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Siddharthnagar News: डीएपी के लिए मारामारी, सीमा पार जा रही यूरिया

Tue, 12 Nov 2024 12:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 12 Nov 2024 12:37 AM IST
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Fight for DAP, urea going across the border
सिद्धार्थनगर। जिले में गेहूं की बुवाई करने के लिए किसानों को एक-एक बोरी डीएपी के लिए समितियों पर संघर्ष करना पड़ रहा है। अभी डीएपी के लिए किसान लड़ रहे हैं, तो 15 दिन बाद यूरिया के लिए गर्मी में पसीना बहाएंगे। कारण सिंचाई से पहले यूरिया बार्डर पार पहुंच जा रहा है। बार्डर पार खाद ले जाते हुए देखा जा सकता है।
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यहां सीमावर्ती दुकानों पर तय कीमत से 200 रुपये प्रति बोरी अधिक 500 रुपये देकर तस्कर खाद उठा रहे हैं और वह खाद बॉर्डर पार होते ही 1000-1200 रुपये प्रति बोरी बिक रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों से जब बात की गई तो उन्होंने चौंकाने वाली जानकारी दी। बताया कि किसान को दुकानदार खाद नहीं देते हैं क्योंकि वह तय कीमत देते हैं, जिसका लेकर बहस हो जाता है। जबकि, तस्कर 200 रुपये बोरी तक अधिक देते हैं।
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क्योंकि उन्हें बार्डर पर उसी खाद की 500-700 रुपये बोरी अधिक मिल जा रहा है। अगर तस्करी का यही हाल रहा तो गेहूं की सिंचाई के बाद जिले में यूरिया की किल्लत बढ़ जाएगी।
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तहसील क्षेत्र के नेपाल बॉर्डर से लगभग 8 से 10 किमी के दायरे में उर्वरक खाद की लाइसेंसी दुकानों से आए दिन तस्करी जोरों पर है दुकानों से तस्करों गठजोड़ है, दुकानदार बड़े-बड़े व मध्यम वर्ग काश्तकार की जोत बही व आधार कार्ड से अधिक मात्रा में उर्वरक खाद की बिक्री कर देते हैं। उनको जितनी खाद की आवश्यकता होती है दे देते हैं। बचे उर्वरक खाद अन्य गोदाम में रखवा देते हैं। फिर उसे तस्करों के हाथों 500 से 600 रुपये में बिक्री कर देते हैं। उसके बाद तस्कर बेरोजगार युवाओं से नेपाल भेजते हैं। एक युवा बाइक पर दो से तीन बोरी उर्वरक खाद लाद कर एक दिन में चार चक्कर लगता है।
युवा एक बोरी के पीछे 100 रुपये कमा लेता है। अगर तीन बोरी खाद बाइक लेकर नेपाल जाता है। तो दिन 1200 सौ कमा लेता है। कभी-कभी जब प्रशासन का दबाव रहता है तो तस्कर इन्ही युवाओं को पकड़वा देते हैं। उसके बाद युवा पेशेवर तस्कर बन जाता है। कुछ बड़े तस्कर नेपाल के बड़े काश्तकारों का भारतीय आधार कार्ड बनवा लिए हैं। तस्कर उन्हें दुकान पर भेज कर उर्वरक खाद की खरीदारी करवा सीमाई इलाकों में स्टोर कर रखवा देते है। उसके समय देखते ही बॉर्डर पार नेपाल भेज देते हैं। तस्कर इस उर्वरक की मोटी रकम पर बिक्री करते हैं। पगड़ंडी पकड़ते हैं तस्कर, साइकिल और बाइक का उपयोग : बढ़नी क्षेत्र के सीमा से सटे महादेव बुजुर्ग निवासी एक व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पहले पिकअप आदि से खाद की तस्करी होती थी। कई बार बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद तस्करों ने तस्करी करने का तरीका बदल लिया। नेपाल में कुछ बड़े दुकानदार हैं जो कैरियर रखे हुए हैं रुपये वह देते हैं और साइकिल, बाइक से खाद मंगवाते हैं। इसमें 100-200 बोरी उन्हें मिलता है। बाइक पर एक बार में तीन बोरी और साइकिल पर दो से तीन बोरी ले जाते हैं।
एक दिन में अगर दो चक्कर लगा दिए तो कम से कम एक हजार रुपये का काम हो जाता है। पूंजी भी उनकी नहीं लगती है, भोर में और देर शाम में साइकिल से जाते हैं। जबकि, दिन में बाइक से तस्करी करते हैं। कुछ तस्कर ऐसे हैं जो नेपाल में किसानों को सेट कर लेते हैं। इसके बाद यहां से उठाकर वहां पहुंचा दिए और रुपये मिल गए। इस पर रोक नहीं लग पा रहा है।

एसएसबी और पुलिस ने पकड़ी थी खेप : बार्डर पर खाद तस्करी का इस बात से आंकलन कर सकते हैं कि पिछले ठंड के मौसम के बजहां बॉर्डर से एक घर से छापा मारकर बड़ी मात्रा में यूरिया का खेप पकड़ा था। इसका कपिलवस्तु कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसी प्रकार ककरहवा क्षेत्र में एसएसबी और पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ी मात्रा में यूरिया की खेप पकड़ा थी।
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