फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Deception in the name of getting pure drinking water

शुद्ध पेयजल के नाम पर हो रहा छल

Fri, 23 Dec 2016 10:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Fri, 23 Dec 2016 10:18 PM IST
विज्ञापन
Deception in the name of getting pure drinking water
जिला पंचायत सभागार में शुक्रवार को जिला योजना की बैठक लेते सपा के प्रभारी मंत्री रामसकल गुर्जर व डीएम। - फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की सरकारी योजना जिले में तार-तार हो रही है। स्वच्छ पानी को लेकर जिले स्तर से ग्राम पंचायत तक कई योजनाएं चल रही हैं, बावजूद पीने का पानी बाजार के हवाले है। जिले में लगभग 220 मिनरल वाटर प्लांट चल रहे हैं, जिनमें से महज 50 ही वाणिज्य कर विभाग में पंजीकृत हैं। शेष पानी के कर मुक्त होने का लाभ उठा रहे हैं।
विज्ञापन

जिला मुख्यालय पर नगर पालिका ने जलापूर्ति के लिए चार पंप लगा रखे हैं पर लोगों का भरोसा सप्लाई से मिलने  वाले पानी की जगह बाजार के पानी के डिब्बे पर है। यहां कुल 25 प्लांट चल रहे हैं और पंजीयन महज 20 का है। यही स्थिति तहसील मुख्यालयों का भी है, जबकि पंजीयन में सहूलियत के लिए विभाग ने दो भाग में जिले को विभक्त किया है। वाटर प्लांट के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की भी यह जिम्मेदारी है कि वह जांच करे और मानकों की अनदेखी पर कार्रवाई भी। मगर पंजीयन कम होने के कारण विभाग भी जांच की जहमत नहीं उठाता।
विज्ञापन

नियम को किनारे रखकर जैसे-तैसे डिब्बा बंद पानी लोगों को बेचा जा रहा, जिसके सेवन से स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। जिला अस्पताल की चिकित्सक डॉ. सीमा मिश्र का कहना है कि पानी जनित रोगों से सुरक्षा के लिए शुद्ध जल का सेवन जरूरी है, मगर ज्यादातर इसकी अनदेखी हो रही है, जिससे लोग बीमार भी हो रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में शुद्ध पेयजल की गुणवत्ता निर्धारण के लिए पेयजल स्वच्छता समिति के गठन का नियम है, पर यह समितियां कागजों में चल रहीं है। इससे लोग दूषित पेयजल अथवा खरीदकर पानी पीने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

शासन की ओर से हर खंड विकास कार्यालयों को गांव का चयन कर पीने योग्य पानी की व्यवस्था के लिए प्रपोजल भेजने का नियम है, मगर मौजूदा सत्र में बर्डपुर का इकलौता गांव चकइजोत ही चयनित हुआ जो विभागीय सक्रियता की बानगी है। विभागीय लापरवाही के बीच वाटर प्लांट हर गली-मोहल्ले तक पानी पहुंचा रहे हैं। यह पानी कितना सुरक्षित है, इसकी जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग मौन हैं। वाणिज्य कर के सहायक आयुक्त निखिल वाजपेई का कहना है कि पूरे जिले में 50 वाटर प्लांट पंजीेकृत हैं। शेष सभी प्लांट गैर कानूनी ढंग से चल रहे हैं।

जांच करवाकर प्लांट संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी। बीडीओ नौगढ़ संतोष कुमार का कहना है कि शासन के निर्देश पर कुछ गांव में पेयजल की उपलब्धता के लिए प्रपोजल भेजा गया है। चयनित गांवों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था निर्धारित की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed