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व्यवस्था की फांस में उलझी मदद की आस 

Wed, 13 Apr 2016 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो सिद्धार्थनगर
अमर उजाला ब्यूरो सिद्धार्थनगर Updated Wed, 13 Apr 2016 12:18 AM IST
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Excursions in France helped arranged complicating
गेहूं की फसल राख
आग से हजारों बीघा खेत राख हो चुके हैं। किसानों में हाय तौबा मची हुई है। पीड़ित किसान रहनुमा की राह ताक रहे हैं। मगर दो दिन बीतने के बाद भी सरकारी तंत्र सुस्त पड़ा हुआ है। किसानों को यह पता नहीं कि उन्हें मदद कहां से मिलेगी। सरकारी अफसर भी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। ऐसे में पीड़ित किसानों का बुरा हाल है।
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पिछले एक सप्ताह से जिले में आग से तबाही का सिलसिला जारी है। शहर से सटे मधुकरपुर, कपिलवस्तु, जोगिया, बर्डपुर, लोटन, मोहाना, बांसी, पथरा, खेसरहा, खुनियांव, इटवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आग की लपटों में किसानों के खून-पसीने की मेहनत समेत उनके सपने जल गए हैं। तमाम परिवार खुले आसमान के नीचे आ चुके हैं। इन्हें अब सिर्फ सरकारी मदद का इंतजार है। विडंबना है कि मदद की प्रक्रिया ठप पड़ी है। 
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किसानों का गुस्सा शांत कराने के लिए तहसीलों से राजस्व कर्मचारियों की टीमें सर्वे को पहुंची और फिर लौट कर चुप्पी साध गई। खुले आसमान के नीचे दिन बीता रहे किसान अब मदद की बाट जोह रहे हैं। इस संबंध में तहसीलदार विमल कुमार शुक्ला का कहना है कि सर्वे कराने की जिम्मेदारी हमारी है। आर्थिक सहायता मुहैया कराना मंडी समिति का काम है। रिपोर्ट बनाकर संबंधित विभाग को भेज रहे हैं।
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