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सिद्धार्थनगर में खुले में फेंक रहे मेडिकल वेस्ट
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 11 Dec 2017 10:35 PM IST
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जिला असपताल में फेंकी गई उपयोगी में ली गई सुई।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। जिला अस्पताल में मरीजों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। अस्पतकाल में इस्तेमाल होने वाली सुई-दवा के अपशिष्ट के निस्तारण के मुकम्मल इंतजाम नहीं है। उसे कहीं खुले में फेंक दिया जा रहा है तो कहीं एकत्रित कर आग लगा दी जा रही है। खुले में फेंका मेडिकल वेस्ट तो खतरनाक है ही, इसे जलाने से हो रहा प्रदूषण और भी नुकसानदायक है। दूसरों की सेहत सुधारने का जिम्मा संभाले महकमे के जिम्मेदारों की नाक के नीचे यह लापरवाही चिंताजनक है। हैरानी तो इस बात की है कि शिकायत के बाद भी वह समुचित कदम उठाने की बजाए, मामले को टालने पर अमादा हैं।
सौ बेड वाले जिला अस्पताल में इमरजेंसी, जनरल, सर्जिकल, बर्न, आईसीयू आदि वार्डों में सामान्य दिनों में औसतन 30-35 मरीज भर्ती रहते हैं। अस्पताल में मरीजों को लगने वाले इंजेक्शन, पानी की बोतल, अन्य दवाओं व मरीजों की तीमारदारों द्वारा खाने-पीने सामान सहित सामान्य दिनों में एक से डेढ़ कुंतल कचरा एकत्र होता है। इसमें 40 किलो वेस्ट इंजेक्शन, बोतल व दवा के अवशेष का होता है। बावजूद यहां बॉयो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर उचित प्रबंध नहीं है। निकलने वाला मेडिकल बेस्ट अधिकांश समय तक वार्ड में इधर-उधर पड़ा रहता है। वहां से उठाकर अस्पताल परिसर में खुले स्थान पर फेंक दिया जाता है।
उपयोग हो चुके इंजेक्शन का निडिल वैसा पड़ा रहता है, जो संक्रमण फैलाने के लिए काफी है। मरीजों के खून के संपर्क में आई निडिल भूलवश भी किसी अन्य व्यक्ति के स्पर्श में आ जाए तो उसे गंभीर बीमारी हो सकती है। मगर इसकी फ्रिक यहां किसी को भी नहीं है। इस संबंध में सीएमएस डॉ.रोचस्मति पांडेय ने कहा कि वार्डों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को रखने के लिए अलग-अलग डस्टबीन रखा गया है। उसे एक निश्चित स्थान पर रखवाया जाता है। इसके बाद उसे नष्ट कर दिया जाता है। वार्ड में खुले में मेडिकल वेस्ट नहीं फेंका जाता है। वैसे हर वक्त किसी पर निगाह भी नहीं रखा जा सकता है।
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सौ बेड वाले जिला अस्पताल में इमरजेंसी, जनरल, सर्जिकल, बर्न, आईसीयू आदि वार्डों में सामान्य दिनों में औसतन 30-35 मरीज भर्ती रहते हैं। अस्पताल में मरीजों को लगने वाले इंजेक्शन, पानी की बोतल, अन्य दवाओं व मरीजों की तीमारदारों द्वारा खाने-पीने सामान सहित सामान्य दिनों में एक से डेढ़ कुंतल कचरा एकत्र होता है। इसमें 40 किलो वेस्ट इंजेक्शन, बोतल व दवा के अवशेष का होता है। बावजूद यहां बॉयो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर उचित प्रबंध नहीं है। निकलने वाला मेडिकल बेस्ट अधिकांश समय तक वार्ड में इधर-उधर पड़ा रहता है। वहां से उठाकर अस्पताल परिसर में खुले स्थान पर फेंक दिया जाता है।
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उपयोग हो चुके इंजेक्शन का निडिल वैसा पड़ा रहता है, जो संक्रमण फैलाने के लिए काफी है। मरीजों के खून के संपर्क में आई निडिल भूलवश भी किसी अन्य व्यक्ति के स्पर्श में आ जाए तो उसे गंभीर बीमारी हो सकती है। मगर इसकी फ्रिक यहां किसी को भी नहीं है। इस संबंध में सीएमएस डॉ.रोचस्मति पांडेय ने कहा कि वार्डों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को रखने के लिए अलग-अलग डस्टबीन रखा गया है। उसे एक निश्चित स्थान पर रखवाया जाता है। इसके बाद उसे नष्ट कर दिया जाता है। वार्ड में खुले में मेडिकल वेस्ट नहीं फेंका जाता है। वैसे हर वक्त किसी पर निगाह भी नहीं रखा जा सकता है।
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