बीएसए कार्यालय में चोरी करने वाले चार गिरफ्तार
एसपी डॉ. धर्मबीर सिंह ने मंगलवार को पुलिस लाइंस में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि 27 अगस्त को बीएसए राम सिंह ने पुलिस को कार्यालय के एक कक्ष व अभिलेखों के बक्से की कुंडी टूटने की सूचना दी थी। इसमें 16448 सहायक शिक्षकों की भर्ती के मूल अभिलेख रखे हुए थे। एसपी ने बताया कि जिले में फर्जी शिक्षकों की भर्ती की जांच चल रही है। अब तक 38 फर्जी शिक्षक बर्खास्त किए जा चुके हैं। ऐसे में स्पष्ट था कि ताला फर्जी शिक्षकों से संबंधित पत्रावली व अभिलेखों को नष्ट करने अथवा गायब करने के उद्देश्य से तोड़ा गया था। इस मामले में सदर थाने में चोरी के प्रयास सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू हुई। सदर पुलिस और स्वाट टीम की छानबीन में चोरी की कोशिश के मामले में चार लोगों को चिह्नित किया गया था। स्वाट टीम को मंगलवार सुबह इन लोगों के नगर के अर्धनिर्मित केंद्रीय विद्यालय के पास मौजूद होने की सूचना मिली। स्वाट प्रभारी दीपक दुबे के नेतृत्व में टीम उक्त स्थान पर पहुंची और चारों लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में चपरासी योगेंद्र कुमार साहनी निवासी वार्ड नंबर एक, रुदलापुर थाना फरेंदा जिला महराजगंज, बर्खास्त सहायक शिक्षक विवेक राय निवासी चवरछापर थाना बनकटा, शिक्षक विवेक सिंह निवासी कणसर थाना पकड़ी जनपद बलिया और संतोष सिंह उर्फ मिथुन निवासी कुईचवर थाना भाटपाररानी जनपद देवरिया शामिल हैं। विवेक प्राथमिक विद्यालय सजनी विकास खंड उस्का में तैनात है। एसपी ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने बर्खास्त शिक्षकों की फाइल चुराने के लिए ताला तोड़ा था। इसमें चपरासी योगेंद्र कुमार साहनी का सहयोग लिया गया था। पूछताछ के बाद चारों को जेल भेज दिया गया है।
फर्जी शिक्षक भर्ती का मास्टरमाइंड है देवरिया का धर्मेंद्र
एसपी ने बताया कि फर्जी शिक्षक भर्ती का मास्टरमाइंड देवरिया जिले के भाटपाररानी का रहने वाला धर्मेंद्र सिंह है। मामले की जांच शुरू होने के बाद से वह फरार है। पुलिस अधीक्षक ने दावा किया कि उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र पर पूर्वांचल के कई जिलों में फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए शिक्षक के पद पर कई लोगों की नियुक्ति कराने का आरोप है। उसके पकड़े जाने के बाद इस मामले में शामिल कई लोगों का पर्दाफाश होगा।