फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Healthy on the outside, sick on the inside... A new health crisis is on the rise in the division.

Siddharthnagar News: दिखने में स्वस्थ, अंदर से बीमार... मंडल में बढ़ रहा नया हेल्थ संकट

Fri, 29 May 2026 01:25 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2026 01:25 AM IST
विज्ञापन
Healthy on the outside, sick on the inside... A new health crisis is on the rise in the division.
सिद्धार्थनगर। सुबह वह काम पर निकलता है, दिनभर सामान्य दिखता है। मोबाइल चलाता है, बाजार जाता है, हंसता-बोलता भी है लेकिन उसके शरीर के भीतर धीरे-धीरे एक खामोश टूटन बढ़ रही है। गोरखपुर-बस्ती मंडल में इन दिनों एक ऐसा हेल्थ संकट तेजी से उभर रहा है जो बाहर से तुरंत दिखाई नहीं देता। जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और निजी क्लीनिकों में कम उम्र के ऐसे मरीज बढ़ रहे हैं जिन्हें लगातार थकान, चक्कर, घबराहट, कमजोरी, हाई बीपी, शुगर फ्लक्चुएशन और बेचैनी की शिकायत है।
विज्ञापन

जिले के 28 वर्षीय प्राइवेट कर्मचारी को लगातार सिरदर्द और थकान की शिकायत रहती थी। देर रात तक जागना, फास्ट फूड और दिनभर चाय-कॉफी पर निर्भर रहना उसकी आदत बन चुकी थी। जांच में हाई बीपी सामने आया। डॉक्टरों ने खानपान और दिनचर्या सुधारने की सलाह दी।
विज्ञापन

सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आई 34 वर्षीय महिला कई महीनों से शरीर टूटने और चक्कर की समस्या से परेशान थीं। शुरुआत में उन्होंने इसे गर्मी और घरेलू कामकाज का असर समझा लेकिन जांच में शरीर में पोषण और आयरन की कमी मिली। नियमित भोजन और इलाज के बाद अब सुधार है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नौगढ़ के एक 35 वर्षीय दुकानदार को अचानक घबराहट और ज्यादा प्यास लगने की समस्या होने लगी। डॉक्टरों ने जांच में शुगर फ्लक्चुएशन पाया। पता चला कि वह दिनभर पैकेट स्नैक्स और मीठे पेय पर निर्भर थे। अब डॉक्टरों की सलाह पर पारंपरिक भोजन और नियमित दिनचर्या अपना रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार यह सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली और बिगड़ते खानपान से पैदा हो रही आंतरिक स्वास्थ्य समस्या है। शरीर कैलोरी तो पा रहा है लेकिन वह पोषण नहीं मिल पा रहा जो उसे भीतर से मजबूत रख सके। यही कारण है कि लोग दिखने में सामान्य हैं लेकिन शरीर अंदर से तेजी से कमजोर हो रहा है।
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज, बस्ती और सिद्धार्थनगर के मेडिकल कॉलेजों में भी मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि ओपीडी में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की पहुंच रही है जिन्हें लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर, हाई बीपी, शुगर असंतुलन और तनाव जैसी समस्याएं परेशान कर रही हैं।
महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज बस्ती और माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर में हर साल 1.5 लाख से ज्यादा मरीज ओपीडी सेवाएं ले रहे हैं, जबकि 20 हजार से अधिक मरीज भर्ती होकर इलाज कराते हैं। डॉक्टरों के अनुसार मेडिसिन और कार्डियोलॉजी ओपीडी में अब कम उम्र के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई मरीजों में 30-35 साल की उम्र में ही नियमित दवा की नौबत आ रही है।
---------
पेट भरा, तत्व खाली
जानकार बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में खानपान और दिनचर्या तेजी से बदली है। गांवों तक पैकेट वाले स्नैक्स, इंस्टेंट फूड, मीठे पेय और देर रात तक जागने वाली आदत पहुंच चुकी है। सत्तू, छाछ, मोटा अनाज, दाल, हरी सब्जियां और मौसमी भोजन जैसी चीजें धीरे-धीरे थाली से गायब हो रही हैं। उनकी जगह ऐसे खाद्य पदार्थ ले रहे हैं जो पेट तो भर देते हैं, लेकिन शरीर को जरूरी फाइबर, मिनरल, प्राकृतिक लवण और पोषण नहीं दे पाते।
------------
- फिजीशियन डॉक्टर गौरव दुबे का कहना है कि मंडल में तेजी से बदलती खानपान संस्कृति का असर अब अस्पतालों में साफ दिखाई देने लगा है। तेज गर्मी ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। पसीने के साथ शरीर से पानी और जरूरी लवण तेजी से निकल रहे हैं लेकिन उनकी भरपाई सही तरीके से नहीं हो रही। लोग पानी और पारंपरिक पेय की जगह कोल्ड ड्रिंक, फ्लेवर ड्रिंक और ज्यादा चीनी वाले पेय ले रहे हैं। इससे कुछ देर राहत जरूर मिलती है, लेकिन शरीर के भीतर दबाव बढ़ता जाता है। इसका सीधा असर ब्लड प्रेशर, शुगर और दिल की सेहत पर पड़ रहा है।
-------------
अब 30-35 साल की उम्र में ही हाई बीपी, शुगर फ्लक्चुएशन, लगातार थकान और कमजोरी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग शरीर की शुरुआती चेतावनियों को नजरअंदाज कर देते हैं। बाहर से सामान्य दिखने वाला व्यक्ति भीतर से पोषण की कमी, तनाव और अनियमित दिनचर्या की वजह से कमजोर हो रहा है।

- डॉ. आशुतोष शुक्ल
--------------
आज की सबसे बड़ी समस्या ‘फुल स्टमक, एम्प्टी न्यूट्रिशन’ है। लोग पेट भरने वाला भोजन तो ले रहे हैं लेकिन शरीर को जरूरी फाइबर, मिनरल, प्रोटीन और प्राकृतिक लवण नहीं मिल पा रहे। सत्तू, छाछ, दाल, मोटा अनाज और मौसमी भोजन थाली से हटते जा रहे हैं जबकि पैकेट फूड और मीठे पेय बढ़ रहे हैं। इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखाई देता है।
- भोला वर्मा- जिम ट्रेनर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed