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Siddharthnagar News: कोडीनयुक्त सिरप पर कसा शिकंजा तो नकली दवाओं की बढ़ी तस्करी

Tue, 21 Jul 2026 11:46 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 21 Jul 2026 11:46 PM IST
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Crackdown on codeine-based syrups leads to a rise in the smuggling of counterfeit medicines.
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा वर्षों से प्रतिबंधित कोडीनयुक्त कफ सिरप, नशीले इंजेक्शन और मादक दवाओं की तस्करी को लेकर सुर्खियों में रही है। अब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की हालिया जांच में नकली और संदिग्ध दवाओं की सप्लाई का नया नेटवर्क सामने आने के बाद सीमावर्ती सिद्धार्थनगर भी चर्चा के केंद्र में है।
जांच में महराजगंज और सिद्धार्थनगर के रास्ते नेपाल तक दवाओं की खेप पहुंचने के संकेत मिलने के बाद सीमा से लगे मेडिकल स्टोरों, थोक दवा कारोबार और पूरी सप्लाई चेन पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
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हाल में एफएसडीए ने प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 3.63 करोड़ रुपये की नकली और अवैध दवाएं बरामद कीं। जांच में सरकारी अस्पतालों की दवाओं की कालाबाजारी, री-लेबलिंग, फर्जी बिलिंग और नकली दवाओं के कारोबार का खुलासा हुआ। इसी जांच के दौरान महराजगंज और सिद्धार्थनगर के रास्ते नेपाल तक दवाओं की सप्लाई के संकेत भी सामने आए हैं।
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सूत्रों के अनुसार कई दवाओं के नमूनों में सक्रिय औषधीय तत्व (ड्रग कंटेंट) नाममात्र का मिला, जबकि कुछ मामलों में एक्सपायरी के करीब पहुंच चुकी दवाओं पर नया रैपर लगाकर दोबारा बाजार में उतारने की आशंका भी जताई गई है।
करीब 68 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल सीमा वाले सिद्धार्थनगर में खुनुवां, बढ़नी, ककरहवा और अलीगढ़वा जैसे अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर प्वाइंट हैं। रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही के कारण यह इलाका व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है लेकिन यही खुलापन अवैध कारोबारियों के लिए भी अवसर बन जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नकली या प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई सीमा तक पहुंच रही है तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि सीमा सुरक्षा के लिए भी चुनौती है।

सीमा पर आबादी से तेज बढ़े मेडिकल स्टोर : पिछले पांच वर्षों में सीमा से सटे इलाकों में मेडिकल स्टोर और क्लीनिकों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
जानकारी के अनुसार खुनुवां क्षेत्र में पहले जहां करीब 20 मेडिकल स्टोर थे, अब उनकी संख्या 40 से अधिक हो चुकी है। बढ़नी, ककरहवा और अलीगढ़वा क्षेत्र में भी मेडिकल स्टोरों की संख्या लगभग दोगुनी बताई जाती है। लोग कहते हैं कि मेडिकल स्टोरों की संख्या बढ़ना अपने आप में गलत नहीं है लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में आबादी की तुलना में तेजी से बढ़ी दुकानों ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
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