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आठ माह में दहेज की भेंट चढ़ी 23 बेटियां
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 28 Aug 2016 10:37 PM IST
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दहेज के लिए बहू को जहर देकर मार डाला
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सिद्धार्थनगर। पैसे का लोभ बेटियों के जीवन पर भारी पड़ रहा है। दहेज के लिए उनकी हत्या हो रही है। शासन-प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी यह सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। दुनिया भर में दया, करुणा और शांति का संदेश देने वाले महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली पर स्थिति और भी खराब है। आंकड़ें बताते हैं कि पिछले आठ महीनों में जिले में 23 बेटियों को दहेज की वेदी पर बलि चढ़ा दी गई है। दहेज हत्या की यह संख्या गत वर्ष के आंकड़ों से भी अधिक है।
केंद्र और प्रदेश की सरकारें जहां बेटी बचाओ-बेटी बढ़ाओ अभियान पर जोर दे रही हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों की स्थिति अब भी वही है। विवाह के बाद उन्हें दहेज लोभियों की हैवानियत का शिकार होना पड़ रहा है। पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष जनवरी से अगस्त माह तक पूरे जिले में कुल 23 दहेज हत्याएं हुई हैं। इसमें सर्वाधिक सात मामले बांसी कोतवाली क्षेत्र की हैं। इटवा और त्रिलोकपुर में दहेज हत्या के तीन-तीन मामले दर्ज किए हैं।
यह सिर्फ वही आंकड़े हैं, जो पुलिस रिकार्ड तक पहुंचे हैं। इनके अलावा भी नवविवाहिताओं के हत्या की कई घटनाएं हुईं, लेकिन सामाजिक दबाव के चलते उसे पुलिस रिकार्ड तक पहुंचने से पहले ही रफा-दफा कर दिया गया। बता दें कि वर्ष 2015 में जनवरी से अगस्त तक दहेज हत्या के कुल 18 मामले दर्ज हुए थे। बुद्ध की धरा पर दहेज हत्या के बढ़ते मामले न सिर्फ सामाजिक माहौल को उजागर कर रही है, बल्कि सरकार के जागरूकता कार्यक्रमों की भी पोल खोल रही है।
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केंद्र और प्रदेश की सरकारें जहां बेटी बचाओ-बेटी बढ़ाओ अभियान पर जोर दे रही हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों की स्थिति अब भी वही है। विवाह के बाद उन्हें दहेज लोभियों की हैवानियत का शिकार होना पड़ रहा है। पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष जनवरी से अगस्त माह तक पूरे जिले में कुल 23 दहेज हत्याएं हुई हैं। इसमें सर्वाधिक सात मामले बांसी कोतवाली क्षेत्र की हैं। इटवा और त्रिलोकपुर में दहेज हत्या के तीन-तीन मामले दर्ज किए हैं।
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यह सिर्फ वही आंकड़े हैं, जो पुलिस रिकार्ड तक पहुंचे हैं। इनके अलावा भी नवविवाहिताओं के हत्या की कई घटनाएं हुईं, लेकिन सामाजिक दबाव के चलते उसे पुलिस रिकार्ड तक पहुंचने से पहले ही रफा-दफा कर दिया गया। बता दें कि वर्ष 2015 में जनवरी से अगस्त तक दहेज हत्या के कुल 18 मामले दर्ज हुए थे। बुद्ध की धरा पर दहेज हत्या के बढ़ते मामले न सिर्फ सामाजिक माहौल को उजागर कर रही है, बल्कि सरकार के जागरूकता कार्यक्रमों की भी पोल खोल रही है।
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