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Siddharthnagar News: सत्य, इंसाफ, सहनशीलता के पुजारी थे हजरत अली
Mon, 13 Jan 2025 11:28 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 13 Jan 2025 11:28 PM IST
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डुमरियागंज। मुसलमानों के पहले इमाम एवं चौथे खलीफा हजरत अली अलैहिस्सलाम सत्य, इंसाफ और सहनशीलता के पुजारी थे। उन्होंने दुनिया को हमेशा हक, अमन, सच्चाई और इंसाफ के रास्ते पर चलने का पैगाम दिया।
यह बयान हल्लौर कस्बा स्थित शिया जामा मस्जिद के मौलाना शहकार हुसैन जैदी ने एक मुलाकात में दिए। उन्होंने बताया कि हजरत अली इब्ने अबू तालिब की पैदाइश अरबी महीने की 13 रजब 24 हिजरी पूर्व इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक (17 मार्च सन 30 अमूल फील) को मुसलमानों के सबसे पवित्र और तीर्थ स्थल खाना ए काबा में हुआ। उनकी शहादत 21 रमजान को फूफा की मस्जिद में नमाज अदा कराते वक्त अब्दुर रहमान इब्ने मुलजिम द्वारा जहर बुझी तलवार से हमला करके जख्मी करने से 661 ईस्वी में हुई। वे पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के चाचाजात भाई और दामाद थे। उनका चर्चित नाम हजरत अली है। वे शिया मुसलमानों के पहले इमाम और चौथे खलीफा जाने जाते हैं।
उन्होंने 656 से 661 तक राशिदून खिलाफत के चौथे खलीफा के रूप में शासन किया और शिया इस्लाम के अनुसार वे 632 से 661 तक पहले इमाम थे। उन्होंने वैज्ञानिक जानकारियों को बहुत ही रोचक ढंग से आम आदमी तक पहुंचाया। पैगंबर-ए-इस्लाम के दामाद और मुसलमानों के चौथे खलीफा हजरत अली ऐसी शख्सियत थे, जिन्होंने अपना जीवन अल्लाह के हुक्म के मुताबिक बिताया। इस्लामी इतिहास के मुताबिक इमाम और खलीफा होने के बाद भी उनके जीवन का बड़ा हिस्सा अल्लाह की इबादत में बीता था।
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पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा ने कहा है कि मैं इल्म का शहर हू तो अली उसके दरवाजे हैं। अगर आज हजरत अली के बताए हुए रास्ते पर कुछ दूरी तक भी चला जाए तो दुनियां और समाज में फैली अशांति खत्म हो सकती है इंसानों के बीच गैर बराबरी और नफरत मिट सकती है।
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हजरत अली की पैदाइश पर आज निकलेगा जुलूस ए हैदरी
हजरत अली की पैदाइश के मौके पर मंगलवार को मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में महफिल मिलाद का आयोजन किया जाएगा साथ ही हल्लौर से डुमरियागंज तक जुलूस-ए-हैदरी निकाल कर हजरत अली के अनुयायी उनके बताए हक इंसाफ और सच्चाई के रास्ते पर चलने का संकल्प लेंगे। जगह-जगह लंगर का भी इंतजाम किया गया है। जिले में हजरत अली की पैदाइश पर विशेष आयोजन हल्लौर और भटगवा में किया गया है।
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यह बयान हल्लौर कस्बा स्थित शिया जामा मस्जिद के मौलाना शहकार हुसैन जैदी ने एक मुलाकात में दिए। उन्होंने बताया कि हजरत अली इब्ने अबू तालिब की पैदाइश अरबी महीने की 13 रजब 24 हिजरी पूर्व इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक (17 मार्च सन 30 अमूल फील) को मुसलमानों के सबसे पवित्र और तीर्थ स्थल खाना ए काबा में हुआ। उनकी शहादत 21 रमजान को फूफा की मस्जिद में नमाज अदा कराते वक्त अब्दुर रहमान इब्ने मुलजिम द्वारा जहर बुझी तलवार से हमला करके जख्मी करने से 661 ईस्वी में हुई। वे पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के चाचाजात भाई और दामाद थे। उनका चर्चित नाम हजरत अली है। वे शिया मुसलमानों के पहले इमाम और चौथे खलीफा जाने जाते हैं।
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उन्होंने 656 से 661 तक राशिदून खिलाफत के चौथे खलीफा के रूप में शासन किया और शिया इस्लाम के अनुसार वे 632 से 661 तक पहले इमाम थे। उन्होंने वैज्ञानिक जानकारियों को बहुत ही रोचक ढंग से आम आदमी तक पहुंचाया। पैगंबर-ए-इस्लाम के दामाद और मुसलमानों के चौथे खलीफा हजरत अली ऐसी शख्सियत थे, जिन्होंने अपना जीवन अल्लाह के हुक्म के मुताबिक बिताया। इस्लामी इतिहास के मुताबिक इमाम और खलीफा होने के बाद भी उनके जीवन का बड़ा हिस्सा अल्लाह की इबादत में बीता था।
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पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा ने कहा है कि मैं इल्म का शहर हू तो अली उसके दरवाजे हैं। अगर आज हजरत अली के बताए हुए रास्ते पर कुछ दूरी तक भी चला जाए तो दुनियां और समाज में फैली अशांति खत्म हो सकती है इंसानों के बीच गैर बराबरी और नफरत मिट सकती है।
हजरत अली की पैदाइश पर आज निकलेगा जुलूस ए हैदरी
हजरत अली की पैदाइश के मौके पर मंगलवार को मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में महफिल मिलाद का आयोजन किया जाएगा साथ ही हल्लौर से डुमरियागंज तक जुलूस-ए-हैदरी निकाल कर हजरत अली के अनुयायी उनके बताए हक इंसाफ और सच्चाई के रास्ते पर चलने का संकल्प लेंगे। जगह-जगह लंगर का भी इंतजाम किया गया है। जिले में हजरत अली की पैदाइश पर विशेष आयोजन हल्लौर और भटगवा में किया गया है।