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विद्युतीकरण कार्य तेज, जल्द दौड़ेगी इलेक्ट्रिक ट्रेन
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विद्युतीकरण कार्य तेज, जल्द दौड़ेगी इलेक्ट्रिक ट्रेन
गोरखपुर-गोंडा रेलखंड का हो रहा विद्युतीकरण
उसका बाजार (सिद्धार्थनगर)। रेलवे के गोरखपुर, गोंडा वाया आनंदनगर, सिद्धार्थनगर के बीच चल रहे रेलवे लाइन के विद्युतीकरण के काम में तेजी आ गई है। गोरखपुर स्टेशन से सिद्धार्थनगर होते हुए गोंडा तक करीब 153 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के विद्युतीकरण का कार्य पूरा होने वाला है। माना जा रहा है कि बिजली से ट्रैन चलेगी तो सफर आसान हो जाएगा।
गोरखपुर-गोंडा रेलखंड का विद्युतीकरण हो रहा है। विद्युतीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। इसके अलावा सभी रेलवे क्रासिंग पर बड़ी गाड़ियों की आवाजाही रोकने के लिए लोहे के बैरिकेड भी लगा दिए गए हैं। बड़ी लाइन में परिवर्तित होने के बाद डीजल इंजन के सहारे ट्रेनों का संचालन हो रहा है। दिल्ली, मुंबई से आने जाने वाली ट्रेनों का इंजन गोंडा में बदलना पड़ता है। इससे ट्रेनें अकसर देर हो जाती थी। डीजल इंजन से ट्रेन 60-70 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से ही चल पाती है, जबकि इलेक्ट्रिक इंजन से चलने पर स्पीड बढ़ जाएगी। इससे यात्रा में समय की बचत होगी। सीआरएस निरीक्षण में रेल लाइन की गुणवत्ता के साथ-साथ स्पीड ट्रायल, सिग्नल सिस्टम आदि की गहन जांच की जाएगी। निरीक्षण सफल रहा तो इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलने लगेंगी।
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गोरखपुर-गोंडा रेलखंड का हो रहा विद्युतीकरण
उसका बाजार (सिद्धार्थनगर)। रेलवे के गोरखपुर, गोंडा वाया आनंदनगर, सिद्धार्थनगर के बीच चल रहे रेलवे लाइन के विद्युतीकरण के काम में तेजी आ गई है। गोरखपुर स्टेशन से सिद्धार्थनगर होते हुए गोंडा तक करीब 153 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के विद्युतीकरण का कार्य पूरा होने वाला है। माना जा रहा है कि बिजली से ट्रैन चलेगी तो सफर आसान हो जाएगा।
गोरखपुर-गोंडा रेलखंड का विद्युतीकरण हो रहा है। विद्युतीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। इसके अलावा सभी रेलवे क्रासिंग पर बड़ी गाड़ियों की आवाजाही रोकने के लिए लोहे के बैरिकेड भी लगा दिए गए हैं। बड़ी लाइन में परिवर्तित होने के बाद डीजल इंजन के सहारे ट्रेनों का संचालन हो रहा है। दिल्ली, मुंबई से आने जाने वाली ट्रेनों का इंजन गोंडा में बदलना पड़ता है। इससे ट्रेनें अकसर देर हो जाती थी। डीजल इंजन से ट्रेन 60-70 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से ही चल पाती है, जबकि इलेक्ट्रिक इंजन से चलने पर स्पीड बढ़ जाएगी। इससे यात्रा में समय की बचत होगी। सीआरएस निरीक्षण में रेल लाइन की गुणवत्ता के साथ-साथ स्पीड ट्रायल, सिग्नल सिस्टम आदि की गहन जांच की जाएगी। निरीक्षण सफल रहा तो इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलने लगेंगी।
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