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Siddharthnagar News: तटबंध में दरार... तबाही की चेतावनी टूटने पर पलक झपकते डूब जाएंगे गांव
Sun, 31 May 2026 02:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 31 May 2026 02:05 AM IST
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सिद्धार्थनगर/बांसी। बाढ़ से सुरक्षा के लिए नदियों किनारे बने बांध में रेन कट और रैट होल हैं तो समझिए यह तबाही अलार्म है। जिले में इन बांधों के हालात आसपास के गांव के लोगों के डर को बढ़ा रहे हैं।
नदियों का जलस्तर बढ़ने पर अत्याधिक दबाव से इनके टूटने पर आसपास के गांव पलक झपकते ही डूब जाएंगे और बड़े पैमाने पर तबाही मचेगी। बीते वर्षों में बांध टूटने से बड़ी तबाही मची थी, जिसका मंजर याद कर बाढ़ पीड़ित आज भी कांप उठते हैं। बांसी क्षेत्र में राप्ती व बूढ़ी राप्ती नदियों के तट पर बने बांसी डुमरियागंज, डुमरियागंज बांसी, बांसी पनघटिया, सोनखर हाटा, नरकटहा सोनखर, जमींदारी बांध सहित सभी बांधों में जगह-जगह रेन कट और रैट होल बाढ़ के खतरे को बढ़ रहे हैं। यही नहीं इन बांधों में बड़े-बड़े नरकट और झाड़ उगे हुए हैं जो बांध को कमजोर कर रहे हैं।
इससे नदी का जलस्तर बढ़ने पर होने वाले रिसाव को रोकने में जहां दुश्वारी होगी। वहीं, इससे बांध टूटने से बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। हालांकि, राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के दोनों छोर पर बने सभी बांध को सिंचाई विभाग के अभियंता पूरी तरह सुरक्षित बता रहे हैं।
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दावा है कि जहां कुछ दिक्कत है, वहां परियोजनाएं चल रही हैं जो बरसात शुरू होने से पहले पूरी कर ली जाएगी। बता दें कि बूढ़ी राप्ती नदी के दक्षिणी पश्चिमी तट पर बना असोगवा नगवा बांध नदी का जलस्तर बढ़ने पर सात वर्षों में तीन बार टूट चुका है। इस बीच तीनों कटान स्थल सतवाढ़ी, डढ़िया और नगवा के निकट हुई कटान पर ही काम हुआ है।
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता मनीष सिंह कहते हैं कि संभावित बाढ़ के मद्देनजर सभी बांध पर कार्य हुए हैं। कटान स्थलों पर परियोजना चल रही है। यह कार्य बरसात शुरू होने से पहले पूरे कर लिए जाएंगे। सभी बांध सुरक्षित हैं।
बांध टूटने पर घिरा गांव तो छत पर डाला डेरा : बीतें वर्षों में राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे स्थित बांधों के टूटने से जिले में बड़ी तबाही मच चुकी है। आठ वर्ष पूर्व इटवा क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती नदी के दाएं तट पर स्थित दलपतपुर परसोहन बांध के टूटने से कई गांव जलमग्न हो गए थे। वहीं, बूढ़ी राप्ती नदी के ही दक्षिणी पश्चिमी तट पर बना असोगवा नगवा बांध नदी का जलस्तर बढ़ने पर सात वर्षों में तीन बार टूट चुका है। बांसी क्षेत्र में राप्ती किनारे के तटबंध टूटने पर कई गांवों में पानी घुस गया था जबकि बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे बने लखनापार-बैदौला बांध टूटने से जेागिया ब्लॉक क्षेत्र में कई गांव जलमग्न हो गए थे। इससे गांव के कई परिवार ऊंचे स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हुए थे।
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नदियों का जलस्तर बढ़ने पर अत्याधिक दबाव से इनके टूटने पर आसपास के गांव पलक झपकते ही डूब जाएंगे और बड़े पैमाने पर तबाही मचेगी। बीते वर्षों में बांध टूटने से बड़ी तबाही मची थी, जिसका मंजर याद कर बाढ़ पीड़ित आज भी कांप उठते हैं। बांसी क्षेत्र में राप्ती व बूढ़ी राप्ती नदियों के तट पर बने बांसी डुमरियागंज, डुमरियागंज बांसी, बांसी पनघटिया, सोनखर हाटा, नरकटहा सोनखर, जमींदारी बांध सहित सभी बांधों में जगह-जगह रेन कट और रैट होल बाढ़ के खतरे को बढ़ रहे हैं। यही नहीं इन बांधों में बड़े-बड़े नरकट और झाड़ उगे हुए हैं जो बांध को कमजोर कर रहे हैं।
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इससे नदी का जलस्तर बढ़ने पर होने वाले रिसाव को रोकने में जहां दुश्वारी होगी। वहीं, इससे बांध टूटने से बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। हालांकि, राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के दोनों छोर पर बने सभी बांध को सिंचाई विभाग के अभियंता पूरी तरह सुरक्षित बता रहे हैं।
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दावा है कि जहां कुछ दिक्कत है, वहां परियोजनाएं चल रही हैं जो बरसात शुरू होने से पहले पूरी कर ली जाएगी। बता दें कि बूढ़ी राप्ती नदी के दक्षिणी पश्चिमी तट पर बना असोगवा नगवा बांध नदी का जलस्तर बढ़ने पर सात वर्षों में तीन बार टूट चुका है। इस बीच तीनों कटान स्थल सतवाढ़ी, डढ़िया और नगवा के निकट हुई कटान पर ही काम हुआ है।
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता मनीष सिंह कहते हैं कि संभावित बाढ़ के मद्देनजर सभी बांध पर कार्य हुए हैं। कटान स्थलों पर परियोजना चल रही है। यह कार्य बरसात शुरू होने से पहले पूरे कर लिए जाएंगे। सभी बांध सुरक्षित हैं।
बांध टूटने पर घिरा गांव तो छत पर डाला डेरा : बीतें वर्षों में राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे स्थित बांधों के टूटने से जिले में बड़ी तबाही मच चुकी है। आठ वर्ष पूर्व इटवा क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती नदी के दाएं तट पर स्थित दलपतपुर परसोहन बांध के टूटने से कई गांव जलमग्न हो गए थे। वहीं, बूढ़ी राप्ती नदी के ही दक्षिणी पश्चिमी तट पर बना असोगवा नगवा बांध नदी का जलस्तर बढ़ने पर सात वर्षों में तीन बार टूट चुका है। बांसी क्षेत्र में राप्ती किनारे के तटबंध टूटने पर कई गांवों में पानी घुस गया था जबकि बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे बने लखनापार-बैदौला बांध टूटने से जेागिया ब्लॉक क्षेत्र में कई गांव जलमग्न हो गए थे। इससे गांव के कई परिवार ऊंचे स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हुए थे।