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Siddharthnagar News: ईंधन संकट में ई-व्हीकल राहत का जरिया, लेकिन सिस्टम नहीं तैयार
Wed, 20 May 2026 01:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 20 May 2026 01:58 AM IST
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सिद्धार्थनगर। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच ई-व्हीकल लोगों के लिए राहत का विकल्प बन रहे हैं। जिले में बुनियादी सुविधाओं की कमी इसकी रफ्तार बढ़ने नहीं दे रही है।
पांच हजार से अधिक ई-रिक्शा, कार व अन्य इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जबकि पूरे बस्ती मंडल में इनकी संख्या 20 हजार के पार पहुंच चुकी है। इसके बावजूद मंडल में एक भी व्यवस्थित चार्जिंग स्टेशन नहीं है। ऐसे में वाहन चालकों और उपभोक्ताओं को घर या दुकानों पर ही चार्जिंग के भरोसे रहना पड़ रहा है।
जानकारों के मुताबिक, करीब 70 प्रतिशत ई-वाहन घरों और दुकानों से चार्ज किए जा रहे हैं। इससे बिजली नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है और सुरक्षा जोखिम भी पैदा हो रहे हैं। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मंडल में इतने बड़े पैमाने पर ई-वाहन चल रहे हैं, तो चार्जिंग स्टेशन क्यों नहीं बनाए गए।
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करीब एक वर्ष से ई-कार चला रहे सतीश मणि त्रिपाठी बताते हैं कि ई-व्हीकल किफायती होने के साथ पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। इनमें इंजन नहीं होने से कंपन नहीं होता और सफर काफी स्मूद रहता है। लेकिन पूरे मंडल में एक भी चार्जिंग प्वाइंट न होना बड़ी समस्या है। उनका कहना है कि घर से चार्ज करके लंबी दूरी पर निकलने के बाद बीच रास्ते में चार्जिंग की सुविधा नहीं मिलती, जिससे हमेशा एक चिंता बनी रहती है। सस्ता विकल्प साबित हो सकता है। पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते खर्च से राहत मिलती है, लेकिन चार्जिंग की सुविधा न होने से लोग इसे पूरी तरह अपनाने से हिचक रहे हैं।
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पांच हजार से अधिक ई-रिक्शा, कार व अन्य इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जबकि पूरे बस्ती मंडल में इनकी संख्या 20 हजार के पार पहुंच चुकी है। इसके बावजूद मंडल में एक भी व्यवस्थित चार्जिंग स्टेशन नहीं है। ऐसे में वाहन चालकों और उपभोक्ताओं को घर या दुकानों पर ही चार्जिंग के भरोसे रहना पड़ रहा है।
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जानकारों के मुताबिक, करीब 70 प्रतिशत ई-वाहन घरों और दुकानों से चार्ज किए जा रहे हैं। इससे बिजली नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है और सुरक्षा जोखिम भी पैदा हो रहे हैं। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मंडल में इतने बड़े पैमाने पर ई-वाहन चल रहे हैं, तो चार्जिंग स्टेशन क्यों नहीं बनाए गए।
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करीब एक वर्ष से ई-कार चला रहे सतीश मणि त्रिपाठी बताते हैं कि ई-व्हीकल किफायती होने के साथ पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। इनमें इंजन नहीं होने से कंपन नहीं होता और सफर काफी स्मूद रहता है। लेकिन पूरे मंडल में एक भी चार्जिंग प्वाइंट न होना बड़ी समस्या है। उनका कहना है कि घर से चार्ज करके लंबी दूरी पर निकलने के बाद बीच रास्ते में चार्जिंग की सुविधा नहीं मिलती, जिससे हमेशा एक चिंता बनी रहती है। सस्ता विकल्प साबित हो सकता है। पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते खर्च से राहत मिलती है, लेकिन चार्जिंग की सुविधा न होने से लोग इसे पूरी तरह अपनाने से हिचक रहे हैं।