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बढ़ गए डॉक्टर, फिर भी मरीजों की लंबी कतार
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बढ़ गए डॉक्टर, फिर भी मरीजों की लंबी कतार
सिद्धार्थनगर। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों की संख्या भी बढ़ गई है। इसके बाद भी मरीजों की लंबी कतार लग रही है। इसके पीछे रेजीडेंट डॉक्टरों के बैठने के लिए ओपीडी कक्ष का अभाव प्रमुख कारण माना जा रहा है। सोमवार को आए 548 मरीजों के उपचार में 30 डॉक्टरों ने योगदान दिया।
निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य और वित्त नियंत्रक की तैनाती के बाद से जिला अस्पताल में मेडिकल कॉलेज की ओपीडी भी शुरू हो चुकी है। जिला चिकित्सालयों में पहले से तैनात चिकित्सकों के अलावा रेजीडेंट डॉक्टरों के ओपीडी शुरू होने के बाद भी चिकित्सकों के कमरों में लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। जिला अस्पताल में पहले से विभागीय 30 और संविदा के पांच डॉक्टर तैनात हैं। साथ ही 21 रेजीडेंट चिकित्सकों की नियुक्ति हो चुकी है।
इसके बाद भी ओपीडी के कक्ष में भीड़ कम नहीं हो रही है। इसके पीछे कमरों की संख्या पुरानी और चिकित्सकों की संख्या में बढ़ोतरी प्रमुख कारण है। हालत यह है कि एक-एक कमरे में तीन से चार चिकित्सक एक साथ बैठकर ओपीडी करने को मजबूर हैं। सोमवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों से उपचार कराने पहुंचे 548 मरीजों में अधिकांश की भीड़ फिजीशियन, हड्डी, आंख, बाल रोग, स्त्री रोग से जुड़े डॉक्टरों के कमरों में रही।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीना वर्मा ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति रेजीडेंट चिकित्सकों के ओपीडी में बैठने से कमरों का अभाव है। इसके बाद भी समयसारिणी तय करते हुए सभी को उपचार देने के लिए निर्देशित किया गया है। मरीजों और तीमारदारों को कोविड-19 को प्रोटोकाल का पालन करने के लिए मुख्य द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग कराई जा रही है।
कोविड प्रोटोकाल का पालन नहीं
कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर किसी भी समय आने की आशंका जताई जा रही है। इसके बाद भी जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों और तीमारदारों को कोरोना का भय नहीं है। पर्चा कटवाने से लेकर चिकित्सकों और पैथोलॉजी कक्ष में जांच कराने के दौरान शारीरिक दूरी का पालन नहीं किया जा रहा है। इस दौरान कई के चेहरे पर मास्क भी नहीं था।
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सिद्धार्थनगर। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों की संख्या भी बढ़ गई है। इसके बाद भी मरीजों की लंबी कतार लग रही है। इसके पीछे रेजीडेंट डॉक्टरों के बैठने के लिए ओपीडी कक्ष का अभाव प्रमुख कारण माना जा रहा है। सोमवार को आए 548 मरीजों के उपचार में 30 डॉक्टरों ने योगदान दिया।
निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य और वित्त नियंत्रक की तैनाती के बाद से जिला अस्पताल में मेडिकल कॉलेज की ओपीडी भी शुरू हो चुकी है। जिला चिकित्सालयों में पहले से तैनात चिकित्सकों के अलावा रेजीडेंट डॉक्टरों के ओपीडी शुरू होने के बाद भी चिकित्सकों के कमरों में लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। जिला अस्पताल में पहले से विभागीय 30 और संविदा के पांच डॉक्टर तैनात हैं। साथ ही 21 रेजीडेंट चिकित्सकों की नियुक्ति हो चुकी है।
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इसके बाद भी ओपीडी के कक्ष में भीड़ कम नहीं हो रही है। इसके पीछे कमरों की संख्या पुरानी और चिकित्सकों की संख्या में बढ़ोतरी प्रमुख कारण है। हालत यह है कि एक-एक कमरे में तीन से चार चिकित्सक एक साथ बैठकर ओपीडी करने को मजबूर हैं। सोमवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों से उपचार कराने पहुंचे 548 मरीजों में अधिकांश की भीड़ फिजीशियन, हड्डी, आंख, बाल रोग, स्त्री रोग से जुड़े डॉक्टरों के कमरों में रही।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीना वर्मा ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति रेजीडेंट चिकित्सकों के ओपीडी में बैठने से कमरों का अभाव है। इसके बाद भी समयसारिणी तय करते हुए सभी को उपचार देने के लिए निर्देशित किया गया है। मरीजों और तीमारदारों को कोविड-19 को प्रोटोकाल का पालन करने के लिए मुख्य द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग कराई जा रही है।
कोविड प्रोटोकाल का पालन नहीं
कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर किसी भी समय आने की आशंका जताई जा रही है। इसके बाद भी जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों और तीमारदारों को कोरोना का भय नहीं है। पर्चा कटवाने से लेकर चिकित्सकों और पैथोलॉजी कक्ष में जांच कराने के दौरान शारीरिक दूरी का पालन नहीं किया जा रहा है। इस दौरान कई के चेहरे पर मास्क भी नहीं था।