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Siddharthnagar News: संस्कृत विद्यालयों में बेहतर होगी शिक्षा व्यवस्था, मिलेंगे 16 शिक्षक
Sat, 22 Jul 2023 11:10 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 22 Jul 2023 11:10 PM IST
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सिद्धार्थनगर। संस्कृत विद्यालयों में शिक्षा का माहौल बेहतर बनाने की कवायद शुरू हो गई है। विद्यालयों में रिक्त पड़े शिक्षकों के पदों को भरा जाने लगा है। संविदा के तहत जिले के सात विद्यालयों में शिक्षकों के खाली पड़े पदों पर 16 शिक्षक तैनात किए जाएंगे। अभ्यर्थियों का साक्षात्कार पूरा हो चुका है। जल्द ही तैनाती दी जाएगी।
उपेक्षित और विलुप्त हो रही संस्कृत विषय की शिक्षा और विद्यालयों को बेहतर बनाने की सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। जिले में 19 संस्कृत विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इसमें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों विद्यालय हैं। इनमें अधिकांश विद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त होने के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा था। शिक्षकों की कमी होने की भी वजह से विद्यार्थी चाहते हुए भी संस्कृत विद्यालय में दाखिला नहीं ले रहे थे। कई विद्यालय भी बदहाल होकर अपना अस्तित्व को खोने के कगार पर पहुंच गए हैं। शासन विद्यालयों की दशा सुधारने के साथ ही शिक्षकों के रिक्त पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पहले चरण में जिले के सात विद्यालयों में खाली पड़े शिक्षकों के 16 पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हुई है। इसमें दो दिन साक्षात्कार की प्रक्रिया चली है। जल्द ही चयनित होने वाले शिक्षकों को विद्यालय आवंटित कर दिया जाएगा। चयनित होने वाले शिक्षक संविदा पर तैनात किए जा रहे हैं। जिन्हें शासन की ओर से मानदेय पर रखा जा रहा है।
उम्मीद है कि इनके तैनात होने के बाद संस्कृत विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था बेहतर हो जाएगी और बच्चों को संस्कृत विषय की शिक्षा के प्रति रूझान बढ़ेगा। इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक उपेंद्र कुमार ने बताया शासन के निर्देशानुसार शिक्षकों की तैनाती के लिए साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शासन स्तर से चयन होने के बाद विद्यालयों में तैनाती दी जाएगी।
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विद्यालयों का कायाकल्प करने पर जोर
जर्जर और असतित्व को खोने की कगार पर पहुंच चुके विद्यालयों की सूरत बदलने की भी कवायद शुरू हुई है। जिले के सभी 19 संस्कृत विद्यालयों को कायाकल्प के लिए चिन्ह्ति किया गया है। इसकी रिपोर्ट तैयार करके शासन को भेजा जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही इन मिशन अलंकार के तहत विद्यालयों की तस्वीर बदल जाएगी और यह आदर्श विद्यालय के रूप में दिखेंगे।
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उपेक्षित और विलुप्त हो रही संस्कृत विषय की शिक्षा और विद्यालयों को बेहतर बनाने की सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। जिले में 19 संस्कृत विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इसमें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों विद्यालय हैं। इनमें अधिकांश विद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त होने के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा था। शिक्षकों की कमी होने की भी वजह से विद्यार्थी चाहते हुए भी संस्कृत विद्यालय में दाखिला नहीं ले रहे थे। कई विद्यालय भी बदहाल होकर अपना अस्तित्व को खोने के कगार पर पहुंच गए हैं। शासन विद्यालयों की दशा सुधारने के साथ ही शिक्षकों के रिक्त पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पहले चरण में जिले के सात विद्यालयों में खाली पड़े शिक्षकों के 16 पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हुई है। इसमें दो दिन साक्षात्कार की प्रक्रिया चली है। जल्द ही चयनित होने वाले शिक्षकों को विद्यालय आवंटित कर दिया जाएगा। चयनित होने वाले शिक्षक संविदा पर तैनात किए जा रहे हैं। जिन्हें शासन की ओर से मानदेय पर रखा जा रहा है।
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उम्मीद है कि इनके तैनात होने के बाद संस्कृत विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था बेहतर हो जाएगी और बच्चों को संस्कृत विषय की शिक्षा के प्रति रूझान बढ़ेगा। इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक उपेंद्र कुमार ने बताया शासन के निर्देशानुसार शिक्षकों की तैनाती के लिए साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शासन स्तर से चयन होने के बाद विद्यालयों में तैनाती दी जाएगी।
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विद्यालयों का कायाकल्प करने पर जोर
जर्जर और असतित्व को खोने की कगार पर पहुंच चुके विद्यालयों की सूरत बदलने की भी कवायद शुरू हुई है। जिले के सभी 19 संस्कृत विद्यालयों को कायाकल्प के लिए चिन्ह्ति किया गया है। इसकी रिपोर्ट तैयार करके शासन को भेजा जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही इन मिशन अलंकार के तहत विद्यालयों की तस्वीर बदल जाएगी और यह आदर्श विद्यालय के रूप में दिखेंगे।