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Siddharthnagar News: नेपाल में बढ़ी मांग तो शुरू हो गई बकरों की भी तस्करी... हो रहे मालामाल
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- मांग को देखते हुए कानपुर और गोंडा, बलरामपुर की मंडी से तस्कर नेपाल पहुंच रहे बकरे
- सीमा पार होते ही डेढ़ गुना हो जाती है कीमत, एक पखवारे में पकड़े गए 400 से अधिक बकरे
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नेपाल में बकरों की मांग बढ़ने के साथ ही तस्करों ने भी अपना खेल शुरू कर दिया है। तस्कर कानपुर, गोंडा और बलरामपुर की मंडी से बकरे खरीदकर बार्डर पार पहुंचा रहे हैं। इसमें उनका पूरा नेटवर्क काम कर रहा है। एक पखवारे में तीन बार में 400 से अधिक बकरों का पकड़ा जाना इस बात की गवाही दे रहा है कि सीमा पर बकरों की तस्करी बढ़ी है। यह तो पकड़ में आने वाले मामले हैं। कई मामले तो पकड़ में भी नहीं आते।
जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगती है। सीमा पर किसी प्रकार की कोई तारबंदी और दीवार नहीं है। असामाजिक तत्व इसका फायदा उठाते हैं और दोनों देशों में जिस सामान की डिमांड बढ़ती है, उसकी तस्करी शुरू हो जाती है। इसमें सोना-चांदी से लेकर मादक पदार्थ और खाद्य पदार्थ तक शामिल हैं। कई बार तस्करी के माल पकड़े भी जाते हैं। बीते पखवारे में तीन बार में एसएसबी और सुरक्षा एजेंसियों ने 400 से अधिक बकरे सीमा पर पकड़े हैं, जिन्हें नेपाल तस्करी करने की कोशिश थी। जांच में पाया गया बकरे ज्यादातर कानपुर और कुछ पड़ोसी जिलों गोंडा और बलरामपुर से आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि वजन और मीट की क्वालिटी के कारण नेपाल में कानपुर के बकरों की डिमांड ज्यादा है।
नेपाल में बढ़ी है मांग
गर्मी की छुट्टी में बड़ी संख्या में लोग नेपाल घूमने पहुंचते हैं। वहां के मौसम में मटन की डिमांड ज्यादा रहती है। चूंकि पहाड़ी इलाका होने के कारण नेपाल में बकरी पालन नहीं होता है। इसलिए इसकी सप्लाई भारत से होती है। तस्कर इसका फायदा उठाते हैं और चोरी छिपे नेपाल पहुंचाकर बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं।
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रेट में है इतना अंतर
भारतीय बाजार में मटन 600-650 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है, जबकि नेपाल में इसकी कीमत 800-900 रुपये प्रति किलो भारतीय मुद्रा और 1200 से 1400 रुपये नेपाली मुद्रा में होती है। सीमा से सटे नेपाल के चाकर चौड़ा में मीट शॉप चलाने वाले अल्ताफ ने बताया कि यहां पर पालन बहुत कम होता है। इसलिए भारत से ही बकरे आते हैं। यही वजह है कि मीट का दाम अधिक है।
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इस प्रकार से कम करता है नेटवर्क
तस्करी के इस खेल में पूरा नेटवर्क काम कर रहा है। सबका अलग-अलग काम और उसी हिसाब से कमीशन तय होता है। मंडी में खरीदता कोई और है, पहुंचाता कोई दूसरा है। बार्डर तक छोड़ने वाला तीसरा होता है तो बार्डर पार करनेवाला चौथा व्यक्ति होता है। इस पूरे चैनल में बार्डर क्षेत्र के बच्चे, वृद्ध भी शामिल होते हैं जो चराने के बहाने सीमा पार कर देते हैं। उन्हें हर बकरे पर 30 से 50 रुपये तक कमीशन मिलता है। इसके बाद बार्डर पार नेपाल का चैनल शुरू हो जाता है।
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बोले जिम्मेदार
