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इमाम हुसैन ने शहीद होकर इस्लाम को दी जिंदगी : मौलाना मोहसिन
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डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर में मजलिस को संबोधित करते मौलाना मोहम्मद मोहसिन। संवाद
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हल्लौर में आयोजित मजलिस को फैजाबाद से आए मौलाना मोहम्मद मोहसिन ने किया संबोधित
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित वक्फ शाह आलमगीर सानी में आयोजित मजलिस के नौंवे दिन शनिवार रात फैजाबाद से आए वसीका अरबी काॅलेज के प्रिंसिपल मौलाना मोहम्मद मोहसिन ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अपने नाना हजरत मोहम्मद साहब के दीन ए इस्लाम को मिटने से बचाने के लिए कर्बला के मैदान में अपनी और अपने कुनबे की जान की कुर्बानी देकर इस्लाम को जिंदगी दे दी। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला वालों के पैगाम से लोगों को रूबरू कराया। मजलिस में भारी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
मौलाना ने कहा कि अहले बैत की जिंदगी और किरदार पर गौर करिए, जिससे हमें पता चलता है कि उन्होंने कभी बुरे लोगो से नफरत नही की, हमेशा बुराई से नफरत की है, तुम बुराई छोड़ दो तुम्हारे साथ कोई एतराज नहीं है। आज के दौर में हमारे लिए ये पैगाम है देखो जो बुरे लोग हैं, उनसे नफरत न करना, जो उनमें बुराई है, उससे नफरत करना।
मौलाना ने कहा कि आज दुनिया में अगर हक परस्ती, इंसाफ और सच्चाई, मानवता जिंदा है तो वह हजरत इमाम हुसैन और कर्बला वालों की देन है। मजलिस के आखिर में मौलाना ने हजरत इमाम हसन अलैहिस्सलाम के शहादत को बयान किया तो हर कोई दहाड़े मारकर रोने लगा। मजलिस से पहले मर्सियाख्वानी शाहिद आलम और उनके सहयोगी ने की।
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इस दौरान अंजुमन के सदर डॉ वजाहत हुसैन, काजिम रजा, तशबीब हसन, मौलाना शारिब, अलमदार हुसैन, आले रजा, इमाम हैदर, अफसर मेंहदी, इंतेजार हुसैन, शहनवाज हुसैन, जैगम, सोजफ, सनी, मार्शल, सलमान, इं मोहम्मद मेहदी, तसकीन, फहीम, ताकीब रिजवी और दरयाफ्त हुसैन आदि मौजूद थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित वक्फ शाह आलमगीर सानी में आयोजित मजलिस के नौंवे दिन शनिवार रात फैजाबाद से आए वसीका अरबी काॅलेज के प्रिंसिपल मौलाना मोहम्मद मोहसिन ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अपने नाना हजरत मोहम्मद साहब के दीन ए इस्लाम को मिटने से बचाने के लिए कर्बला के मैदान में अपनी और अपने कुनबे की जान की कुर्बानी देकर इस्लाम को जिंदगी दे दी। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला वालों के पैगाम से लोगों को रूबरू कराया। मजलिस में भारी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
मौलाना ने कहा कि अहले बैत की जिंदगी और किरदार पर गौर करिए, जिससे हमें पता चलता है कि उन्होंने कभी बुरे लोगो से नफरत नही की, हमेशा बुराई से नफरत की है, तुम बुराई छोड़ दो तुम्हारे साथ कोई एतराज नहीं है। आज के दौर में हमारे लिए ये पैगाम है देखो जो बुरे लोग हैं, उनसे नफरत न करना, जो उनमें बुराई है, उससे नफरत करना।
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मौलाना ने कहा कि आज दुनिया में अगर हक परस्ती, इंसाफ और सच्चाई, मानवता जिंदा है तो वह हजरत इमाम हुसैन और कर्बला वालों की देन है। मजलिस के आखिर में मौलाना ने हजरत इमाम हसन अलैहिस्सलाम के शहादत को बयान किया तो हर कोई दहाड़े मारकर रोने लगा। मजलिस से पहले मर्सियाख्वानी शाहिद आलम और उनके सहयोगी ने की।
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इस दौरान अंजुमन के सदर डॉ वजाहत हुसैन, काजिम रजा, तशबीब हसन, मौलाना शारिब, अलमदार हुसैन, आले रजा, इमाम हैदर, अफसर मेंहदी, इंतेजार हुसैन, शहनवाज हुसैन, जैगम, सोजफ, सनी, मार्शल, सलमान, इं मोहम्मद मेहदी, तसकीन, फहीम, ताकीब रिजवी और दरयाफ्त हुसैन आदि मौजूद थे।