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सेमरी गांव में वरासत अभियान फेल

Sat, 15 May 2021 10:16 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 15 May 2021 10:16 PM IST
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Heritage expedition fails in Semri village
वरासत अभियान सेमरी गांव की दहलीज पर तोड़ रहा दम
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सेमरी गांव में वरासत अभियान फेल
बाबा के नाम है खेती, नहीं बन रहा है किसान क्रेडिट कार्ड
रजिस्ट्री की बजाए लिखा पढ़ी के आधार पर खरीदी जाती है जमीन
रबीन्द्र कुमार गुप्ता/मनोज शुक्ला
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र का एक ऐसा गांव जहां आज भी लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। इतना ही नहीं इस गांव के किसी भी किसान का किसान क्रेडिट कार्ड नहीं बना है, जबकि सरकार की ओर से अभियान चलाकर केसीसी बनाया जाना था। यह विशेष अभियान इस गांव में फेल है। इस गांव की परेशानी यहीं कम नहीं होती है, यहां अगर किसी को अपनी जमीन खरीदनी या बेचनी होती है तो वे रजिस्ट्री ऑफिस में जाकर उसे रजिस्ट्री नहीं कर पाते हैं। बल्कि वह 50 या 100 रुपये के स्टांप पेपर पर एक-दूसरे से लिखा पढ़ी कर उसी को बेचीनामा के तौर पर सुरक्षित रख लिया जाता है। वर्षों से चली आ रही गांव की इस परेशानी पर किसी भी जनप्रतिनिधि या जिम्मेदार अधिकारी की नजर नहीं पड़ी है।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत सेमरा बनकसिया के राजस्व गांव सेमरी में आज तक चकबंदी नहीं होने से सभी सरकारी योजनाओं के लाभ से लोग वंचित हैं। करीब 300 एकड़ रकबा वाले इस गांव की कुल आबादी करीब 700 है। सन 1983 में तहसील से चकबंदी के लिए गजट हुआ था। उसके बाद चकबंदी विभाग के बने सीओ ऑफिस कटरिया बाबू में अगलगी की घटना में क्षेत्र के मल्दा, चिताही के साथ सेमरी गांव के अभिलेख जलकर राख हो गए थे। चकबंदी विभाग ने पुराने कब्जेदारों और उन गाटों के नंबरों के आधार पर चिताही तथा मल्दा गांव का अभिलेख तैयार कर चकबंदी की प्रक्रिया पूरी की। मगर सेमरी गांव का आज तक ना ही अभिलेख तैयार किया गया और ना ही आज तक चकबंदी हुआ। यहां की जमीनें अभी भी दो से तीन पीढ़ी पहले बाबा, दादा के नाम से दर्ज हैं। इस संबंध में तहसीलदार डुमरियागंज राजेश प्रताप सिंह ने कहा कि रजिस्ट्रार कानूनगो की तबियत खराब है। उनके ठीक होने पर सेमरी गांव के अभिलेखों को निकलवा कर आवश्यक आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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अभी तक बाप-दादा ने नाम है जमीन
सेमरा गांव निवासी रामललित यादव ने बताया कि उनके पिता की मृत्यु 20 साल पहले हुई थी, लेकिन वरासत में उनका नाम दर्ज नहीं हो सका। रामकृपाल पांडेय के पिता की मृत्यु करीब 45 वर्ष पहले हो चुकी है, जमीन अभी पिता के नाम ही है। रामनेवास चौरसिया के बाबा के नाम अभी भी जमीन दर्ज है, जो करीब 25 साल पहले मर चुके हैं। इनके पिता भी तीन साल पहले दुनियां छोड़ चुके हैं। खेती तो करते हैं, लेकिन कोई सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। नंदकिशोर यादव के इनके बाबा के नाम है। जमीन जो करीब 40 साल पहले इस दुनिया को छोड़ चुके हैं।
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वरासत अभियान भी बेमतलब
उत्तर प्रदेश सरकार का वरासत अभियान इस गांव में फेल है। ग्रामीणों ने कहा कि जिस तरह से पूर्व में चिताही और मल्दा के किसानों का नाम और उनके कब्जे वाली जमीनों का गाटा नंबर पूछकर अभिलेख तैयार किया गया था। उसी तरह उनके गांव का भी किया जा सकता है। उन लोगों के पास उनके पूर्वजों के दस्तावेज हैं। जिसके आधार पर वह आज भी अपने जमीन पर खेती करते हैं और उस जमीन को खरीदते और बेचते हैं। मगर तहसील प्रशासन के किसी भी जिम्मेदार ने सेमरी गांव के अभिलेख तैयार करने की जहमत नहीं उठाई।
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