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Siddharthnagar News: बाहर की पैथॉलोजी से जबरन करा रहा था जांच, मरीजों के हंगामे पर डॉक्टर केबिन से भागा
Thu, 20 Jul 2023 11:55 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 20 Jul 2023 11:55 PM IST
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सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में यहां के चिकित्सकों और मरीजों का गठजोड़ टूट नहीं पा रहा है। मरीज माफिया की मनमानी के आगे प्रशासन और पुलिस की एक नहीं चल पा रही है। बुधवार को ही अस्पताल से मरीज को जबरन निजी अस्पताल में ले जाकर भर्ती करने की शिकायत हुई थी। इसी बीच बृहस्पतिवार को एसएनसीयू वार्ड में भर्ती बच्चों के खून की जांच के लिए बाहर से पैथाॅलोजी संचालक बुलाने और खून निकलवाकर जांच के लिए 1200-1200 रुपये प्रति मरीज से वसूली का मामला सामने आया है। वसूली का आरोप लगाते हुए मरीजों के परिजनों ने ओपीडी में पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया तो चिकित्सक केबिन बंद करके भाग खड़ा हुआ। वहीं, मामला प्राचार्य तक पहुंचा तो जिस चिकित्सक पर वसूली का आरोप लगा, उसे हटाने के बजाय दूसरे डॉक्टर को ओपीडी, एसएनसीयू से हटा दिया गया। इससे मरीज प्राचार्य पर भी आरोप लगाने लगे।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में 20 बेड का एसएनसीयू वार्ड बना है। जहां पर जन्म से लेकर एक माह तक वह बच्चे भर्ती होते हैं। जो बच्चे जन्म लेने के बाद बहुत कमजोर होते हैं या गंदा पानी पी लेते हैं, उन्हें इस वार्ड में भर्ती किया जाता है। इस वार्ड में इसमें बालरोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी लगती है। वार्ड पहले भी विवादों से घिरा रहा है। इस बीच बृहस्पतिवार को वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजन उस वक्त उग्र हो गए, जब अस्पताल में जांच की सुविधा होते हुए भी जांच के लिए बाहरी व्यक्ति को बुलाकर 1200-1200 रुपये प्रति मरीज वसूल कर लिए गए।
जांच करने वाला व्यक्ति अस्पताल गेट पर दिखा तो कुछ मरीजों के तीमारदारों ने उसे घेरकर पकड़ लिया। बाहर से जांच करने और किसने कहने पर रुपये वसूल करने के प्रश्न पर पकड़े गए व्यक्ति ने बालरोग विशेषज्ञ डॉ. एसएल पटेल का नाम लिया। इस मरीज आरोपी को पकड़कर डॉक्टर केे केबिन तक लेकर चले गए और उन्हें घेरकर हंगामा शुरू कर दिया। मामला बढ़ता देख आरोपी चिकित्सक केबिन बंद कर भाग निकले। डॉक्टर एसएल पटेल ने उनपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है।
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जोगिया क्षेत्र के कटहना गांव निवासी धीरज ने कहा कि वह मरीज को लेकर एसएनसीयू वार्ड में भर्ती थे। चिकित्सक एसएल पटेल के कहने एक बाहरी व्यक्ति आया और बच्चे के खून की जांच करने के लिए 1200 रुपये ले लिए। शक्तिनानकार गांव निवासी शिव कुमार और लोटन क्षेत्र के फुलवरिया गांव निवासी दीपू ने भी 1200 रुपये वसूले जाने की बात कही। 12 से अधिक मरीजों ने जांच के नाम पर वसूली का आरोप लगाया है।
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जिसपर आरोप, उसे ही सौंप दिया प्रभार
मामला प्राचार्य तक पहुंचा तो आननफानन उन्होंने बालरोग विशेषज्ञ चिकित्सकों को इधर से उधर कर दिया। इसमें जिस चिकित्सक पर बाहरी व्यक्ति से जांच कराने के लिए पर वसूली करने का आरोप लगा था। उसी को वार्ड की जिम्मेदारी दे दी, जबकि कार्य करने वाले चिकित्सक को वहां से हटाकर एमसीएच विंग में भेज दिया गया है। जहां प्रसव होते हैं और नवजातों का इलाज करना होता है, जबकि बच्चों की संख्या कम है। दबी जुबान से स्वास्थ्यकर्मी भी इस पर सवाल उठा रहे हैं। इस मामले में प्रभारी प्राचार्य डाॅ. एके झा से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका। उनका पक्ष आने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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फिर एक डाॅक्टर के भरोसे हुए नवजात
मेडिकल कॉलेज में बीते 13 जून को प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके झा ने डॉ. फजल खान को एमसीएच विंग के साथ एसएनसीयू, ओपीडी की जिम्मेदारी सौंपी थी, उन्होंने इस आदेश को निरस्त करते हुए डाॅ. फजल खान को एमसीएच विंग तक सीमित कर दिया। इस आदेश के बाद डॉ. एसएल पटेल के भरोसे एसएनसीयू, ओपीडी, वार्ड, इमरजेंसी ड्यूटी एवं पोस्टमार्टम ड्यूटी का कार्य आ गया है, जबकि डेंगू, जेई का सीजन है। जरूरत पर विशेषज्ञ डॉॅक्टर नहीं मिलेंगे तो बच्चों के इलाज की व्यवस्था प्रभावित होगी।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में 20 बेड का एसएनसीयू वार्ड बना है। जहां पर जन्म से लेकर एक माह तक वह बच्चे भर्ती होते हैं। जो बच्चे जन्म लेने के बाद बहुत कमजोर होते हैं या गंदा पानी पी लेते हैं, उन्हें इस वार्ड में भर्ती किया जाता है। इस वार्ड में इसमें बालरोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी लगती है। वार्ड पहले भी विवादों से घिरा रहा है। इस बीच बृहस्पतिवार को वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजन उस वक्त उग्र हो गए, जब अस्पताल में जांच की सुविधा होते हुए भी जांच के लिए बाहरी व्यक्ति को बुलाकर 1200-1200 रुपये प्रति मरीज वसूल कर लिए गए।
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जांच करने वाला व्यक्ति अस्पताल गेट पर दिखा तो कुछ मरीजों के तीमारदारों ने उसे घेरकर पकड़ लिया। बाहर से जांच करने और किसने कहने पर रुपये वसूल करने के प्रश्न पर पकड़े गए व्यक्ति ने बालरोग विशेषज्ञ डॉ. एसएल पटेल का नाम लिया। इस मरीज आरोपी को पकड़कर डॉक्टर केे केबिन तक लेकर चले गए और उन्हें घेरकर हंगामा शुरू कर दिया। मामला बढ़ता देख आरोपी चिकित्सक केबिन बंद कर भाग निकले। डॉक्टर एसएल पटेल ने उनपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है।
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जोगिया क्षेत्र के कटहना गांव निवासी धीरज ने कहा कि वह मरीज को लेकर एसएनसीयू वार्ड में भर्ती थे। चिकित्सक एसएल पटेल के कहने एक बाहरी व्यक्ति आया और बच्चे के खून की जांच करने के लिए 1200 रुपये ले लिए। शक्तिनानकार गांव निवासी शिव कुमार और लोटन क्षेत्र के फुलवरिया गांव निवासी दीपू ने भी 1200 रुपये वसूले जाने की बात कही। 12 से अधिक मरीजों ने जांच के नाम पर वसूली का आरोप लगाया है।
जिसपर आरोप, उसे ही सौंप दिया प्रभार
मामला प्राचार्य तक पहुंचा तो आननफानन उन्होंने बालरोग विशेषज्ञ चिकित्सकों को इधर से उधर कर दिया। इसमें जिस चिकित्सक पर बाहरी व्यक्ति से जांच कराने के लिए पर वसूली करने का आरोप लगा था। उसी को वार्ड की जिम्मेदारी दे दी, जबकि कार्य करने वाले चिकित्सक को वहां से हटाकर एमसीएच विंग में भेज दिया गया है। जहां प्रसव होते हैं और नवजातों का इलाज करना होता है, जबकि बच्चों की संख्या कम है। दबी जुबान से स्वास्थ्यकर्मी भी इस पर सवाल उठा रहे हैं। इस मामले में प्रभारी प्राचार्य डाॅ. एके झा से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका। उनका पक्ष आने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
फिर एक डाॅक्टर के भरोसे हुए नवजात
मेडिकल कॉलेज में बीते 13 जून को प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके झा ने डॉ. फजल खान को एमसीएच विंग के साथ एसएनसीयू, ओपीडी की जिम्मेदारी सौंपी थी, उन्होंने इस आदेश को निरस्त करते हुए डाॅ. फजल खान को एमसीएच विंग तक सीमित कर दिया। इस आदेश के बाद डॉ. एसएल पटेल के भरोसे एसएनसीयू, ओपीडी, वार्ड, इमरजेंसी ड्यूटी एवं पोस्टमार्टम ड्यूटी का कार्य आ गया है, जबकि डेंगू, जेई का सीजन है। जरूरत पर विशेषज्ञ डॉॅक्टर नहीं मिलेंगे तो बच्चों के इलाज की व्यवस्था प्रभावित होगी।