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Siddharthnagar News: बाढ़ ने किसानों के जीविकोपार्जन के समक्ष खड़ी की मुश्किल
Sun, 14 Jul 2024 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 14 Jul 2024 12:22 AM IST
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डुमरियागंज क्षेत्र के बगाहवा, गुलहरिया और खजुआ में बाढ़ में डूब गई धान की नर्सरी व फसल
संवाद न्यूज एजेसी
डुमरियागंज। राप्ती नदी में आई बाढ़ ने किसानों की जीविकोपार्जन के समक्ष संकट उत्पन्न कर दिया है। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम बगाहवा, गुलहरिया, जलकरी, खजुआ क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के खेत में तैयार धान की रोपी गई फसल पानी में डूब कर बर्बाद हो गई है। किसान अपनी बर्बादी पर आंसू बहाने को विवश हैं। कई दिनों से बाढ़ का पानी खेतों में भरा रहने से किसान रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। इस संबंध मे डुमरियागज तहसीलदार डॉ. संतराज सिंह बघेल ने बताया कि बाढ़ ग्रस्त बगाहवा गांव का सर्वे करने के लिए लेखपाल को निर्देशित किया गया है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर गांव को मैरुंड घोषित कर वहां पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।
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बोले किसान
हम किसानों के लिए राप्ती नदी वरदान के बजाय अभिशाप साबित होती है। भारी बारिश होने और नेपाल के पानी छोड़ने से इस बार भी बाढ़ की त्रासदी से खेती चौपट हो गई है। अब गुजर बसर कैसे होगा यही चिंता सताए जा रही है। रोपी गई धान की फसल पानी में कई दिनों से जलमग्न है।
-संजू चौरसिया, किसान बगाहवा
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शासन-प्रशासन को बाढ़ से निपटने के लिए स्थायी, ठोस उपाय करना चाहिए। लगभग हर वर्ष राप्ती नदी के उफान के बाद सैलाब आ जाता है, जिससे किसानों के सारे अरमान और मेहनत पर पानी फिर जाता है। इस बार भी सैलाब से फसलों का काफी नुकसान हुआ है।
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-सुदामा प्रसाद यादव, किसान गुलरिया
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संवाद न्यूज एजेसी
डुमरियागंज। राप्ती नदी में आई बाढ़ ने किसानों की जीविकोपार्जन के समक्ष संकट उत्पन्न कर दिया है। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम बगाहवा, गुलहरिया, जलकरी, खजुआ क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के खेत में तैयार धान की रोपी गई फसल पानी में डूब कर बर्बाद हो गई है। किसान अपनी बर्बादी पर आंसू बहाने को विवश हैं। कई दिनों से बाढ़ का पानी खेतों में भरा रहने से किसान रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। इस संबंध मे डुमरियागज तहसीलदार डॉ. संतराज सिंह बघेल ने बताया कि बाढ़ ग्रस्त बगाहवा गांव का सर्वे करने के लिए लेखपाल को निर्देशित किया गया है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर गांव को मैरुंड घोषित कर वहां पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।
बोले किसान
हम किसानों के लिए राप्ती नदी वरदान के बजाय अभिशाप साबित होती है। भारी बारिश होने और नेपाल के पानी छोड़ने से इस बार भी बाढ़ की त्रासदी से खेती चौपट हो गई है। अब गुजर बसर कैसे होगा यही चिंता सताए जा रही है। रोपी गई धान की फसल पानी में कई दिनों से जलमग्न है।
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-संजू चौरसिया, किसान बगाहवा
शासन-प्रशासन को बाढ़ से निपटने के लिए स्थायी, ठोस उपाय करना चाहिए। लगभग हर वर्ष राप्ती नदी के उफान के बाद सैलाब आ जाता है, जिससे किसानों के सारे अरमान और मेहनत पर पानी फिर जाता है। इस बार भी सैलाब से फसलों का काफी नुकसान हुआ है।
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-सुदामा प्रसाद यादव, किसान गुलरिया