बार्डर पर सीमावर्ती थानों की पुलिस पूरी तरह से अलर्ट है। एसएसबी के साथ संयुक्त पेट्रोलिंग की जाती है। पकड़े जाने वालों पर कार्रवाई की जाती है।
सिद्धार्थ, अपर पुलिस अधीक्षक
- सीमा पार होते ही डेढ़ गुना हो जाती है कीमत, एक पखवारे में पकड़े गए 400 से अधिक बकरे
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नेपाल में बकरों की मांग बढ़ने के साथ ही तस्करों ने भी अपना खेल शुरू कर दिया है। तस्कर कानपुर, गोंडा और बलरामपुर की मंडी से बकरे खरीदकर बार्डर पार पहुंचा रहे हैं। इसमें उनका पूरा नेटवर्क काम कर रहा है। एक पखवारे में तीन बार में 400 से अधिक बकरों का पकड़ा जाना इस बात की गवाही दे रहा है कि सीमा पर बकरों की तस्करी बढ़ी है। यह तो पकड़ में आने वाले मामले हैं। कई मामले तो पकड़ में भी नहीं आते।
जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगती है। सीमा पर किसी प्रकार की कोई तारबंदी और दीवार नहीं है। असामाजिक तत्व इसका फायदा उठाते हैं और दोनों देशों में जिस सामान की डिमांड बढ़ती है, उसकी तस्करी शुरू हो जाती है। इसमें सोना-चांदी से लेकर मादक पदार्थ और खाद्य पदार्थ तक शामिल हैं। कई बार तस्करी के माल पकड़े भी जाते हैं। बीते पखवारे में तीन बार में एसएसबी और सुरक्षा एजेंसियों ने 400 से अधिक बकरे सीमा पर पकड़े हैं, जिन्हें नेपाल तस्करी करने की कोशिश थी। जांच में पाया गया बकरे ज्यादातर कानपुर और कुछ पड़ोसी जिलों गोंडा और बलरामपुर से आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि वजन और मीट की क्वालिटी के कारण नेपाल में कानपुर के बकरों की डिमांड ज्यादा है।
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नेपाल में बढ़ी है मांग
गर्मी की छुट्टी में बड़ी संख्या में लोग नेपाल घूमने पहुंचते हैं। वहां के मौसम में मटन की डिमांड ज्यादा रहती है। चूंकि पहाड़ी इलाका होने के कारण नेपाल में बकरी पालन नहीं होता है। इसलिए इसकी सप्लाई भारत से होती है। तस्कर इसका फायदा उठाते हैं और चोरी छिपे नेपाल पहुंचाकर बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं।
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रेट में है इतना अंतर
भारतीय बाजार में मटन 600-650 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है, जबकि नेपाल में इसकी कीमत 800-900 रुपये प्रति किलो भारतीय मुद्रा और 1200 से 1400 रुपये नेपाली मुद्रा में होती है। सीमा से सटे नेपाल के चाकर चौड़ा में मीट शॉप चलाने वाले अल्ताफ ने बताया कि यहां पर पालन बहुत कम होता है। इसलिए भारत से ही बकरे आते हैं। यही वजह है कि मीट का दाम अधिक है।
इस प्रकार से कम करता है नेटवर्क
तस्करी के इस खेल में पूरा नेटवर्क काम कर रहा है। सबका अलग-अलग काम और उसी हिसाब से कमीशन तय होता है। मंडी में खरीदता कोई और है, पहुंचाता कोई दूसरा है। बार्डर तक छोड़ने वाला तीसरा होता है तो बार्डर पार करनेवाला चौथा व्यक्ति होता है। इस पूरे चैनल में बार्डर क्षेत्र के बच्चे, वृद्ध भी शामिल होते हैं जो चराने के बहाने सीमा पार कर देते हैं। उन्हें हर बकरे पर 30 से 50 रुपये तक कमीशन मिलता है। इसके बाद बार्डर पार नेपाल का चैनल शुरू हो जाता है।
बोले जिम्मेदार
बार्डर पर सीमावर्ती थानों की पुलिस पूरी तरह से अलर्ट है। एसएसबी के साथ संयुक्त पेट्रोलिंग की जाती है। पकड़े जाने वालों पर कार्रवाई की जाती है।
सिद्धार्थ, अपर पुलिस अधीक्षक