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गलाघोंटू से बचाव के नहीं हैं पर्याप्त टीके

Fri, 17 Jun 2022 11:28 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jun 2022 11:28 PM IST
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enough vaccine not available
गलाघोंटू से बचाव के नहीं हैं पर्याप्त टीके
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- जिले सवा दो लाख से अधिक हैं गाय और भैंस, टीके 66 हजार
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पशुओं के लिए जानलेवा साबित होने वाले गलाघोटू बीमारी से बचाव के लिए जिले में पर्याप्त प्रर्याप्त मात्रा में टीके नहीं हैं। गाय और भैंस दो प्रजाति के पशुओं की संख्या जनपद में दो लाख से अधिक हैं, लेकिन दो बार में 66 हजार टीके ही मिले हैं। ऐसे में इनती बड़ी संख्या में पशुओं को इस संक्रमण से बचाने की बड़ी चुनौती है। पशुपालक भी पशुओं को गलाघोंटू का टीका न लग पाने के कारण चिंतित हैं।
पशुओं कई प्रकार की संक्रामक बीमारी भी होती है जो मौसम के हिसाब से फैलती है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि मई से अक्तूबर तक का माह पशुओं के लिए काफी संवेदनशील होता है। इसमें उन्हें बुखार सहित कई प्रकार की बीमारी होती है। इसमें गलाघोंटू बहुत ही खतरनाक है। गलाघोंटू बीमारी से पशुओं का बचा पाना काफी मुश्किल होता है। अगर समय से टीकाकरण हुआ करे तो इस बीमारी का खतरा काफी कम हो जाता है। वहीं, जिले में टीके की स्थिति ठीक नहीं है। पशुओं की संख्या पर गौर करें तो दो लाख से अधिक गाय और भैंस हैं। यह विभागीय आंकड़ों में दर्ज है। गलाघोंटू के लिए टीकाकरण शुरू हुआ है, लेकिन दो बार में जिले में केवल 66 हजार टीके ही आए हैं। बड़ी संख्या में अभी पशुओं को गलाघोटू का टीका नहीं लग सका है। पशु कैसे सुरक्षित रहेंगे इसको लेकर पशुपालकों में चिंता सता रही है।
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जोगिया क्षेत्र के पशुपालक राजाराम यादव, रामहित और नरेश कुमार का कहना है कि उनके परिवार के भरण पोषण पशुपालन पर ही निर्भर है। अगर पशु बीमार हो जाते हैं तो बड़ी समस्या हो जाती है। इंसान से अधिक कीमत की दवा इन्हें लगती है। ऐसे में पशुपालक टूट जाता है।
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समय से इलाज पर 10 प्रतिशत बचते हैं पशु
पशु चिकित्सक विभाग से जुड़े जानकारों के मुताबिक अगर किसी पशु को गलाघोंटू हो जाता है, उसे बचाना मुश्किल है। इसमें सबसे पहले पशु खाना बंद कर देता है। जब तक पशुपालक समझ पाता है, तब तक वह दम तोड़ देता है। इस बीमारी के शिकार पशुओं में से 10 प्रतिशत ही बच पाते हैं।

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गलाघोंटू से बचाव के लिए पशुओं का टीकाकरण कराया जा रहा है। पशु चिकित्सा विभाग की टीम कैंप लगाकर टीकाकरण कर रही हैं। दो बार में जिले में 66 हजार टीके मिले हैं।
- डॉ. एमपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सिद्धार्थनगर
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