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भगवान गणेश का हर रूप है मंगलकारी : प्रीतम किशोरी
Thu, 21 Sep 2023 12:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 21 Sep 2023 12:21 PM IST
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सिद्धार्थनगर। राम कथा की महिमा चंद्रमा की किरण के समान है और इसका श्रवण करने वाले चकोर पक्षी की तरह हैं। जिस प्रकार स्वाति नक्षत्र के जल की बूंद से चकोर पक्षी अपनी प्यास शांत करती है, उसी प्रकार श्रद्धालु रामकथा का श्रवण कर आत्मिक प्यास बुझाते है।
यह बातें, पथरा के सेहरी चौराहे पर चल रहे आयोजित सार्वजनिक संगीतमई रामकथा के पहले दिन कथा वाचिका साध्वी प्रीतम किशोरी ने कहीं। उन्होंने कहा कि चंद्रमा शीतलता प्रदान करती है, उसी प्रकार रामकथा जीवन में शीतलता लाती है। जब घर में अंधेरा हो तब दीपक को देहरी में रखना चाहिए ताकि प्रकाश अंदर बाहर दोनों तरफ फैलता है। उसी प्रकार जीवन में अंधकार आने पर राम नाम रूपी दीपक को जिव्हा रूपी देहरी पर रखना चाहिए, इससे इहलोक और परलोक दोनों प्रकाशित होगा।
साध्वी प्रीतम किशोरी ने बताया कि गणेश जी की प्रथम पूज्य होने की दो कथा है, एक में गणेश जी अपने माता पिता की परिक्रमा करते हैं, लेकिन रामचरितमानस के अनुसार गणेश जी ने नारद जी के कहने पर पृथ्वी पर सीता राम लिखकर सात बार परिक्रमा की तब वे प्रथम पूजनीय हुए। इस दौरान आयोजक राजू गुप्ता, रबींद्र गुप्ता अशोक मौर्य, विक्की मिश्र, विकास यादव, बालकेशर मौर्य आदि मौजूद रहे।
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यह बातें, पथरा के सेहरी चौराहे पर चल रहे आयोजित सार्वजनिक संगीतमई रामकथा के पहले दिन कथा वाचिका साध्वी प्रीतम किशोरी ने कहीं। उन्होंने कहा कि चंद्रमा शीतलता प्रदान करती है, उसी प्रकार रामकथा जीवन में शीतलता लाती है। जब घर में अंधेरा हो तब दीपक को देहरी में रखना चाहिए ताकि प्रकाश अंदर बाहर दोनों तरफ फैलता है। उसी प्रकार जीवन में अंधकार आने पर राम नाम रूपी दीपक को जिव्हा रूपी देहरी पर रखना चाहिए, इससे इहलोक और परलोक दोनों प्रकाशित होगा।
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साध्वी प्रीतम किशोरी ने बताया कि गणेश जी की प्रथम पूज्य होने की दो कथा है, एक में गणेश जी अपने माता पिता की परिक्रमा करते हैं, लेकिन रामचरितमानस के अनुसार गणेश जी ने नारद जी के कहने पर पृथ्वी पर सीता राम लिखकर सात बार परिक्रमा की तब वे प्रथम पूजनीय हुए। इस दौरान आयोजक राजू गुप्ता, रबींद्र गुप्ता अशोक मौर्य, विक्की मिश्र, विकास यादव, बालकेशर मौर्य आदि मौजूद रहे।
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