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Siddharthnagar News: नशे के धंधेबाज सक्रिय... नेपाल से चरस लाकर सीमावर्ती क्षेत्र में बेच रहे तस्कर
Sun, 26 Jan 2025 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 26 Jan 2025 12:04 AM IST
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सिद्धार्थनगर। सीमावर्ती क्षेत्र में एक भी फिर नशे के धंधेबाज सक्रिय हो गए हैं। नेपाल के कैरियर वहां से चरस लाकर सीमावर्ती क्षेत्र के चुनिंदा युवाओं को बेच रहे हैं। बृहस्पतिवार रात बढ़नी बॉर्डर पर सवा किलो चरस के साथ दो युवक पकड़े गए थे, जो नेपाल के रहने वाले थे। उन्होंने नेपाल से चरस लाने की बात स्वीकार की है। सूत्रों के मुताबिक छोटा- छोटा पैकेट बनाकर कुछ लोगों को देते हैं, जो चौराहों और कस्बों में बेचते हैं। नशे के धंधेबाजों का सक्रिय होना एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों को सकते में डाल दिया है। क्योंकि एक बार मामला पकड़ में आने के बाद एक-एक करके कई मामले सामने आते हैं।
नेपाल से लगने वाली जिले की 68 किलोमीटर सीमा पर तस्करों की नजर है। सुरक्षा एजेंसियाें की सक्रियता के बाद कुछ मामले पकड़े में आ जाते हैं। वहीं न जाने कितने तस्कर चकमा देकर निकल जाते हैं। मांग के हिसाब से खाद्य, साेना, चांदी और उर्वरक और मादक पदार्थ की तस्करी होती है। जब धरकड़ तेज होती है तो तस्कर कुछ समय के लिए शांत हो जाते हैं। जैसे ही सक्रियता कम हुई फिर धंधा तेज कर देते हैं।
तस्कर कई बार दूसरे चेहरे को फील्ड में उतार देते हैं। क्योंकि बार-बार जाने वाले तस्करों को पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पहचान कर दबोच लेती हैं। एक बार फिर सीमावर्ती इलाके में मादक पदार्थ के तस्कर सक्रिय हो गए हैं। बृहस्पतिवार रात सवा किलो चरस के साथ दो तस्कर पकड़े गए। ये नेपाल के ही रहने वाले हैं। सूत्रों की मानें तो यह लोग डिलिवरी करने के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि बताए वह तस्कर को देकर निकल जाते। इनके पकड़े जाने के बाद पुलिस तस्करों के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। वहीं, जब तस्करी के बारे में जानकारी ली गई तो कई चौकाने वाली बात सामने आई। पता चला कि इसमें पूरा नेटवर्क काम कर रहा है।
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यहां से जुड़ा है धंधे का नेटवर्क
नेपाल के बार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक नेपाल के पहाड़ी इलाके भालू बांग, अर्घाखांची, दांग सहित अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में गाजा के साथ चरस की खेती नेपाल के लोग करते हैं। चरस की कटाई कर नेपाल के तराई क्षेत्र के बहादुरगंज, चंद्रौटा में इस चरस को आधुनिक मशीन से तैयार होता है। वहां के व्यापारी नेपाल के बड़े-बड़े बार, होटल और कैसिनो में भेजते हैं। चरस की मांग भारत में भी है। इस धंधे से जुड़े भारतीय कैरियर के माध्यम से नेपाल से भारत पार करवाते हैं। उसके बाद यही चरस गोवा, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, पंजाब, सहित देश के अगल-अलग राज्य में भेजी जाती है। इस धंधे से जुड़े लोग चरस को बेच कर मोटी कमाई करते हैं।
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ऑनलाइन पेमेंट का है चलन
नेपाल के महेश थापा के मुताबिक अवैध कारोबार का सौदा अब डिजिटल हो गया है। किसी भी माल की आपूर्ति के लिए पेमेंट ऑनलाइन माध्यम से हो जाता है, जिसके एक्सचेंज करने की व्यवस्था है। ऐसा इसलिए की सौदा होने के बाद कोई रुपये न फंसाने पाए, इसमें लोगों का भारतीय बैंकों में खाता भी है, जिसके जरिये रुपये निकल जाता है। इसमें मादक पदार्थ और कपड़े के धंधे में ऑनलाइन पेमेंट किया जाता है।
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बोले जिम्मेदार
सीमा पर चेकिंग की जा रही है। पकड़े गए आरोपियों की भूमिका के बारे में जानकारी ली जा रही है। उनके नेटवर्क और आपूर्ति की जांच की जा रही है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- संतोष कुमार सिंह, एसओ, ढेबरुआ
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नेपाल से लगने वाली जिले की 68 किलोमीटर सीमा पर तस्करों की नजर है। सुरक्षा एजेंसियाें की सक्रियता के बाद कुछ मामले पकड़े में आ जाते हैं। वहीं न जाने कितने तस्कर चकमा देकर निकल जाते हैं। मांग के हिसाब से खाद्य, साेना, चांदी और उर्वरक और मादक पदार्थ की तस्करी होती है। जब धरकड़ तेज होती है तो तस्कर कुछ समय के लिए शांत हो जाते हैं। जैसे ही सक्रियता कम हुई फिर धंधा तेज कर देते हैं।
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तस्कर कई बार दूसरे चेहरे को फील्ड में उतार देते हैं। क्योंकि बार-बार जाने वाले तस्करों को पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पहचान कर दबोच लेती हैं। एक बार फिर सीमावर्ती इलाके में मादक पदार्थ के तस्कर सक्रिय हो गए हैं। बृहस्पतिवार रात सवा किलो चरस के साथ दो तस्कर पकड़े गए। ये नेपाल के ही रहने वाले हैं। सूत्रों की मानें तो यह लोग डिलिवरी करने के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि बताए वह तस्कर को देकर निकल जाते। इनके पकड़े जाने के बाद पुलिस तस्करों के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। वहीं, जब तस्करी के बारे में जानकारी ली गई तो कई चौकाने वाली बात सामने आई। पता चला कि इसमें पूरा नेटवर्क काम कर रहा है।
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यहां से जुड़ा है धंधे का नेटवर्क
नेपाल के बार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक नेपाल के पहाड़ी इलाके भालू बांग, अर्घाखांची, दांग सहित अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में गाजा के साथ चरस की खेती नेपाल के लोग करते हैं। चरस की कटाई कर नेपाल के तराई क्षेत्र के बहादुरगंज, चंद्रौटा में इस चरस को आधुनिक मशीन से तैयार होता है। वहां के व्यापारी नेपाल के बड़े-बड़े बार, होटल और कैसिनो में भेजते हैं। चरस की मांग भारत में भी है। इस धंधे से जुड़े भारतीय कैरियर के माध्यम से नेपाल से भारत पार करवाते हैं। उसके बाद यही चरस गोवा, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, पंजाब, सहित देश के अगल-अलग राज्य में भेजी जाती है। इस धंधे से जुड़े लोग चरस को बेच कर मोटी कमाई करते हैं।
ऑनलाइन पेमेंट का है चलन
नेपाल के महेश थापा के मुताबिक अवैध कारोबार का सौदा अब डिजिटल हो गया है। किसी भी माल की आपूर्ति के लिए पेमेंट ऑनलाइन माध्यम से हो जाता है, जिसके एक्सचेंज करने की व्यवस्था है। ऐसा इसलिए की सौदा होने के बाद कोई रुपये न फंसाने पाए, इसमें लोगों का भारतीय बैंकों में खाता भी है, जिसके जरिये रुपये निकल जाता है। इसमें मादक पदार्थ और कपड़े के धंधे में ऑनलाइन पेमेंट किया जाता है।
बोले जिम्मेदार
सीमा पर चेकिंग की जा रही है। पकड़े गए आरोपियों की भूमिका के बारे में जानकारी ली जा रही है। उनके नेटवर्क और आपूर्ति की जांच की जा रही है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- संतोष कुमार सिंह, एसओ, ढेबरुआ