
इन मामलों में सामने आने के बाद शासन ने इसमें बदलाव करते हुए फर्जीवाड़ा रोकने और सही व्यक्ति तक लाभ पहुंचे, इस पर जोर दिया है।
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